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व्यापार

भारत–ब्रिटेन CETA : वैश्विक आर्थिक नेतृत्व की दिशा में भारत का बड़ा कदम

Updated on Saturday, July 18, 2026 18:59 PM IST

भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (Comprehensive Economic and Trade Agreement–CETA) का लागू होना केवल एक द्विपक्षीय व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में भारत की बढ़ती भूमिका का स्पष्ट संकेत है। भू-राजनीतिक तनाव, संरक्षणवाद, सप्लाई चेन में व्यवधान और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच विकसित अर्थव्यवस्था के साथ भारत का यह व्यापक समझौता उसकी आर्थिक परिपक्वता, रणनीतिक सोच और कूटनीतिक क्षमता को भी रेखांकित करता है।

व्यापार नीति में आया बड़ा बदलाव
पिछले एक दशक में भारत की व्यापार नीति में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला है। लंबे समय तक भारत मुक्त व्यापार समझौतों को लेकर सतर्क रहा, लेकिन अब उसकी रणनीति केवल शुल्कों में कमी तक सीमित नहीं है। नए व्यापार समझौतों में निवेश, सेवाएं, डिजिटल व्यापार, बौद्धिक संपदा, कौशल विकास, प्रौद्योगिकी सहयोग और वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में भागीदारी जैसे व्यापक पहलुओं को भी शामिल किया जा रहा है। भारत–ब्रिटेन CETA इसी नई नीति का महत्वपूर्ण उदाहरण है।

निर्यात और निवेश को मिलेगा नया आधार
ब्रिटेन भारत का महत्वपूर्ण व्यापारिक और निवेश साझेदार है। वित्तीय सेवाओं, उच्च शिक्षा, अनुसंधान और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच पहले से मजबूत सहयोग रहा है। CETA के तहत भारत के लगभग 99% निर्यात उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार में अधिमान्य पहुंच मिलने से वस्त्र एवं परिधान, चमड़ा, इंजीनियरिंग उत्पाद, रत्न एवं आभूषण, औषधि, समुद्री उत्पाद तथा कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है।

एमएसएमई को मिलेंगे वैश्विक अवसर
इस समझौते का लाभ केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगा। प्रभावी क्रियान्वयन होने पर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) भी वैश्विक बाजारों तक अपनी पहुंच बढ़ा सकेंगे। व्यापारिक बाधाओं में कमी, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं के सरलीकरण और बेहतर बाजार पहुंच से एमएसएमई की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत होगी। इससे ‘मेक इन इंडिया’, ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘स्टार्टअप इंडिया’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसी पहलों को भी नई गति मिलेगी।

कृषि क्षेत्र के लिए खुलेंगे नए बाजार
भारतीय चाय, मसाले, बासमती चावल, फल, समुद्री उत्पाद और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की वैश्विक मांग लगातार बढ़ रही है। ब्रिटेन जैसे उच्च क्रय-शक्ति वाले बाजार तक बेहतर पहुंच किसानों की आय बढ़ाने और कृषि निर्यात को प्रोत्साहित करने में सहायक हो सकती है। हालांकि इसके लिए गुणवत्ता मानकों, खाद्य सुरक्षा प्रमाणन, आधुनिक लॉजिस्टिक्स और कोल्ड-चेन अवसंरचना को और मजबूत करना होगा।

सेवा क्षेत्र और पेशेवरों को होगा लाभ
सूचना प्रौद्योगिकी, वित्तीय सेवाओं, स्वास्थ्य, शिक्षा और पेशेवर सेवाओं में भारत की मजबूत उपस्थिति है। CETA के तहत कुशल पेशेवरों की आवाजाही को आसान बनाने और सामाजिक सुरक्षा अंशदान से जुड़े प्रावधानों में राहत जैसे कदम भारतीय युवाओं और पेशेवरों के लिए नए अवसर पैदा करेंगे। इससे भारत को वैश्विक प्रतिभा और नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी मजबूती मिलेगी।

वैश्विक व्यापार रणनीति का हिस्सा है CETA
भारत ने हाल के वर्षों में संयुक्त अरब अमीरात, ऑस्ट्रेलिया, यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) और अब ब्रिटेन के साथ व्यापक व्यापार समझौते किए हैं। इसके अलावा यूरोपीय संघ सहित कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ भी वार्ताएं जारी हैं। इससे स्पष्ट है कि भारत वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में अपनी भागीदारी बढ़ाने और विश्वसनीय विनिर्माण एवं निवेश गंतव्य के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करने की दीर्घकालिक रणनीति पर काम कर रहा है।

प्रभावी क्रियान्वयन होगा सफलता की कुंजी
किसी भी व्यापार समझौते की सफलता केवल उसके हस्ताक्षर से तय नहीं होती। भारतीय उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाना, निर्यातकों को बेहतर लॉजिस्टिक्स उपलब्ध कराना, गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित करना, कौशल विकास, अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देना और व्यापार सुविधा तंत्र को अधिक प्रभावी बनाना आवश्यक होगा। साथ ही यह सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण होगा कि छोटे उद्योग, किसान और स्टार्टअप भी इस समझौते के लाभों का समान रूप से फायदा उठा सकें।

भारत की वैश्विक आर्थिक भूमिका होगी और मजबूत
भारत–ब्रिटेन CETA केवल व्यापार बढ़ाने का समझौता नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक नीति, वैश्विक दृष्टि और रणनीतिक कूटनीति का प्रतीक है। यह समझौता दर्शाता है कि भारत अब केवल एक बड़ा उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि नियम-आधारित, विश्वसनीय और प्रभावशाली आर्थिक भागीदार के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की दिशा में यह समझौता निवेश, नवाचार, रोजगार और निर्यात आधारित विकास को नई गति देने की क्षमता रखता है।

 

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