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देश में न सिर्फ हथियार और सैन्य उपकरण बनें, बल्कि निर्यात भी किए जाएं: राजनाथ सिंह

Updated on Wednesday, February 25, 2026 19:36 PM IST

नई दिल्ली : केंद्र सरकार का स्पष्ट मानना है कि भारत का अपना रक्षा उद्योग और मजबूत होना चाहिए। जरूरत से ज्यादा हथियार और सैन्य उपकरण देश में ही बनें। यही नहीं, सैन्य उपकरण व हथियार दूसरे देशों को निर्यात भी किए जाएं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) के नए अधिकारियों से मुलाकात में कहा कि यह सब ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत किया जा रहा है। रक्षा मंत्री बुधवार को साउथ ब्लॉक स्थित रक्षा मंत्रालय में आईएफएस-2025 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों से मुलाकात कर रहे थे, जहां उन्होंने उनसे खुलकर बातचीत की। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि भारत का स्वदेशी रक्षा उद्योग इतना मजबूत बने कि देश की जरूरतें भी यहीं पूरी हों और दुनिया के दूसरे देशों को भी भारतीय रक्षा उपकरण निर्यात किए जाएं।

रक्षा मंत्री ने कहा कि एक समय था जब भारत दुनिया के बड़े रक्षा आयातकों में गिना जाता था। लेकिन अब स्थिति बदल रही है। सरकार ने नई तकनीकों को अपनाने, निजी और सार्वजनिक क्षेत्र को साथ लेकर चलने और स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। आज भारत जमीन, समुद्र, आकाश और अंतरिक्ष जैसे सभी क्षेत्रों में अपने प्लेटफॉर्म तैयार कर रहा है। कई देशों को भारत से रक्षा उपकरण मिल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह बदलाव रातों-रात नहीं आया, बल्कि लगातार नीति सुधार और तकनीकी विकास का नतीजा है। राजनाथ सिंह ने प्रशिक्षु अधिकारियों को समझाया कि विदेशों में तैनात भारतीय राजनयिक सिर्फ राजनीतिक या आर्थिक संबंध नहीं संभालते, बल्कि रक्षा सहयोग और निर्यात के रास्ते भी खोलते हैं। जब भारत किसी देश के साथ रक्षा समझौता करता है या सैन्य उपकरण बेचता है, तो उसमें दूतावासों और राजनयिकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि राजनयिक भरोसा बनाते हैं, बातचीत को आगे बढ़ाते हैं और देश की छवि को मजबूत करते हैं। इसलिए आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को पूरा करने में आईएफएस अधिकारियों का योगदान बहुत अहम है।
उन्‍होंने अधिकारियों से कहा कि जब वे विदेश में काम करें तो हमेशा यह याद रखें कि वे 1.4 अरब भारतीयों की उम्मीदों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उनका आचरण, उनके फैसले और उनकी भाषा सब कुछ भारत की छवि गढ़ते हैं।
रक्षा मंत्री ने ईमानदारी, निष्ठा और पारदर्शिता को सबसे बड़ी ताकत बताया। साथ ही यह भी कहा कि अधिकारियों को नई सोच अपनानी चाहिए, अलग-अलग संस्कृतियों को समझना चाहिए और भारत की सभ्यता व मूल्यों को गर्व के साथ दुनिया के सामने रखना चाहिए।

इस मुलाकात से पूर्व इन प्रशिक्षु अधिकारियों को रक्षा मंत्रालय के अलग-अलग विभागों द्वारा रक्षा कूटनीति, रक्षा बजट, तीनों सेनाओं के एकीकरण और रक्षा खरीद प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इससे उन्हें समझ आया कि भारत किस तरह अपनी सैन्य क्षमता को आधुनिक और आत्मनिर्भर बना रहा है। इस बैच में कुल 55 प्रशिक्षु अधिकारी थे, जिनमें 53 भारत से और 2 भूटान से थे।

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