राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सदन को संबोधित करते हुए भारत की वैज्ञानिक प्रगति और प्रौद्योगिकीय आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह उपलब्धि देश के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए मील का पत्थर है।
कलपक्कम में 500 मेगावाट पीएफबीआर ने रचा इतिहास
सभापति ने बताया कि 6 अप्रैल 2026 को कलपक्कम में स्थापित 500 मेगावाट क्षमता वाले प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) ने सफलतापूर्वक ‘प्रथम क्रिटिकैलिटी’ प्राप्त कर ली। यह वह अवस्था है, जब रिएक्टर में नियंत्रित और निरंतर परमाणु श्रृंखला अभिक्रिया शुरू होती है।
दो दशकों के प्रयास का परिणाम
उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल तकनीकी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय उपलब्धि है। इसमें दो दशकों से अधिक समय तक हजारों वैज्ञानिकों, अभियंताओं, उद्योगों और परमाणु ऊर्जा विभाग की विभिन्न इकाइयों का योगदान रहा है।
नेट-जीरो लक्ष्य की दिशा में मजबूत कदम
सभापति ने कहा कि यह सफलता भारत के परमाणु ऊर्जा मिशन को मजबूती देती है और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में अहम भूमिका निभाएगी। यह लक्ष्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित किया गया था। मार्च 2024 में पीएफबीआर की ‘कोर-लोडिंग’ के दौरान प्रधानमंत्री स्वयं मौजूद रहे थे।
तीन-चरणीय परमाणु रणनीति का दूसरा चरण शुरू
उन्होंने बताया कि भारत की परमाणु ऊर्जा रणनीति तीन चरणों में विभाजित है। पहले चरण में प्राकृतिक यूरेनियम का उपयोग होता है, जिससे प्लूटोनियम प्राप्त होता है। पीएफबीआर के साथ भारत अब दूसरे चरण में प्रवेश कर चुका है, जिसमें फास्ट ब्रीडर रिएक्टर अधिक ईंधन उत्पन्न करने की क्षमता रखते हैं। तीसरे चरण में थोरियम आधारित रिएक्टर विकसित किए जाएंगे।
स्वच्छ और विश्वसनीय ऊर्जा का स्रोत
सभापति ने कहा कि बढ़ती ऊर्जा मांग के बीच परमाणु ऊर्जा एक विश्वसनीय, 24×7 उपलब्ध और कम कार्बन उत्सर्जन वाला स्रोत है। उन्होंने दिसंबर 2025 में पारित “एसएचएएनटीआई अधिनियम” का भी उल्लेख किया, जिससे असैनिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को व्यापक रूप से खोला गया है।
स्वदेशी तकनीक और सहयोग का उदाहरण
उन्होंने बताया कि यह रिएक्टर पूरी तरह स्वदेशी प्रयासों से विकसित हुआ है। इसका डिजाइन इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र ने तैयार किया, जबकि निर्माण भारतीय नाभकीय विद्युत निगम लिमिटेड द्वारा भारतीय उद्योग के सहयोग से किया गया।
वैश्विक स्तर पर भारत की मजबूत उपस्थिति
सभापति ने कहा कि इस उपलब्धि के साथ भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जिन्होंने इस उन्नत परमाणु तकनीक में महारत हासिल की है। यह भारत की आत्मनिर्भरता और तकनीकी क्षमता का प्रमाण है।
भविष्य के लिए नई संभावनाएं
उन्होंने कहा कि पीएफबीआर का सफल संचालन देश में परमाणु ऊर्जा विस्तार को गति देगा और उन्नत रिएक्टर तकनीक, ईंधन चक्र और उच्च स्तरीय अभियांत्रिकी में नए अवसर पैदा करेगा।
‘विकसित भारत’ की दिशा में अहम कदम
सभापति ने इसे एक नई शुरुआत बताते हुए कहा कि यह उपलब्धि ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगी और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगी।
वैज्ञानिकों और अभियंताओं को धन्यवाद
अंत में उन्होंने वैज्ञानिकों, अभियंताओं, तकनीशियनों और सभी सहयोगी संस्थाओं के योगदान की सराहना करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।