हालसा ने सूरजकुंड हस्तशिल्प मेले में ’बालिका’ थीम पर लगाई जागरूकता स्टॉल

नालसा की चेयरपर्सन अमिता उदय उमेश ललित ने किया स्टॉल का अवलोकन 
भिवानी । 35 वें अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड शिल्प मेले ने भारतीय लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को मनाने/फैलाने के लिए अपने दरवाजे खोले हैं। अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले में लाखों लोग शामिल हो चुके हैं, जिसमें विदेशी आगुंतक भी शामिल हैं। सूरजकुंड मेला दुनिया का सबसे बड़ा हस्त शिल्प मेला है, जो भारत के हस्तशिल्प, हथकरघा और सांस्कृतिक ताने-बाने की समृद्ध विविधता को प्रदर्शित करता है। मेले में लोगों को कानूनी रूप से जागरूक करने के लिए हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण भी स्टॉल लगाई गई है। स्टॉल का संचालन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, फरीदाबाद के पैनल एडवोकेट और पैरा लीगल वालंटियर्स द्वारा किया जा रहा है। ये स्टॉल मेले के दौरान चार अप्रैल तक लगी रहेगी। सूरजकुंड मेला 19 मार्च से चल रहा है।
        ये संदेश अमिता उदय उमेश ललित पत्नी उदय उमेश ललित जस्टिस सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया एवं नालसा की चेयरपर्सन ने सूरजकुंड के दौरे के दौरान दिया। इस बारे में जानकारी देते हुए जिला विधिक प्राधिकरण के सचिव एवं सीजेएम हिमांशु सिंह ने बताया कि चेयरपर्सन ने सूरजकुंड शिल्प मेले में हालसा द्वारा स्थापित स्टॉल का निरीक्षण किया और कानूनी सहायता की उपलब्धता के बारे में जागरूकता पैदा करने के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक कानूनी मुद्दों पर जागरूकता पैदा करने के लिए टीम को प्रोत्साहित किया। उन्होंने बातचीत करते हुए कहा कि मेला बड़े पैमाने पर कानूनी जागरूकता फैलाने का अवसर प्रदान कर रहा है। 
            इस वर्ष सूरजकुंड मेले में हालसा द्वारा स्थापित स्टाल की थीम ’’बालिका’’ है। उन्होंने चुने गए विषय की सराहना की और कहा कि यह थीम बालिकाओं के अधिकारों के बारे में जागरूकता को बढावा देने और उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण के महत्व को बढावा देने में मदद करेगा। उन्होंने लड़कियों के अधिकारों के विषय पर हालसा द्वारा डिजाइन और तैयार किए गए एक पोस्टर का विमोचन किया। पोस्टर का उद्देश्य लड़कियों के कानूनी अधिकारों जैसे मुफ्त कानूनी सहायता का अधिकार, शिक्षा का अधिकार, बाल-विवाह के खिलाफ अधिकार, परिवार के अपमानजनक सदस्यों के खिलाफ अधिकार, संपत्ति का अधिकार, कार्यस्थल पर यौन उत्पीडऩ के खिलाफ अधिकार, समान वेतन का अधिकार, थाने में न बुलाने का अधिकार, कन्या-भ्रण हत्या के खिलाफ अधिकार आदि के प्रति जागरूक करना है।  पोस्टर हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में है। उन्होंने एक कहानी के रूप में हिंदी में डिजाइन और मुद्रित एफआईआर (प्रथम सूचना रिपोर्ट) पर एक पुस्तिका का भी उद्घाटन किया। यह पुस्तिका सभी नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका उद्देश्य आपराधिक कानून को गति प्रदान करना है। बुकलेट में प्राथमिकी दर्ज करने के सभी प्रावधानों और उद्देश्यों के बारे में बताया गया है और यह भी बताया गया है कि प्राथमिकी कैसे पुलिस थाने के प्रभारी पुलिस अधिकारी को अपराध की जांच शुरू करने और जल्द से जल्द सबूत एकत्र करने में सक्षम बनाती है।
वहीं दूसरी तरफ जिला विधिक प्राधिकरण के सचिव एवं सीजेएम हिमांशु सिंह ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा है कि यदि कोई नागरिक सूरजकुंड अतंर्राष्ट्रीय हस्त शिल्प मेले में जाता है तो वे वहां पर हालसा द्वारा स्थापित की गई बालिका थीम पर आधारित स्टॉल का अवलोकन जरूर करें।

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