Monday, 19 October 2026
BREAKING
• राखीगढ़ी ऐतिहासिक स्थल हजारों वर्ष पुरानी पहचान, आत्मीयता और स्वाभिमान का प्रतीक : नायब सिंह सैनी • पंचकूला में 2 नवंबर को होगा जनप्रतिनिधि सम्मेलन, विधान सभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने मुख्यमंत्री को दिया निमंत्रण • हरियाणा दिवस पर जाट भवन की नई लिफ्ट का सांसद मनीष तिवारी करेंगे शुभारंभ • हरियाणाः प्राइवेट और पैरा मेडिकल कॉलेजों में तय शुल्क से ज्यादा वसूली करने पर होगी कार्रवाई • अग्रवाल समाज देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है : अशोक बुवानीवाला • किसान को उद्यमी बनाना हमारा उद्देश्य : धनखड़ • हरसिमरत कौर ने गृह मंत्री शाह को लिखा पत्र, नशा-विरोधी कार्यकर्ता की हत्या की सीबीआई जांच की मांग की • पंजाब: 'आप' ने अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोपियों को सजा देने की मांग की • पंजाब: अमृतसर पुलिस ने नशीले पदार्थों और अवैध हथियार तस्करी के गिरोह का किया भंडाफोड़ • भगवंत मान के फ्रांस दौरे पर हरसिमरत कौर बादल ने उठाए सवाल, बोलीं-सीएम ने लोगों को उनके हाल पर छोड़ा

व्यापार

महंगाई से लेकर धीमी आर्थिक वृद्धि तक, पश्चिम एशिया संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था को कई तरह से करेगा प्रभावित: आईएमएफ

Updated on Tuesday, March 31, 2026 16:25 PM IST

नई दिल्ली : अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने कहा है कि अमेरिका-इज़रायल और ईरान के बीच जारी युद्ध वैश्विक अर्थव्यवस्था को कई तरीकों से प्रभावित कर सकता है, लेकिन इसका नतीजा एक ही होगा—महंगाई बढ़ेगी और आर्थिक विकास धीमा पड़ेगा।
आईएमएफ के अनुसार, मध्य पूर्व में चल रहा यह युद्ध न केवल वहां के लोगों की जिंदगी और आजीविका को प्रभावित कर रहा है, बल्कि दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाओं के लिए भी चिंता का कारण बन गया है, जो पहले ही पिछली आर्थिक चुनौतियों से उबरने की कोशिश कर रही थीं।

आईएमएफ ने कहा कि यह संकट पूरी दुनिया को प्रभावित कर रहा है, लेकिन इसका असर सभी देशों पर समान नहीं है। ऊर्जा आयात करने वाले देश ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं, गरीब देशों पर ज्यादा दबाव है और जिन देशों के पास कम आर्थिक भंडार हैं, वे ज्यादा मुश्किल में हैं।
एशिया और यूरोप के बड़े ऊर्जा आयातक देश ईंधन और अन्य इनपुट लागत बढ़ने से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। दुनिया के करीब 25-30 प्रतिशत तेल और 20 प्रतिशत एलएनजी की सप्लाई होर्मुज जलडमरूमध्य से होती है, जो एशिया और यूरोप की जरूरतों को पूरा करती है।

आईएमएफ ने बताया कि अफ्रीका और एशिया के कई देश, जो तेल आयात पर निर्भर हैं, अब बढ़ी हुई कीमतों के बावजूद भी पर्याप्त सप्लाई हासिल करने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं।
संस्था ने चेतावनी दी कि मध्य पूर्व, अफ्रीका, एशिया-प्रशांत और लैटिन अमेरिका के कई हिस्सों में खाद्य और उर्वरक की कीमतें बढ़ने से अतिरिक्त दबाव बन रहा है। खासतौर पर गरीब देशों में खाद्य संकट का खतरा बढ़ सकता है और उन्हें बाहरी मदद की जरूरत पड़ सकती है।

आईएमएफ के मुताबिक, अगर यह युद्ध छोटा रहता है तो तेल और गैस की कीमतें अचानक बढ़ सकती हैं, लेकिन अगर यह लंबे समय तक चलता है तो ऊर्जा की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहेंगी, जिससे आयात पर निर्भर देशों की हालत और खराब हो सकती है।
एशिया के बड़े मैन्युफैक्चरिंग देशों में ईंधन और बिजली की बढ़ती कीमतों से उत्पादन लागत बढ़ रही है और लोगों की खरीद क्षमता पर असर पड़ रहा है। कुछ देशों में भुगतान संतुलन पर भी दबाव दिख रहा है, जिससे उनकी मुद्रा कमजोर हो रही है।

यूरोप में यह संकट 2021-22 के गैस संकट जैसी स्थिति पैदा कर सकता है। इटली और यूनाइटेड किंगडम (यूके) जैसे देश ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं, जबकि फ्रांस और स्पेन जैसे देश अपनी परमाणु और नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के कारण अपेक्षाकृत सुरक्षित हैं।
यह युद्ध केवल ऊर्जा क्षेत्र ही नहीं, बल्कि अन्य जरूरी सप्लाई चेन को भी प्रभावित कर रहा है। जहाजों के रूट बदलने से ट्रांसपोर्ट और बीमा लागत बढ़ रही है और सामान पहुंचने में देरी हो रही है।
आईएमएफ ने यह भी बताया कि खाड़ी क्षेत्र दुनिया में हीलियम की बड़ी सप्लाई करता है, जो सेमीकंडक्टर और मेडिकल उपकरणों में इस्तेमाल होता है। वहीं, इंडोनेशिया को निकेल प्रोसेस करने के लिए जरूरी सल्फर की कमी का सामना करना पड़ सकता है।

पूर्वी अफ्रीका के वे देश जो खाड़ी देशों पर व्यापार और रेमिटेंस के लिए निर्भर हैं, उन्हें भी कमजोर मांग, लॉजिस्टिक समस्याओं और कम पैसे भेजे जाने का असर झेलना पड़ सकता है।
आईएमएफ ने चेतावनी दी कि अगर ऊर्जा और खाद्य कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो इससे पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ेगी।

इसके अलावा, इस युद्ध ने वित्तीय बाजारों को भी प्रभावित किया है। वैश्विक शेयर बाजारों में गिरावट आई है, बॉन्ड यील्ड बढ़ी है, और बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है। हालांकि, अभी तक यह गिरावट पिछले बड़े वैश्विक संकटों की तुलना में सीमित है, लेकिन इससे वित्तीय परिस्थितियां सख्त हो गई हैं।

आईएमएफ ने कहा कि इस स्थिति से निपटने के लिए देशों को सही नीतियां अपनानी होंगी। जिन देशों के पास कम संसाधन हैं, उन्हें खास तौर पर सतर्क रहने की जरूरत है।
आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा, "अनिश्चित दुनिया में ज्यादा देशों को हमारे समर्थन की जरूरत है और हम उनके साथ हैं।"

Have something to say? Post your comment
कच्चे तेल के दबाव के बावजूद रुपया हुआ मजबूत, केंद्रीय बैंक के समर्थन से मुद्रा को मिला सहारा

: कच्चे तेल के दबाव के बावजूद रुपया हुआ मजबूत, केंद्रीय बैंक के समर्थन से मुद्रा को मिला सहारा

वैश्विक तनाव और महंगे कच्चे तेल का असर, गिरावट के साथ कारोबार करने लगा सेंसेक्स-निफ्टी

: वैश्विक तनाव और महंगे कच्चे तेल का असर, गिरावट के साथ कारोबार करने लगा सेंसेक्स-निफ्टी

शेयर बाजार की हालिया कमजोरी का संबंध आसान निकासी से है, लेकिन अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत : वित्त मंत्री सीतारमण

: शेयर बाजार की हालिया कमजोरी का संबंध आसान निकासी से है, लेकिन अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत : वित्त मंत्री सीतारमण

वैश्विक संकेतों से कीमती धातुओं में लौटी चमक, सोना 1.48 लाख रुपए के पार; चांदी में भी मजबूती

: वैश्विक संकेतों से कीमती धातुओं में लौटी चमक, सोना 1.48 लाख रुपए के पार; चांदी में भी मजबूती

नाशवान खाद्य पदार्थों को लेकर एफएसएसएआई सख्त, कारोबारियों के लिए जारी की नई एडवाइजरी

: नाशवान खाद्य पदार्थों को लेकर एफएसएसएआई सख्त, कारोबारियों के लिए जारी की नई एडवाइजरी

भारत की आर्थिक प्रगति जश्न मनाने लायक, अगले वर्षों में भी मजबूत विकास की संभावनाएं : शीर्ष अर्थशास्त्री

: भारत की आर्थिक प्रगति जश्न मनाने लायक, अगले वर्षों में भी मजबूत विकास की संभावनाएं : शीर्ष अर्थशास्त्री

होर्मुज पर हमले तेज, एक सप्ताह के भीतर 14 जहाज क्षतिग्रस्त

: होर्मुज पर हमले तेज, एक सप्ताह के भीतर 14 जहाज क्षतिग्रस्त

एआई से स्वास्थ्य सेवाएं होंगी अधिक सुलभ और प्रभावी, क्लिनिकल निर्णय लेने में भी मिलेगी मदद : एमईआईटीवाई सचिव

: एआई से स्वास्थ्य सेवाएं होंगी अधिक सुलभ और प्रभावी, क्लिनिकल निर्णय लेने में भी मिलेगी मदद : एमईआईटीवाई सचिव

अगला हफ्ता शेयर बाजार के लिए बेहद अहम, तिमाही नतीजे, एफआईआई निवेश और वैश्विक संकेत तय करेंगे दिशा

: अगला हफ्ता शेयर बाजार के लिए बेहद अहम, तिमाही नतीजे, एफआईआई निवेश और वैश्विक संकेत तय करेंगे दिशा

सोना इस हफ्ते तीन हजार रुपए और चांदी दस हजार रुपए से अधिक सस्ती हुई

: सोना इस हफ्ते तीन हजार रुपए और चांदी दस हजार रुपए से अधिक सस्ती हुई

X