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लखनऊ का कसाई बेटा: पिता के 4 टुकड़े करने वाला अक्षत बोला- 'गलती हो गई', पर बॉडी लैंग्वेज खोल रही है क्रूरता का राज

Updated on Thursday, February 26, 2026 12:27 PM IST

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुए मानवेंद्र सिंह हत्याकांड की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। आरोपी बेटे अक्षत को कोर्ट में पेश किया गया, जहां उसने कैमरे के सामने महज 5 शब्दों में अपना पक्ष रखा, लेकिन उसके चेहरे पर ना तो कोई पछतावा दिखा और ना ही कोई डर।

क्या वाकई यह सिर्फ एक गलती थी?
जब पुलिस अक्षत को कोर्ट ले जा रही थी, तो मीडिया के सवालों पर उसने कहा कि गलती से हो गया था। लेकिन सवाल यह है कि क्या गुस्से में गोली मार देना गलती है? और अगर गोली मारना गलती थी, तो उसके बाद पिता के शरीर के चार टुकड़े करना, लाश को ठिकाने लगाने के लिए ऑनलाइन चाकू मंगवाना और आरी से हड्डियां काटना... क्या यह भी गलती थी? पुलिस के आला अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ के दौरान अक्षत बिल्कुल सामान्य था और उसे अपने किए पर कोई अफसोस नहीं था।

20 फरवरी की वह दास्तां
विवाद की वजह: मानवेंद्र सिंह चाहते थे कि उनका बेटा अक्षत NEET क्लियर कर MBBS (डॉक्टर) बने। वहीं अक्षत BBA कर बिजनेस करना चाहता था। इसी बात को लेकर 19 फरवरी की रात पिता-पुत्र में तीखी बहस हुई। रात करीब 2 बजे जब पिता सो गए, अक्षत दो घंटे तक जागता रहा। सुबह 4:30 बजे उसने पिता की ही लाइसेंसी राइफल से उन्हें गोली मार दी। हत्या के बाद पकड़े जाने के डर से अक्षत ने लाश को ठिकाने लगाने की योजना बनाई। उसने पहले ऑनलाइन चाकू मंगवाया, फिर बाजार से आरी खरीदकर लाया और पिता की लाश के चार टुकड़े कर दिए।

डर या मिलीभगत?
इस मामले में अक्षत की छोटी बहन कीर्ति की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। गोली की आवाज सुनकर वह जाग गई थी, लेकिन अगले चार दिनों तक उसने किसी को कुछ नहीं बताया। इस दौरान वह स्कूल गई, पड़ोसियों से मिली और ऊपरी मंजिल पर रहने वाले चाचा-चाची के पास भी गई। हालांकि, अक्षत ने पुलिस के सामने दावा किया है कि उसकी बहन बेकसूर है और उसने उसे डरा-धमकाकर चुप रखा था।

तफ्तीश में हुए बड़े खुलासे
पुलिस ने जांच के बाद कई भ्रामक खबरों पर विराम लगा दिया है। पुलिस ने साफ किया कि लाश पर तेजाब डालने या उसे जलाने के कोई सबूत नहीं मिले हैं। अक्षत ने पूछताछ में कबूल किया कि लाश के टुकड़े कैसे करने हैं और उन्हें कैसे ठिकाने लगाना है, यह उसने 'वध' (Vadh) जैसी क्राइम वेब सीरीज देखकर सीखा था। अक्षत ने पिता की उसी कार का इस्तेमाल लाश के टुकड़े फेंकने के लिए किया जिस पर 'पुलिस' लिखा था, ताकि चेकिंग के दौरान कोई उसे रोके नहीं।

अधूरा रह गया लाश ठिकाने लगाने का काम
अक्षत ने हाथ और पैर तो ठिकाने लगा दिए थे, लेकिन धड़ और सिर को उसने एक नीले रंग के ड्रम में ड्राइंग रूम में ही छिपा कर रखा था। वह बाकी हिस्सों को भी फेंकने वाला था, लेकिन तब तक रिश्तेदारों और पड़ोसियों को पिता की गुमशुदगी पर शक हो गया और लोगों का घर आना-जाना शुरू हो गया, जिससे वह पकड़ा गया।

 

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