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व्यापार

भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की वापसी, घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी से बाजार को मिला सहारा

Updated on Tuesday, February 10, 2026 14:43 PM IST

मुंबई, भारतीय शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) एक बार फिर से खरीदारी करते नजर आ रहे हैं। पिछले नौ कारोबारी सत्रों में एफआईआई ने 2 अरब डॉलर से ज्यादा के शेयर खरीदे हैं, जिससे बाजार में तेजी देखने को मिली है।

एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, 9 फरवरी को ही विदेशी निवेशकों ने करीब 2,223 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे।

हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि यह निवेश लंबे समय तक बना रहेगा या नहीं। उनका मानना है कि अगर वैश्विक व्यापार में स्थिरता बनी रहती है, कंपनियों के मुनाफे में सुधार होता है और डॉलर कमजोर रहता है, तो विदेशी निवेश आगे भी जारी रह सकता है।

इस दौरान घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने भी बाजार में जोरदार खरीदारी की। पिछले नौ दिनों में डीआईआई ने करीब 8,973 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे। विशेषज्ञों के अनुसार, यह दिखाता है कि अब भारतीय शेयर बाजार में घरेलू निवेशकों की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो गई है।

निफ्टी50 में घरेलू निवेशकों की हिस्सेदारी अब विदेशी निवेशकों से ज्यादा हो चुकी है। इसका कारण म्यूचुअल फंड की एसआईपी में लगातार आ रही रकम, छोटे निवेशकों की बढ़ती भागीदारी और बीमा व पेंशन फंडों का नियमित निवेश है। वहीं, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, विदेशी ब्याज दरों में वृद्धि और डॉलर के मजबूत होने के कारण विदेशी निवेशक थोड़ा सतर्क हो गए हैं।

मार्निंगस्टार इनवेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रिंसिपल और मैनेजर रिसर्च हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि घरेलू निवेश से बाजार को लंबे समय तक स्थिर सहारा मिलता है, जिससे विदेशी निवेश पर निर्भरता कम होती है और वैश्विक संकट के समय बाजार को झटका कम लगता है। इससे भारतीय शेयर बाजार ज्यादा मजबूत और स्थिर बनता है।

विश्लेषकों का कहना है कि हाल में आई गिरावट के बाद भारतीय शेयरों के दाम अब दूसरे एशियाई बाजारों की तुलना में बेहतर स्तर पर आ गए हैं, जिससे विदेशी निवेशकों की रुचि फिर बढ़ी है। इसके अलावा, भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बनी स्पष्टता से भी निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है।

इस तेजी के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी में 3 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई। वहीं, बीएसई मिडकैप 150 में करीब 5.66 प्रतिशत और बीएसई स्मॉलकैप 250 में लगभग 6.3 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली।

बाजार के जानकारों के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक का नरम रुख, जीडीपी में सुधार, कंपनियों की अच्छी कमाई की उम्मीद और घरेलू निवेश की स्थिरता ऐसे कारण हैं, जो विदेशी निवेश को भारत की ओर आकर्षित कर सकते हैं।

मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2025 तिमाही तक निफ्टी50 में घरेलू संस्थानों की हिस्सेदारी करीब 24.8 प्रतिशत हो गई, जो विदेशी निवेशकों के लगभग 24.3 प्रतिशत हिस्से से मामूली रूप से अधिक है।

विश्लेषकों का कहना है कि विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी आठ तिमाहियों के सबसे निचले स्तर पर है और घरेलू पूंजी का आधार लगातार मजबूत हो रहा है। यह बदलाव अस्थायी नहीं बल्कि लंबे समय तक रहने वाला माना जा रहा है।

 

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