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व्यापार

मध्य पूर्व तनाव ने बढ़ाई तेल बाजार की चिंता, वैश्विक कीमतों में उथल-पुथल

Updated on Wednesday, March 25, 2026 16:44 PM IST

मध्य पूर्व में लंबे समय तक संघर्ष की आशंका और शांति की कोशिशों के संकेत के बीच तेल बाजार में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। एक समय कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गईं लेकिन बाद में फिर नीचे आ गईं। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, वॉल स्ट्रीट भी स्पष्ट दिशा तय नहीं कर पा रहा है। एक तरफ कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई, वहीं बॉन्ड बिके और शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई। वाशिंगटन और मध्य पूर्व से मिल रहे अलग-अलग संकेतों ने बाजार को उलझन में डाल दिया।

रिपोर्ट के अनुसार, ब्रेंट क्रूड की कीमत 4.6 प्रतिशत बढ़कर 104.49 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) 4.8 प्रतिशत चढ़कर 92.35 डॉलर प्रति बैरल हो गया। यह उछाल तब आया जब खबरें सामने आईं कि पेंटागन मध्य पूर्व में एक कॉम्बैट ब्रिगेड तैनात कर रहा है। वहीं दूसरी ओर, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए कि ईरान के साथ शांति वार्ता में प्रगति हो रही है। इन विरोधाभासी संकेतों के कारण निवेशकों के लिए स्थिति को समझना मुश्किल हो गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक तेल की ऊंची कीमतें आर्थिक विकास को प्रभावित कर सकती हैं। लिटिल हार्बर एडवाइजर्स के डेविड लुंडग्रेन ने कहा, “जितना ज्यादा समय तेल की कीमतें ऊंची रहेंगी, यह अर्थव्यवस्था की रफ्तार को अपने आप धीमा कर देगी।” तेल बाजार की यह अस्थिरता अन्य बाजारों में भी दिखी। नैस्डैक 0.8 प्रतिशत गिरा, एस एंड पी 500 में 0.4 प्रतिशत की कमी आई, और डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई। वहीं अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी देखी गई।

वैनगार्ड की कियान वांग ने चेतावनी दी कि तेल की कीमतों में उछाल ‘स्टैगफ्लेशनरी शॉक’ पैदा कर सकता है, यानी महंगाई बढ़ने के साथ आर्थिक विकास धीमा पड़ सकता है। इसी बीच, ट्रेडर्स का मानना है कि कीमतें और बढ़ सकती हैं। ब्रेंट क्रूड के 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने पर दांव लगाए जा रहे हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि सप्लाई में बाधा लंबे समय तक बनी रह सकती है।

द वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, मध्य पूर्व में शांति की दिशा में प्रगति के संकेत मिलने के बाद शुरुआती कारोबार में तेल की कीमतों में गिरावट आई। रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तान, कतर और अन्य देशों की मदद से शांति के प्रयास जारी हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने भी कहा कि उनकी सरकार ईरान से बातचीत कर रही है और उन्होंने तेल-गैस से जुड़े एक उपहार का भी जिक्र किया।

फिर भी विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव जल्दी खत्म भी हो जाए, तब भी कीमतों में राहत धीरे-धीरे ही मिलेगी। दी न्यू यॉर्क टाइम्स के मुताबिक, मूडीज एनालिटिक्स के मुख्य अर्थशास्त्री मार्क जांदी ने कहा, “कीमतें रॉकेट की तरह बढ़ती हैं, लेकिन पंख की तरह गिरती हैं।” विश्लेषकों का कहना है कि उत्पादन और सप्लाई को सामान्य होने में 6 से 8 हफ्ते लग सकते हैं, और तब भी कीमतें युद्ध से पहले के स्तर से ऊपर रह सकती हैं।

अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट के माइक समर्स ने भी अनिश्चितता जताते हुए कहा, “हमें नहीं पता कि कीमतें आगे कहां जाएंगी।” इस बीच, सीएनएन के विश्लेषण के अनुसार पेट्रोल की कीमतें अभी भी करीब 4 डॉलर प्रति गैलन बनी हुई हैं, और कच्चे तेल की कीमत घटने का असर उपभोक्ताओं तक पहुंचने में समय लगेगा। खास बात यह है कि बाजार की नजरें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर टिकी हैं, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अहम मार्ग है। यहां किसी भी तरह की रुकावट से कीमतों में और बड़ा उछाल आ सकता है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है।

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