भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने सोमवार को नई दिल्ली में सेशेल्स गणराज्य के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी से मुलाकात की। यह भेंट भारत और सेशेल्स के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर हुई, जिसे दोनों देशों के रिश्तों में एक अहम पड़ाव माना जा रहा है।
राजनयिक संबंधों के 50 साल पर खास बातचीत
भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन और सेशेल्स गणराज्य के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी की यह मुलाकात विशेष महत्व रखती है। उपराष्ट्रपति के आधिकारिक एक्स हैंडल पर इस भेंट की जानकारी साझा की गई। पोस्ट में कहा गया कि दोनों नेताओं ने भारत-सेशेल्स द्विपक्षीय संबंधों के अहम पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की और 50 वर्षों की साझेदारी को और आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।
समुद्री सुरक्षा से डिजिटल सहयोग तक चर्चा
पोस्ट के अनुसार, दोनों नेताओं ने समुद्री सुरक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा, चिकित्सा क्षेत्र, उच्च शिक्षा, हॉस्पिटैलिटी और डिजिटलीकरण जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया। इन क्षेत्रों को दोनों देशों के भविष्य के सहयोग के प्रमुख स्तंभ के रूप में देखा जा रहा है।
पिछली सेशेल्स यात्रा को किया याद
एक अन्य पोस्ट में उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने पिछले वर्ष अक्टूबर में सेशेल्स की अपनी यात्रा को याद किया। उस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लिया था। दोनों नेताओं ने हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए अपने साझा विजन की भी पुष्टि की।
पहली राजकीय भारत यात्रा पर राष्ट्रपति हर्मिनी
यह मुलाकात सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी की भारत की पहली राजकीय यात्रा के दौरान हुई, जो 5 से 10 फरवरी 2026 तक चल रही है। इससे पहले अक्टूबर 2025 में उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने सेशेल्स जाकर राष्ट्रपति हर्मिनी के शपथ ग्रहण समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। उस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामना संदेश दिया था और भारत आने का औपचारिक निमंत्रण भी सौंपा था।
हिंद महासागर क्षेत्र में मजबूत साझेदारी
भारत और सेशेल्स के बीच संबंध विशेष रूप से हिंद महासागर क्षेत्र में मजबूत रहे हैं। भारत सेशेल्स को समुद्री सुरक्षा, बुनियादी ढांचा विकास और क्षमता निर्माण में निरंतर सहयोग प्रदान करता रहा है। मौजूदा चर्चा में नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में नए समझौतों की संभावनाओं पर भी जोर दिया गया।