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राष्ट्रीय

मणिपुर में नई सरकार बनते ही फिर भड़की जातीय हिंसा: नगा-कुकी टकराव में जले 20 से ज्यादा घर, इंटरनेट बंद

Updated on Tuesday, February 10, 2026 18:39 PM IST

मणिपुर में राष्ट्रपति शासन हटने और नई सरकार के गठन के कुछ ही समय बाद एक बार फिर जातीय तनाव ने हिंसक रूप ले लिया है। उखरुल जिले में तंगखुल नागा समुदाय के एक व्यक्ति पर कथित हमले के बाद हालात तेजी से बिगड़ गए। मंगलवार को हिंसा और उग्र हो गई, जब अज्ञात हमलावरों ने 20 से अधिक घरों को आग के हवाले कर दिया और कई इलाकों में हवाई फायरिंग की घटनाएं सामने आईं। इस बार संघर्ष नगा और कुकी समुदायों के बीच देखा जा रहा है, जो राज्य में पहले से ही संवेदनशील जातीय समीकरणों को और जटिल बना रहा है।

खाली मकानों को बनाया निशाना, पहाड़ियों से उठता दिखा धुआं
पुलिस और प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, उखरुल जिले के लिटान सारेइखोंग क्षेत्र में हमलावरों ने खाली पड़े घरों को निशाना बनाया। आगजनी के साथ-साथ हथियारबंद लोगों द्वारा हवा में गोलियां चलाई गईं, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी फैल गई। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में पहाड़ी इलाकों से उठते धुएं के गुबार साफ दिखाई दे रहे हैं। हालांकि प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें।

इंटरनेट बंद, कर्फ्यू जैसे हालात
बढ़ते तनाव को देखते हुए मणिपुर सरकार ने उखरुल जिले में ब्रॉडबैंड, वीपीएन और वी-सैट समेत सभी इंटरनेट सेवाओं को पांच दिनों के लिए निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही कई इलाकों में पिछले दो दिनों से कर्फ्यू जैसे प्रतिबंध लागू हैं। प्रशासन का मानना है कि इंटरनेट बंद करने से भड़काऊ संदेशों और अफवाहों पर रोक लगेगी और हालात को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

गांवों से पलायन, महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित
हिंसा के चलते सैकड़ों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। कुकी और तंगखुल नागा समुदाय से जुड़े कई परिवार लिटान सारेइखोंग और आसपास के गांवों से निकलकर सुरक्षित इलाकों की ओर पलायन कर रहे हैं। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। कई परिवारों ने कांगपोकपी जिले के मोटबंग और साइकुल क्षेत्रों में अस्थायी शरण ली है। राज्य के मंत्री गोविंदास कोंथौजम ने बताया कि अब तक कम से कम 21 घरों को नुकसान पहुंचने की पुष्टि हुई है और हालात पर काबू पाने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।

शनिवार रात से शुरू हुआ विवाद
अधिकारियों के अनुसार, हिंसा की शुरुआत शनिवार रात हुई, जब लिटान गांव में तंगखुल नागा समुदाय के एक व्यक्ति पर 7–8 लोगों ने कथित हमला किया। शुरुआती स्तर पर पीड़ित पक्ष और लिटान सारेइखोंग गांव के प्रमुख के बीच समझौता हो गया था और पारंपरिक तरीके से मामला सुलझाने पर सहमति बनी थी।

रविवार को प्रस्तावित बैठक नहीं हो सकी। इसके बाद पास के सिकिबुंग गांव के कुछ लोगों ने कथित तौर पर लिटान सारेइखोंग के प्रमुख के घर पर हमला कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस दौरान लिटान पुलिस स्टेशन के पास से गुजरते हुए गोलियां भी चलाई गईं।

तनाव बरकरार, सुरक्षा बल हाई अलर्ट पर
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने महादेव, लंबुई, शांगकाई और लिटान को जोड़ने वाले मार्गों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए हैं। नुकसान का आकलन अभी जारी है और इलाका फिलहाल बेहद संवेदनशील बना हुआ है।

इस बीच, दो तंगखुल नागा संगठनों—कथो लोंग और कथो कटमनाओ लोंग—ने उखरुल और कामजोंग जिलों में कुकी समुदाय के लोगों की आवाजाही पर रोक लगाने का ऐलान किया है, जिससे हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं।

यह ताजा घटना मणिपुर में वर्षों से चले आ रहे जातीय संघर्षों की याद दिलाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि समुदायों के बीच अविश्वास और संवाद की कमी बार-बार हिंसा को जन्म दे रही है। राज्य और केंद्र सरकार दोनों की नजर हालात पर बनी हुई है, ताकि स्थिति और न बिगड़े।

 

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