भारतीय जनता पार्टी, हरियाणा।
भारत की राजनीति में पंडित दीनदयाल उपाध्याय का नाम विचार, शुचिता और राष्ट्रसमर्पण का प्रतीक है। वे केवल एक नेता नहीं थे, बल्कि भारत की आत्मा को समझने वाले चिंतक थे। उनकी पुण्यतिथि हमें यह याद दिलाती है कि राजनीति का लक्ष्य सत्ता नहीं, बल्कि समाज का उत्थान होना चाहिए।
स्वतंत्रता के बाद जब देश विकास के मॉडल को लेकर उलझन में था, तब दीनदयाल जी ने स्पष्ट कहा कि भारत का मार्ग भारतीय होना चाहिए। न अंधा पूंजीवाद, न आयातित समाजवाद—बल्कि अपनी संस्कृति, अपनी परिस्थितियों और अपने समाज के अनुरूप विकास का मॉडल। इसी से जन्म हुआ एकात्म मानववाद का, जो मनुष्य को केवल आर्थिक इकाई नहीं, बल्कि शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा के समन्वित रूप में देखता है।
उनकी विचारधारा का सबसे संवेदनशील पक्ष था—अंत्योदय, यानी अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति का उत्थान। आज केंद्र की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने जिस प्रकार गरीब कल्याण को प्राथमिकता दी है, वह उसी सोच का विस्तार है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत करोड़ों लोगों को मुफ्त राशन, उज्ज्वला योजना से माताओं को धुएं से मुक्ति, आयुष्मान भारत से गरीब परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा और प्रधानमंत्री आवास योजना से पक्के घर—ये सब अंत्योदय की सशक्त मिसाल हैं।
हरियाणा भी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल और वर्तमान के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने सुशासन और पारदर्शिता को प्राथमिकता दी है। परिवार पहचान पत्र (PPP) व्यवस्था के माध्यम से योजनाओं का लाभ सीधे पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रयास हुआ है। “मेरी फसल-मेरा ब्यौरा” से किसानों को पारदर्शी भुगतान, फसल खरीद में रिकॉर्ड उपलब्धि और समय पर भुगतान—यह किसान सम्मान की दिशा में बड़ा कदम है।
हरियाणा में गरीब और वंचित वर्गों के लिए चलाई जा रही योजनाएं अंत्योदय की भावना को मजबूत करती हैं। वृद्धावस्था पेंशन, दिव्यांग पेंशन और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का विस्तार किया गया है। आयुष्मान और चिरायु योजनाओं के माध्यम से गरीब परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
केंद्र सरकार की “जल जीवन मिशन” योजना से हरियाणा के ग्रामीण घरों में नल से जल पहुंचा है। गांवों में सड़क, बिजली और डिजिटल कनेक्टिविटी का विस्तार हुआ है। गुरुग्राम से लेकर सोनीपत,जींद, हिसार और रोहतक तक विकास की नई परियोजनाएं आकार ले रही हैं। एक्सप्रेस-वे, रेलवे विस्तार और औद्योगिक कॉरिडोर राज्य को नई पहचान दे रहे हैं।
दीनदयाल जी का राष्ट्रवाद सांस्कृतिक चेतना से जुड़ा था। हरियाणा, जो वीरों और किसानों की धरती है, अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक गौरव के लिए जाना जाता है। सरकार द्वारा खेल और युवाओं को प्रोत्साहन, खिलाड़ियों को सम्मान और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया—ये सब युवाओं में विश्वास बढ़ाने वाले कदम हैं। हरियाणा आज खेलों में देश का अग्रणी राज्य बन चुका है, जो आत्मविश्वास और अवसरों का प्रतीक है।
“आत्मनिर्भर भारत” का संकल्प हरियाणा में भी दिखाई देता है। MSME क्षेत्र को बढ़ावा, स्टार्टअप नीति, महिला स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाना और किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना—ये सब आर्थिक स्वावलंबन की दिशा में कदम हैं।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजनीति में शुचिता के पक्षधर थे। हरियाणा में ई-टेंडरिंग, ऑनलाइन ट्रांसफर नीति और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया जैसे कदम प्रशासनिक सुधार के उदाहरण हैं। इससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा है और आम नागरिक का विश्वास बढ़ा है।
आज जब भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का संकल्प ले चुका है, तब दीनदयाल जी का दर्शन मार्गदर्शक बनता है। विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब हरियाणा जैसे राज्य सामाजिक समरसता, आर्थिक प्रगति और सांस्कृतिक गौरव के साथ आगे बढ़ें।
उनकी पुण्यतिथि पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि राजनीति को सेवा का माध्यम बनाएंगे, गरीब के उत्थान को प्राथमिकता देंगे और विकास को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाएंगे। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जीवन और विचार हमें सिखाते हैं कि राष्ट्रनिर्माण केवल नीतियों से नहीं, बल्कि नीयत से होता है। जब नीयत साफ हो और लक्ष्य स्पष्ट हो, तो अंत्योदय से राष्ट्रोदय का मार्ग स्वयं बनता है।
आज केंद्र की मोदी सरकार और हरियाणा की नायब सिंह सैनी सरकार जिस दिशा में कार्य कर रही हैं, वह उसी विचारधारा की निरंतरता है—जहां विकास का केंद्र अंतिम व्यक्ति है और उद्देश्य समृद्ध, आत्मनिर्भर और सशक्त भारत का निर्माण।
पुण्यतिथि विशेष
- “अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचे, यही सच्चा राष्ट्रधर्म है।”
- “भारत की आत्मा उसकी संस्कृति और समाज में बसती है।”
- “व्यक्ति नहीं, विचार बड़ा होता है।”
- “अंत्योदय ही राष्ट्रोदय का आधार है।”