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व्यापार

MSME निर्यात बढ़ाने के लिए सरकार ने शुरू किया एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन

Updated on Friday, February 20, 2026 19:05 PM IST

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आज Export Promotion Mission (EPM) के तहत सात नई पहलों की शुरुआत की। यह वाणिज्य विभाग की एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को वैश्विक बाजार में मजबूत बनाना और भारत की निर्यात क्षमता को बढ़ाना है। इस मौके पर वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल भी मौजूद रहे। सरकार का कहना है कि ये कदम भारतीय निर्यातकों की प्रमुख चुनौतियों को दूर करने, समावेशी निर्यात वृद्धि सुनिश्चित करने और भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी निर्यातक बनाने की दिशा में अहम हैं।

World Day of Social Justice के अवसर पर मंत्री ने कहा कि सामाजिक न्याय का मतलब विकास को समाज के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचाना है। उन्होंने समावेशी विकास, वंचित वर्गों को सशक्त बनाने और देश के तेजी से बदलते आर्थिक माहौल में सभी को अवसर देने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत उभरती तकनीकों और वैश्विक साझेदारियों के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। हाल में आयोजित AI Summit का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इससे भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और भविष्य की तकनीकों के वैश्विक विमर्श के केंद्र में स्थान मिला है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, क्वांटम कंप्यूटिंग, डेटा सेंटर और स्वदेशी large language models जैसी तकनीकें भारत के युवाओं के लिए बड़े अवसर पैदा करेंगी और विभिन्न क्षेत्रों में निवेश बढ़ाएंगी।

पीयूष गोयल ने बताया कि Free Trade Agreements (FTA) के विस्तार से भारतीय निर्यातकों की बाजार तक पहुंच काफी बढ़ी है। उन्होंने कहा कि नौ संपन्न FTAs के जरिए भारत को अब लगभग 70 प्रतिशत वैश्विक GDP और दुनिया के दो-तिहाई व्यापार तक पहुंच मिली है, जिसमें अमेरिका के साथ Bilateral Trade Agreement का पहला चरण भी शामिल है। इन समझौतों से 38 विकसित और उभरती अर्थव्यवस्थाओं में भारतीय उत्पादों को बेहतर पहुंच मिली है। उन्होंने कहा कि भारत आज विकसित देशों के साथ आत्मविश्वास से व्यापार कर रहा है, जहां संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा के साथ प्रतिस्पर्धी क्षेत्रों में लाभ सुनिश्चित किया जा रहा है। 2022 से भारत ने व्यापार समझौतों को तेज किया है, निवेश सहयोग बढ़ाया है, नियमों को सरल बनाया है और Ease of Doing Business में सुधार किया है। उन्होंने भारत द्वारा कई शहरों में सफलतापूर्वक G20 Summit आयोजित करने का भी उल्लेख किया।

मंत्री ने कहा कि वैश्विक व्यापार का लाभ हर MSME, स्टार्टअप और उद्यमी तक पहुंचना चाहिए। Export Promotion Mission का उद्देश्य नए उत्पादों, नई सेवाओं और नए निर्यातकों को बढ़ावा देना है, ताकि भारतीय व्यवसाय नए बाजारों में प्रवेश कर सकें। उन्होंने बताया कि फरवरी के पहले पखवाड़े में भारत के merchandise exports में double-digit वृद्धि दर्ज की गई है, जो बाजार में बढ़ते विश्वास और उद्योग की सक्रिय भागीदारी का संकेत है। इस मिशन के तहत MSMEs के लिए प्रक्रियाएं आसान बनाई जाएंगी, ऋण तक पहुंच मजबूत की जाएगी, गुणवत्ता मानकों और अंतरराष्ट्रीय नियमों के पालन में मदद दी जाएगी और वैश्विक लॉजिस्टिक्स एवं वेयरहाउसिंग ढांचे को मजबूत किया जाएगा। दुबई में Bharat Mart जैसे विदेशी वेयरहाउसिंग प्रोजेक्ट भारतीय निर्यातकों को GCC, अफ्रीका, मध्य एशिया और यूरोप के बाजारों तक रणनीतिक पहुंच देने के लिए तैयार किए जा रहे हैं।

Export Promotion Mission को ‘Niryat Protsahan’ और ‘Niryat Disha’ नामक दो हिस्सों के जरिए लागू किया जा रहा है, जिन्हें डिजिटल निगरानी के साथ एकीकृत ढांचे में संचालित किया जाएगा। यह मिशन वाणिज्य विभाग द्वारा MSME मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, EXIM Bank, CGTMSE, NCGTC, बैंकिंग संस्थानों, विदेशों में भारतीय मिशनों और विभिन्न उद्योग संगठनों के सहयोग से लागू किया जा रहा है। नई पहलों का उद्देश्य MSMEs की उन मूल समस्याओं को कम करना है जिनमें पूंजी की ऊंची लागत, व्यापार वित्त की कमी, अंतरराष्ट्रीय नियमों के पालन में कठिनाई, लॉजिस्टिक्स से जुड़ी चुनौतियां और नए बाजारों में प्रवेश की बाधाएं शामिल हैं।

नई घोषणाओं में export factoring को बढ़ावा देकर MSMEs को किफायती working capital उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है, जिसमें पात्र लेनदेन पर 2.75 प्रतिशत ब्याज सहायता और प्रति MSME सालाना 50 लाख रुपये तक सहायता दी जाएगी। ई-कॉमर्स के जरिए निर्यात करने वाले व्यवसायों के लिए structured credit सुविधा भी शुरू की गई है, जिसमें direct e-commerce credit के तहत 50 लाख रुपये तक और overseas inventory credit के तहत 5 करोड़ रुपये तक सहायता दी जाएगी। इसमें 2.75 प्रतिशत ब्याज सहायता और आंशिक क्रेडिट गारंटी का प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा नए और जोखिम वाले बाजारों में निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अलग से समर्थन तंत्र शुरू किया गया है, जिससे निर्यातकों का भरोसा और वित्तीय प्रवाह मजबूत होगा।

इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय टेस्टिंग, निरीक्षण और प्रमाणन की लागत में आंशिक सहायता, विदेशों में वेयरहाउसिंग और fulfillment ढांचे के लिए सहायता, कम निर्यात वाले जिलों के निर्यातकों को माल ढुलाई खर्च में राहत और व्यापार जानकारी व क्षमता निर्माण को मजबूत करने जैसी योजनाएं भी शुरू की गई हैं। इन पहलों के माध्यम से सरकार का लक्ष्य निर्यात लागत कम करना, व्यापार व्यवस्था को मजबूत बनाना और भारतीय MSMEs को वैश्विक बाजारों से बेहतर तरीके से जोड़ना है। पहले से लागू तीन पहलों के साथ अब Export Promotion Mission की 11 में से 10 योजनाएं चालू हो चुकी हैं।

इस पहल का राज्य सरकारों, Export Promotion Councils और उद्योग संगठनों जैसे FIEO, EEPC, GJEPC, CII, FICCI, PHDCCI, ASSOCHAM और NASSCOM ने स्वागत किया है और इसके प्रभावी क्रियान्वयन का समर्थन किया है।

 

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