रोहतक देश में मनाए जा रहे आजादी के अमृत महोत्सव के बीच प्रथम व द्वितीय विश्व युद्ध के शहीदों और स्वतंत्रता संग्राम के गुमनाम सेनानियों के इतिहास को सहेजने के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील पहल सामने आई है।
स्वतंत्रता सेनानी स्व. रामसिंह के पुत्र श्री भगवान फौगाट का कहना है कि अगर गांवों में स्थापित स्मारकों और गौरव पट्टों पर अंकित शहीदों व सेनानियों के नामों का वास्तविक रिकॉर्ड यदि सार्वजनिक किया जाए, तो देश-विदेश के स्मारकों पर दर्ज हजारों गुमनाम वीरों की सही जानकारी उनके परिवारों और देश के सामने आ सकती है।
इस दिशा में सरकार, आजाद हिंद फौज के अभिलेखागार और आम जनता के साझा प्रयासों से एक बड़ा इतिहास उजागर करने की तैयारी की जा रही है। सरकार की एक छोटी सी मदद से खुलेगा इतिहास का पन्नाः रिसर्च और इतिहास संकलन से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में लगे गौरव पट्टों और स्मारकों का विवरण उपलब्ध करा दे, तो आजाद हिंद फौज और राष्ट्रीय अभिलेखागार के पुराने रिकॉर्ड्स से मिलान कर हजारों गुमनाम शहीदों का पूरा ब्योरा निकालना बेहद आसान हो जाएगा।
आम जनता और मीडिया से सहयोग की अपील
उन्होंने कहा कि इस राष्ट्रीय अभियान में आम जनता और मीडिया की भूमिका भी बेहद अहम मानी जा रही है। स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर इस मुहिम को गति देने के लिए आम जनता से अपील की गई है कि वे अपने-अपने गांवों में स्थित स्मारकों और गौरव पट्टों पर लिखे नामों की फोटो खींचकर मोबाइल नंबर 94168 82290 पर भेजें। शहीद परिवारों और स्वतंत्रता सेनानियों से जुड़ी जानकारी साझा कर इस सत्यापन (Verification) प्रक्रिया में मदद करें।
यदि इस पहल को प्रशासनिक और सार्वजनिक सहयोग मिलता है, तो स्वतंत्रता दिवस तक कई ऐसे अमर शहीदों और सेनानियों की कहानियां सामने आ सकती हैं, जो अब तक इतिहास के पन्नों में कहीं खो गई थीं। यह प्रयास न केवल इतिहास को सही स्वरूप देगा, बल्कि शहीद परिवारों को भी उनका वास्तविक सम्मान और गौरव लौटाएगा।