नई दिल्ली(एजेंसी) : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को 'पुलिस स्मृति दिवस' के अवसर पर चाणक्यपुरी स्थित राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में पहली बार बिना हिंसा के चुनाव हुए। अब 31 दिसंबर 2029 तक देश को नशे की समस्या से मुक्त कराने का लक्ष्य हासिल करने के लिए काम करेंगे। अमित शाह ने कहा, "आज मैं देश की जनता से कहना चाहता हूं कि सरकार की सभी सेवाओं में यदि कोई सेवा सबसे कठिन है, तो वह पुलिस सेवा है। देश के हर नागरिक के लिए रक्षाबंधन, होली, दीपावली और ईद जैसे त्योहार होते हैं लेकिन पुलिसकर्मियों के लिए कोई त्योहार नहीं होता। जिस दिन हम सभी अपने परिवार के साथ त्योहार मनाते हैं, उस दिन भी हमारा कोई जवान ड्यूटी पर खड़ा रहकर आंतरिक सुरक्षा की चिंता करता है, कहीं यातायात व्यवस्था संभालता है, तो कहीं लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। अपने जीवन के स्वर्णिम दौर को परिवार से दूर रहकर राष्ट्र को समर्पित करना अपने आप में बहुत बड़ी सेवा है। आज पूरे देश में ऐसे अनेक उदाहरण हैं, जहां पुलिस के जवानों ने अभूतपूर्व धैर्य, संयम, अनुशासन, वीरता और समर्पण का परिचय देते हुए देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत किया है।"
गृह मंत्री ने कहा, "देश में चारों ओर शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और सुरक्षा बलों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बिहार में चुनावी हिंसा पर अंकुश लगाने में सफलता मिली है लेकिन पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा की घटनाएं लंबे समय से सामने आती रही हैं। हर चुनाव में 25, 50, 100 और यहां तक कि 200 नागरिकों तक की मौत हो जाती है।"
अमित शाह ने कहा, "मैं सभी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के जवानों को बहुत-बहुत साधुवाद देना चाहता हूं कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बिना किसी व्यक्ति की मृत्यु के चुनाव संपन्न कराने में हमारे सुरक्षा जवानों को बड़ी सफलता मिली है। इसके लिए आपने एक नया मानदंड स्थापित किया है। आज पूरा देश चुनावी हिंसा से मुक्त होने की दिशा में आगे बढ़ा है। विगत कुछ वर्षों में देश के सामने कई ऐसी समस्याएं थीं, जिनका हम दशकों से सामना कर रहे थे। इनमें से कुछ क्षेत्र आंतरिक सुरक्षा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील माने जाते थे। कश्मीर, पूर्वोत्तर और लाल आतंक से प्रभावित क्षेत्र-इन तीनों हॉटस्पॉट में आज शांति का माहौल है, विकास का वातावरण बना है और ये क्षेत्र अब देश के अन्य हिस्सों के साथ विकास की प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार हैं।"
गृह मंत्री ने कहा, "कश्मीर में आतंकवाद पर लगभग पूरी तरह अंकुश लगाने में हमें सफलता मिली है। कई दशकों तक हजारों लोगों की जान लेने वाले संघर्ष के बाद आज पूरा पूर्वोत्तर शांति के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। वहीं, पांच दशक पुरानी और अनेक राज्यों में फैली नक्सलवाद की समस्या को पूरी तरह समाप्त करने में हमारे पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के जवानों को बड़ी सफलता मिली है। नक्सलवाद की समाप्ति के लिए मैं विशेष रूप से सीआरपीएफ और कोबरा बटालियन के जवानों को बहुत-बहुत साधुवाद और बधाई देना चाहता हूं। इसी प्रकार छत्तीसगढ़ पुलिस ने भी बहुत बहादुरी, दृढ़ता और धैर्य के साथ इस समस्या से निपटने में अपना सर्वस्व समर्पित किया है। मैं छत्तीसगढ़ पुलिस को भी बहुत-बहुत साधुवाद देना चाहता हूं। लेकिन मित्रों, देश अभी सभी समस्याओं से मुक्त नहीं हुआ है। हमारे सामने कई चुनौतियां हैं। भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने तय किया है कि वर्ष 2026 के शेष महीनों और आगामी वर्षों में हम सभी मिलकर नशे के खिलाफ संयुक्त लड़ाई लड़ेंगे और 31 दिसंबर 2029 तक देश को नशे की समस्या से मुक्त कराने का लक्ष्य हासिल करने के लिए काम करेंगे। यह हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण लक्ष्य है।"
गृह मंत्री ने कहा, "यह लक्ष्य पिछले तीन सुरक्षा हॉटस्पॉट की चुनौतियों से निपटने जितना ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि नशे की समस्या हमारी आने वाली पीढ़ियों को खोखला करती है, हमारे अर्थतंत्र पर भारी बोझ डालती है और देशविरोधी गतिविधियों में शामिल संगठनों को आर्थिक सहायता पहुंचाने का माध्यम भी बनती है। मैं आज देशभर की पुलिस से आह्वान करना चाहता हूं कि हमने नशामुक्त भारत का जो रोडमैप तैयार किया है और देश के प्रधानमंत्री मोदी ने हमारे सामने जो लक्ष्य रखा है, उसकी प्राप्ति के लिए पूरी प्रतिबद्धता और मनोयोग से जुट जाएं, ताकि हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित कर सकें।"