Saturday, 17 October 2026
BREAKING
• जवाहर नवोदय विद्यालय में कक्षा 9वीं व 11वीं में प्रवेश के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 22 अक्टूबर तक बढ़ी • बांग्लादेश मॉडल का महिमामंडन करने वालों पर राहुल गांधी चुप क्यों, कांग्रेस देश को दे जवाब : डॉ. सीमा ठाकुर • सारी योजनाएं बंद करके, गारंटियां भूल नए जिले बनाने का शिगूफा छोड़ रहे हैं मुख्यमंत्री : जयराम ठाकुर • जागरूकता कार्यक्रम में एमएसएमई की उत्पादकता बढ़ाने को सरकारी योजनाओं की दी जानकारी • पलमपुर में अखिल भारतीय वरिष्ठ नागरिक महासंघ प्रतिनिधिमंडल ने शांता कुमार जी से की मुलाकात • कांग्रेस चाहती है कि देश में अराजकता फैल जाए, देश की तरक्की रूक जाए : अनिल विज • पलवल में 3 हजार रुपये रिश्वत लेते पटवारी का निजी सहायक गिरफ्तार, हल्का पटवारी फरार • हरियाणा ने स्वीडिश कंपनियों के साथ 4,000 करोड़ रुपए के आशय पत्रों पर हस्ताक्षर किए • पंजाब: अवैध माइनिंग पर सियासत तेज, पूर्व सीएम चन्नी ने मान सरकार को बताया माइनिंग माफिया • सीएम भगवंत मान के फ्रांस दौरे को हाई कोर्ट की अनुमति, केंद्र की राजनीतिक मंजूरी न मिलने पर मिली राहत

धर्म कर्म

महाशिवरात्रि: त्रिशूल, चंद्र और सूर्य के दिव्य शृंगार में सजे बाबा महाकाल, उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

Updated on Sunday, February 15, 2026 14:37 PM IST

महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर बाबा महाकालेश्वर मंदिर शिवभक्ति के रंग में पूरी तरह सराबोर दिखाई दिया। ‘हर-हर महादेव’ के गगनभेदी जयघोष के बीच श्रद्धालुओं का सैलाब रात से ही दर्शन के लिए उमड़ पड़ा। मंदिर के बाहर लंबी कतारें लग गईं, वहीं मंदिर प्रशासन ने सुव्यवस्थित एवं सुलभ दर्शन सुनिश्चित करने के लिए विशेष व्यवस्थाएं कीं। प्रशासन के अनुमान के अनुसार, महाशिवरात्रि के इस महापर्व पर दस लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंच सकते हैं। श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह देखते ही बन रहा है।

इस अवसर पर बाबा महाकाल को दूल्हे के रूप में अलौकिक और दुर्लभ शृंगार में सजाया गया। माथे पर त्रिशूल और चंद्रमा को अर्पित करते हुए किया गया यह विशेष शृंगार वर्ष में केवल एक बार ही संपन्न होता है। मंदिर के पुजारी के अनुसार, यह शृंगार शिव-पार्वती के दिव्य विवाह और शिवत्व के सौम्य-उग्र संतुलन का प्रतीक माना जाता है। महाशिवरात्रि की इस आध्यात्मिक रात्रि में उज्जैन नगरी श्रद्धा, साधना और शिवमय चेतना का जीवंत प्रतीक बन गई है।

महाशिवरात्रि के अवसर पर एक पुजारी ने बताया कि “बाबा महाकाल के प्रांगण में शिव नवरात्रि और महाशिवरात्रि का उत्सव अत्यंत श्रद्धापूर्वक मनाया जा रहा है। लगातार 44 घंटे तक बाबा का दरबार भक्तों के लिए खुला रहेगा और भव्य तरीके से बाबा की भस्म आरती की गई है। भक्त आज बाबा पर दूध, दही और जल अर्पित कर सकते हैं और पूरे दिन बाबा का कपाट बंद नहीं होंगे और विशेष अनुष्ठान किए जाएंगे।”

उन्होंने आगे बताया, महाशिवरात्रि पर बाबा के दर्शन करने के लिए दूर-दूर से भक्त आए हैं और पूरी सुरक्षा के साथ भक्तों को कतार के साथ बारी-बारी से दर्शन कराए जा रहे हैं। मंदिर में भीड़ सामान्य दिनों की तुलना में बहुत ज्यादा है। भक्त रात से ही लाइनों में लगे हैं और अपनी बारी आने का इंतजार कर रहे हैं।

आज के बाबा के विशेष अनुष्ठान को लेकर पुजारी ने कहा, “दूध, दही, और गंगाजल से बाबा का विशेष पंचामृत अभिषेक किया गया है और फलों के रस से भी स्नान कराया गया है। भांग से बाबा का विशेष शृंगार हुआ है और उनके माथे पर सेहरानुमा मुकुट और माथे पर त्रिशूल, चांद, और सूरज को अर्पित किया गया है। ये प्रतीक है कि दिन और रात सब कुछ उन्हीं का है, जिसके बाद बाबा का होल्कर का अभिषेक होगा। शाम के समय बाबा की विशेष पूजा होगी जो अगले दिन प्रात: काल तक चलेगी और बाबा को प्रकृति सेहरा अर्पित किया जाएगा। इसके साथ ही 16 फरवरी को भस्म आरती 12 बजे की जाएगी और ऐसा साल में एक बार ही किया जाता है।”

मंदिर प्रशासन की माने तो 15 फरवरी और 16 फरवरी को मंदिर में 10 लाख से ज्यादा भक्त दर्शन के लिए आ सकते हैं। सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करते हुए श्रद्धालुओं के लिए मेडिकल से लेकर सुलभ दर्शन की तैयारी हो चुकी है। ट्रैफिक भी डायवर्ट किया गया है और परिसर के अंदर से लेकर बाहर तक पुलिस बल की तैनाती भी बढ़ा दी है।

 
Have something to say? Post your comment
मां ब्रह्मचारिणी : तप, त्याग और अटूट संकल्प की दिव्य प्रतिमूर्ति

: मां ब्रह्मचारिणी : तप, त्याग और अटूट संकल्प की दिव्य प्रतिमूर्ति

पितृ पक्ष में कुरुक्षेत्र के इन तीर्थों पर करें पितरों का तर्पण, जानें पेहोवा और सन्निहित सरोवर का महत्व

: पितृ पक्ष में कुरुक्षेत्र के इन तीर्थों पर करें पितरों का तर्पण, जानें पेहोवा और सन्निहित सरोवर का महत्व

विश्वकर्मा पूजा : सृजन, श्रम और कौशल के सम्मान से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता भारत

: विश्वकर्मा पूजा : सृजन, श्रम और कौशल के सम्मान से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता भारत

मिथिला के चौरचन से गणेशोत्सव तक, भाद्रपद में दिखेगा भारतीय परंपराओं का विविध रंग

: मिथिला के चौरचन से गणेशोत्सव तक, भाद्रपद में दिखेगा भारतीय परंपराओं का विविध रंग

जैसलमेर के रामदेवरा में बाबा रामदेवजी के 642वें मेले का शुभारंभ, देशभर से उमड़े श्रद्धालु

: जैसलमेर के रामदेवरा में बाबा रामदेवजी के 642वें मेले का शुभारंभ, देशभर से उमड़े श्रद्धालु

सावन पूर्णिमा पर अयोध्या में उमड़ा आस्था का सैलाब, सरयू में श्रद्धालुओं ने लगाई पवित्र डुबकी

: सावन पूर्णिमा पर अयोध्या में उमड़ा आस्था का सैलाब, सरयू में श्रद्धालुओं ने लगाई पवित्र डुबकी

नाग पंचमी पर खुले भगवान नागचंद्रेश्वर के पट; भोर में 2:30 बजे खुले बाबा महाकाल के कपाट, बड़ी संख्या में उमड़े श्रद्धालु

: नाग पंचमी पर खुले भगवान नागचंद्रेश्वर के पट; भोर में 2:30 बजे खुले बाबा महाकाल के कपाट, बड़ी संख्या में उमड़े श्रद्धालु

सावन का तीसरा सोमवार : वाराणसी में भक्तों और कांवड़ियों की उमड़ी भारी भीड़, प्रशासन ने किए खास इंतजाम

: सावन का तीसरा सोमवार : वाराणसी में भक्तों और कांवड़ियों की उमड़ी भारी भीड़, प्रशासन ने किए खास इंतजाम

बाबा बैद्यनाथ के दर्शन को उमड़ा जनसैलाब, तीसरी सोमवारी पर 12 किमी तक लगी कतार

: बाबा बैद्यनाथ के दर्शन को उमड़ा जनसैलाब, तीसरी सोमवारी पर 12 किमी तक लगी कतार

​​करुणा के साथ सावधानी: ​जगतार सिंह ​हवारा की पैरोल याचिका पर संतुलित नजरिया

: ​​करुणा के साथ सावधानी: ​जगतार सिंह ​हवारा की पैरोल याचिका पर संतुलित नजरिया

X