जालंधर : कपूरथला से कांग्रेस विधायक राणा गुरजीत सिंह ने आज कहा कि सत्ता संभाले चार वर्ष बीत जाने के बावजूद पंजाब सरकार नशे की गंभीर समस्या से निपटने में बुरी तरह विफल रही है, जो लगातार अपराध को बढ़ावा दे रही है और पंजाब के युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है।
मीडिया से बातचीत करते हुए राणा गुरजीत सिंह ने कहा कि पंजाब की पाकिस्तान के साथ लगभग 550 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा लगती है, जो एक दुश्मन देश है। उन्होंने बताया कि बढ़ती घुसपैठ को देखते हुए वर्ष 2021 में पंजाब के भीतर केंद्रीय सुरक्षा बलों का कार्यक्षेत्र 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 50 किलोमीटर कर दिया गया था। उन्होंने कहा, “इससे स्पष्ट होता है कि खतरे के बारे में सभी को जानकारी है।”
उन्होंने खुलासा किया कि बीएसएफ द्वारा अब तक 367 क्विंटल हेरोइन बरामद की गई है और 272 ड्रोन पकड़े गए हैं। “यह मात्रा उस वास्तविक नशे का केवल एक छोटा सा हिस्सा—लगभग 2 से 10 प्रतिशत—ही हो सकती है, जो पंजाब में दाख़िल हो रहा है। पंजाब पुलिस स्वयं लगभग दो टन हेरोइन की बरामदगी का दावा करती है। सवाल यह है कि शेष बिना पकड़ी गई खेप कहाँ गई?” उन्होंने सवाल उठाया।
राणा गुरजीत सिंह ने एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स द्वारा 620 हथियारों की बरामदगी का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा, “यदि इतनी बड़ी संख्या में हथियार पकड़े गए हैं, तो और कितने हथियार अवैध रूप से घूम रहे होंगे?”
पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “आज फिरोज़पुर में की जा रही पदयात्रा का हम स्वागत करते हैं, लेकिन आज पंजाब की सबसे बड़ी आवश्यकता रोज़गार है। मैं राज्यपाल साहिब से अपील करता हूँ कि वे पंजाब और केंद्र सरकार के बीच सेतु बनते हुए पंजाब के लिए विशेष आर्थिक एवं औद्योगिक पैकेज दिलाने में मदद करें।”
राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चिंताएँ उठाते हुए उन्होंने पूछा, “नशे और हथियार पंजाब के रास्ते ही क्यों आ रहे हैं? ये राजस्थान या गुजरात के रास्ते क्यों नहीं आते? यदि पाकिस्तान हथियार भेजना ही चाहता है, तो समुद्री मार्गों या शिपिंग चैनलों के माध्यम से क्यों नहीं भेजता? यह चयनात्मक निशानेबंदी गंभीर सवाल खड़े करती है और जवाबदेही तय होनी चाहिए,” उन्होंने कहा।
दोनों सरकारों को जिम्मेदार ठहराते हुए राणा गुरजीत सिंह ने कहा कि पंजाब सरकार अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती, लेकिन केंद्र सरकार को भी इस मामले से बरी नहीं किया जा सकता। “आज केवल राज्यपाल की पदयात्रा समाधान नहीं है। ऐसे प्रयास शायद 15 वर्ष पहले प्रभावी होते। आज पंजाब को प्रतीकात्मक कदमों की नहीं, बल्कि ठोस नीतिगत फैसलों की आवश्यकता है,” उन्होंने जोर दिया।