हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) में कुलपति की पत्नी की कैंपस स्कूल निदेशक के पद पर नियुक्ति को लेकर प्रधान महालेखाकार (ऑडिट) द्वारा उठाई गई गंभीर आपत्तियों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह मामला भाजपा सरकार के शासन में व्याप्त भाई-भतीजावाद, पक्षपात और नियमों की अनदेखी का एक और उदाहरण है।
राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि ऑडिट रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि बिना आवेदन आमंत्रित किए और स्थापित भर्ती प्रक्रिया का पालन किए बिना नियुक्ति की गई। इससे न केवल योग्य अभ्यर्थियों के समान अवसर के अधिकार का हनन हुआ, बल्कि विश्वविद्यालय जैसी प्रतिष्ठित संस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है। उन्होंने कहा कि यदि ऑडिट रिपोर्ट, मंडल आयुक्त की जांच और शिक्षा विभाग की आपत्तियों के बावजूद सरकार कार्रवाई नहीं करती है तो यह साबित हो जाएगा कि भाजपा सरकार भ्रष्टाचार और नियमों के उल्लंघन को संरक्षण दे रही है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि हरियाणा की शिक्षा व्यवस्था पहले ही शिक्षकों के खाली पदों, जर्जर स्कूलों और भर्ती में अनियमितताओं से जूझ रही है। ऐसे समय में विश्वविद्यालयों में भी नियमों को दरकिनार कर मनमानी नियुक्तियां करना बेहद चिंताजनक है। शिक्षा संस्थानों में योग्यता और पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, न कि रिश्तेदारी और प्रभाव।
राव नरेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री से मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराई जाए, दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए तथा सभी विश्वविद्यालयों और सरकारी संस्थानों में भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और नियमसम्मत बनाया जाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को जनता के बीच भी उठाएगी और शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता एवं पारदर्शिता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होने देगी।