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पंजाब

‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना’ के तहत पंजाब में हाई-रिस्क डिलीवरी और नवजात शिशु देखभाल को मिला बड़ा सहारा

Updated on Monday, May 25, 2026 19:47 PM IST

चंडीगढ़ : पंजाब सरकार की ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना’ के माध्यम से हाई-रिस्क गर्भावस्था और नवजात शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को विशेष रूप से मजबूती मिल रही है। यह योजना जटिल प्रसव और गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं के इलाज को परिवारों के लिए बिना किसी आर्थिक बोझ के आसान बना रही है।

भारत के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5) पर आधारित एक महत्वपूर्ण अध्ययन के अनुसार, देश में लगभग हर दो में से एक गर्भावस्था हाई-रिस्क श्रेणी में आती है। शिक्षा की कमी, गरीबी, दो गर्भों के बीच कम अंतराल, पिछली प्रसव जटिलताएं और पहले हुई सिजेरियन डिलीवरी जैसे कारक मां और बच्चे दोनों के लिए जोखिम पैदा करते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की महिलाएं सबसे अधिक जोखिम का सामना करती हैं, जिससे मातृत्व स्वास्थ्य सेवाओं और जागरूकता कार्यक्रमों को और मजबूत करने की आवश्यकता स्पष्ट होती है।

स्वास्थ्य कार्ड उन महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा बनकर उभरा है, जिन्हें प्रसव के दौरान लंबे समय तक दर्द, स्वास्थ्य समस्याओं, भ्रूण की अस्वस्थ स्थिति या पहले हुई सिजेरियन डिलीवरी के कारण ऑपरेशन संबंधी इलाज की आवश्यकता पड़ती है। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 25 मई 2026 तक योजना के तहत मातृत्व और नवजात देखभाल के कुल 7,300 मामलों में इलाज प्रदान किया गया, जिस पर लगभग 7.04 करोड़ रुपये खर्च हुए। इनमें 5,300 हाई-रिस्क सिजेरियन डिलीवरी शामिल हैं, जिन पर 6.37 करोड़ रुपये खर्च किए गए। ये आंकड़े पंजाब में उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था और आपातकालीन प्रसूति सेवाओं में योजना की बढ़ती भूमिका को दर्शाते हैं।

पटियाला की 28 वर्षीय लाभार्थी दीपिका, जिन्हें गर्भावस्था के दौरान एनीमिया सहित कई जटिलताओं का सामना करना पड़ा, ने अपना व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनका सिजेरियन ऑपरेशन स्वास्थ्य कार्ड के तहत पूरी तरह कैशलेस हुआ। उनके पति मनोज ने कहा कि पूरा इलाज बिना किसी आर्थिक बोझ के सुचारू रूप से हुआ, जो उनके लिए बड़ी राहत की बात है।

इसी तरह 31 वर्षीय दीक्षा सोनकर ने अपने तीसरे बच्चे के जन्म के दौरान ‘पंजाब इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज’ मेडिकल कॉलेज अस्पताल में समय पर मातृत्व और नवजात देखभाल प्राप्त की, जो योजना के तहत पूरी तरह कैशलेस रही। उनके पति विकास सोनकर ने कहा, “हमारी पहले से ही दो बेटियां हैं और हम चिंतित थे कि तीसरी डिलीवरी में कोई जटिलता न आ जाए।”

विकास सोनकर ने आगे कहा कि जब भी घर में किसी को अस्पताल जाने की स्थिति बनती है तो आर्थिक तनाव बढ़ जाता है। विकास, जो एक दिहाड़ी मजदूर हैं, बताते हैं कि ऐसे समय में उन्हें ब्याज पर पैसे उधार लेने पड़ते हैं। यह उस कठोर सच्चाई को दर्शाता है कि स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च उठाने के लिए कम आय वर्ग के मजदूरों को किस तरह संघर्ष करना पड़ता है। उन्होंने कहा, “लेकिन स्वास्थ्य कार्ड ने इस बार बड़ी राहत दी।”

मातृत्व सेवाओं के साथ-साथ यह योजना गंभीर रूप से बीमार और समय से पहले जन्मे नवजात शिशुओं के लिए विशेष इलाज सहायता भी प्रदान कर रही है।

राज्य स्वास्थ्य एजेंसी, पंजाब के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, योजना के तहत विभिन्न पैकेजों में कुल 2,094 नवजात शिशुओं का इलाज किया गया। बेसिक नियोनेटल केयर, जो उन शिशुओं को सहायता प्रदान करती है जिनका इलाज उनकी माताओं के साथ-साथ किया जाता है, के अंतर्गत 881 नवजातों का इलाज किया गया, जिस पर 5.82 लाख रुपये खर्च हुए।

इसी प्रकार अल्प अवधि के इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) इलाज की आवश्यकता वाले 777 नवजातों को स्पेशल नियोनेटल केयर पैकेज के तहत लाभ मिला, जिस पर 28.27 लाख रुपये खर्च हुए। इंटेंसिव नियोनेटल केयर पैकेज के अंतर्गत 207 नवजातों को कंटीन्यूअस पॉजिटिव एयरवे प्रेशर (सीपीएपी) सहायता, 24 घंटे से कम वेंटिलेशन तथा नवजात संक्रमण जैसी गंभीर स्थितियों के इलाज के लिए सहायता दी गई, जिस पर 15.65 लाख रुपये खर्च किए गए।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 1,200 से 1,499 ग्राम वजन वाले अथवा लंबे समय तक वेंटिलेटर सहायता की आवश्यकता वाले 116 अत्यंत संवेदनशील नवजातों को एडवांस्ड नियोनेटल केयर प्रदान की गई, जिस पर 9.30 लाख रुपये खर्च हुए।

इसके अतिरिक्त, समय से पहले जन्म, बहु-अंग जटिलताओं अथवा गंभीर चिकित्सीय अस्थिरता से जूझ रहे 64 नवजातों को क्रिटिकल नियोनेटल केयर उपलब्ध करवाई गई, जिस पर 7.88 लाख रुपये खर्च हुए। इसके साथ ही 18 नवजातों को लंबे समय की क्रॉनिक नियोनेटल केयर सहायता भी प्रदान की गई। इसके अलावा, दीर्घकालीन नवजात देखभाल के तहत 17 शिशुओं को शामिल किया गया, जिन्हें ब्रोंकोपल्मोनरी डिस्प्लेसिया और नेक्रोटाइजिंग एंटेरोकोलाइटिस जैसी गंभीर स्थितियों के लिए लंबे समय तक इलाज की आवश्यकता पड़ी, जिसकी लागत 56 हजार रुपये रही।

‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना’ अब पंजाब के परिवारों के लिए एक बड़ा स्वास्थ्य सुरक्षा कवच बन रही है और अब तक इसके तहत लगभग 44.8 लाख पंजीकरण हो चुके हैं।

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