पंचकूला : नाबार्ड द्वारा वाटरशेड विकास योजना के अंतर्गत वित्त पोषित टापरियI वाटरशेड विकास परियोजना के फुल इम्प्लीमेंटेशन फेज (FIP) एवं क्लाइमेट प्रूफिंग इंटरवेंशन्स (CPI) चरण का औपचारिक शुभारंभ आज इंस्टीट्यूट फॉर स्पेशल प्लानिंग एंड एनवायरनमेंट रिसर्च (ISPER), अमरावती एन्क्लेव, पंचकूला में किया गया।
टापरियन वाटरशेड लगभग 1,349 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें अमराला, टापरियां, तरलोकपुर, भूड़, भोज पोंटा, काज़मपुर, कैमवाला, मानक टबरा तथा खैरवाली परवाला सहित कुल नौ गांव शामिल हैं, जो पंचकूला जिले के बरवाला एवं मोरनी ब्लॉकों में स्थित हैं।
इस अवसर पर नाबार्ड क्षेत्रीय कार्यालय हरियाणा, चंडीगढ़ की मुख्य महाप्रबंधक श्रीमती निवेदिता तिवारी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उन्होंने परियोजना के फुल इम्प्लीमेंटेशन फेज एवं क्लाइमेट प्रूफिंग इंटरवेंशन्स चरणों का विधिवत शुभारंभ किया तथा ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ करने, जलवायु अनुकूलन क्षमता बढ़ाने एवं सतत प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन को प्रोत्साहित करने में वाटरशेड आधारित हस्तक्षेपों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नाबार्ड कृषि, वाटरशेड विकास तथा जलवायु-संवेदनशील अवसंरचना में लक्षित निवेशों के माध्यम से ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। नाबार्ड निरंतर ऐसे नवाचारी परियोजनाओं को समर्थन प्रदान करता रहा है, जो जल सुरक्षा को बढ़ाने, मृदा स्वास्थ्य सुधारने तथा सतत आजीविका हस्तक्षेपों के माध्यम से किसानों की आय में वृद्धि करने में सहायक हैं।
कार्यक्रम का आयोजन ISPER में किया गया, जिसमें परियोजना से जुड़े हितधारकों, वाटरशेड समिति सदस्यों, स्वयं सहायता समूह की महिलाओं एवं स्थानीय प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान वाटरशेड गतिविधियों के अभिसरण, सामुदायिक सहभागिता तथा FIP एवं CPI चरणों के अंतर्गत हस्तक्षेपों की दीर्घकालिक स्थिरता पर चर्चा की गई।
यह शुभारंभ क्षेत्र में एकीकृत वाटरशेड विकास प्रयासों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है तथा जलवायु-लचीले ग्रामीण विकास के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
परियोजना समन्वयक श्री जे.पी. सिंह ने जानकारी दी कि मल्लाह वाटरशेड एवं शिवालिक वाटरशेड परियोजनाओं के क्लाइमेट प्रूफिंग इंटरवेंशन (CPI) चरण सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिए गए हैं। मल्लाह वाटरशेड परियोजना 1,432 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हुई है, जिसमें मल्लाह, तिब्बी, बेरघाटी, धामसू, गवाही, नंदपुर, केदारपुर, जबरोट, फतेहपुर दीवानवाला एवं हरिपुर हरिसिंह गांव शामिल हैं। वहीं शिवालिक वाटरशेड परियोजना 1,480 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हुई है, जिसमें रायपुर रानी ब्लॉक, पंचकूला जिले के भरोली, काज़ीमपुर, शाहपुर, रामपुर, थडों, मसूमपुर (आंशिक), भादौर, भोज राजपुरा (आंशिक), भोज पोंटा (आंशिक), रत्ता तिब्बी, नारायणपुर, गोविंदपुर एवं कैमवाला गांव शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि इन परियोजनाओं के अंतर्गत विभिन्न महत्वपूर्ण गतिविधियों एवं संरचनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया गया है, जिससे क्षेत्र में जल संरक्षण एवं जलवायु अनुकूलन क्षमता को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिला है। इस अवसर पर मुख्य महाप्रबंधक ने दोनों परियोजनाओं के अंतर्गत निर्मित परिसंपत्तियों को संबंधित ग्राम वाटरशेड समितियों को भविष्य में रखरखाव एवं सतत उपयोग हेतु औपचारिक रूप से हस्तांतरित किया। यह हस्तांतरण सामुदायिक स्वामित्व एवं दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया।
फतेहपुर दीवानवाला में निर्मित सब-सर्फेस डैम से परियोजना क्षेत्र में जल विज्ञान, कृषि, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विकास, पर्यावरण एवं जलवायु अनुकूलन क्षमता पर महत्वपूर्ण सकारात्मक प्रभाव देखने को मिले हैं। जल विज्ञान के दृष्टिकोण से सिंचाई एवं पशुओं के लिए वर्षभर जल उपलब्धता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, साथ ही (आरसीसी) पाइपलाइन नेटवर्क के कारण जलधारा एवं जल परिवहन प्रणाली में होने वाले जल नुकसान में कमी आई है।
गैर-वाटरशेड दृष्टिकोण के अंतर्गत नारायणवाला गांव में भूजल पुनर्भरण तालाब परियोजना भी पूर्ण की गई है। इस परियोजना से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 296 परिवारों तथा 1,737 ग्रामीणों को लाभ प्राप्त हुआ है, जिससे समुदाय में जल सुरक्षा, पशुधन सहयोग, कृषि स्थिरता एवं जलवायु अनुकूलन क्षमता को मजबूती मिली है।
श्रीमती तिवारी ने गैर-वाटरशेड दृष्टिकोण के अंतर्गत विकसित फतेहपुर दीवानवाला स्थित सब-सर्फेस डैम का उद्घाटन भी किया। यह संरचना भूजल पुनर्भरण में वृद्धि, जल उपलब्धता सुधारने तथा क्षेत्र में कृषि उत्पादकता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
कार्यक्रम में नाबार्ड क्षेत्रीय कार्यालय हरियाणा के डीजीएम् (एफएसडीडी) श्री विवेक रघुवंशी तथा डीडीएम अम्बाला एवं पंचकूला श्री पुष्पेन्द्र सिंह भी उपस्थित रहे।
ISPER की ओर से श्री एम.एस. औजला, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, श्री जसवंत सिंह, महासचिव, श्री जे.पी. सिंह, परियोजना समन्वयक, श्रीमती हरप्रीत कौर हजारा, समाजशास्त्री तथा अन्य टीम सदस्यों एवं विशेषज्ञों ने कृषक समुदाय विकास गतिविधियों पर प्रकाश डाला।