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राष्ट्रीय

दिल्ली में जमीन का भी बनेगा 'आधार कार्ड', 14 अंकों का होगा यूनिक नंबर, जानें क्यों पड़ी जरूरत

Updated on Thursday, February 19, 2026 11:58 AM IST

राजधानी दिल्ली में जमीन से जुड़े विवादों और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए सरकार ने बड़ा डिजिटल कदम उठाया है। अब शहर की हर जमीन को 14 अंकों का एक खास पहचान नंबर दिया जाएगा। इस नई व्यवस्था को ‘भू-आधार’ नाम दिया गया है। इसका आधिकारिक नाम यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर (ULPIN) है।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसे पारदर्शिता और बेहतर शासन की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया है। उनके अनुसार, यह सिर्फ एक नंबर नहीं बल्कि जमीन के रिकॉर्ड को पूरी तरह आधुनिक और सुरक्षित बनाने की शुरुआत है।

क्या है भू-आधार (ULPIN)?
भू-आधार के तहत दिल्ली की हर जमीन या प्लॉट को एक अलग 14 अंकों का यूनिक नंबर दिया जाएगा।

इस नंबर के जरिए जमीन के मालिक की जानकारी, जमीन की सही लोकेशन, सीमांकन (बाउंड्री) और उससे जुड़े रिकॉर्ड ऑनलाइन देखे और सत्यापित किए जा सकेंगे। यानी जैसे हर नागरिक के पास आधार नंबर होता है, वैसे ही अब हर जमीन की अपनी डिजिटल पहचान होगी।

क्या बदलेगा इस नई व्यवस्था से?
सरकार का मानना है कि इस सिस्टम के लागू होने से जमीन खरीदने-बेचने की प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी और सुरक्षित होगी।

फायदे इस प्रकार होंगे:

फर्जी रजिस्ट्रेशन पर रोक
एक ही जमीन की दो बार बिक्री जैसी धोखाधड़ी खत्म
जमीन के रिकॉर्ड की ऑनलाइन जांच आसान
कोर्ट में चल रहे विवादों में कमी
अब प्रॉपर्टी खरीदने वाले लोगों को साफ और प्रमाणित रिकॉर्ड मिलेगा, जिससे धोखाधड़ी की संभावना कम होगी।

डिजिटल इंडिया मिशन से जुड़ी योजना
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री Narendra Modi के ‘डिजिटल इंडिया’ विजन को मजबूत करेगी। यह योजना केंद्र सरकार के Digital India Land Records Modernization Programme (DILRMP) का हिस्सा है, जिसकी शुरुआत 2016 में की गई थी। हालांकि दिल्ली में यह योजना अब तक पूरी तरह लागू नहीं हो सकी थी। अब सरकार ने इसे मिशन मोड में लागू करने का फैसला किया है।

कौन करेगा यह काम?
इस परियोजना की जिम्मेदारी दिल्ली के राजस्व विभाग की आईटी शाखा को सौंपी गई है। तकनीकी सहयोग के लिए Survey of India की मदद ली जाएगी। सरकार ने कहा है कि पूरी प्रक्रिया तय मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) और चरणबद्ध समयसीमा के अनुसार पूरी की जाएगी।

कैसे होगा लागू?
भू-आधार योजना को चरणों में लागू किया जाएगा:

1.पहले चरण में जमीन का डिजिटल सर्वे किया जाएगा।
2. इसके बाद पुराने रिकॉर्ड का सत्यापन होगा।
3.फिर हर जमीन को 14 अंकों का यूनिक नंबर जारी किया जाएगा।

इसका उद्देश्य रिकॉर्ड की सटीकता बढ़ाना और भविष्य में कानूनी विवादों को कम करना है।

क्यों जरूरी था यह कदम?
दिल्ली में जमीन से जुड़े सीमा विवाद और फर्जी लेनदेन लंबे समय से बड़ी समस्या रहे हैं। कई बार एक ही जमीन का अलग-अलग लोगों के नाम रजिस्ट्रेशन हो जाता है, जिससे लोग सालों तक अदालतों के चक्कर लगाते रहते हैं। भू-आधार प्रणाली से जमीन की पहचान साफ और डिजिटल रूप से सुरक्षित होगी। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी और जमीन से जुड़े विवाद कम होंगे। सरकार को उम्मीद है कि यह कदम राजधानी में भूमि प्रबंधन को ज्यादा व्यवस्थित, भरोसेमंद और आधुनिक बनाएगा।

 

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