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राष्ट्रीय

आत्मनिर्भर रक्षा प्रणाली ही वैश्विक चुनौतियों का जवाब: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

Updated on Friday, March 06, 2026 19:35 PM IST

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को कोलकाता में आयोजित ‘सागर संकल्प – भारत की समुद्री गौरव की पुनः प्राप्ति’ कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कहा कि आज की वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में प्रासंगिकता और तैयारी का एकमात्र रास्ता आत्मनिर्भरता है। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक हालात, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और समुद्री गतिविधियों में वृद्धि ने आत्मनिर्भर रक्षा प्रणाली की आवश्यकता को और अधिक स्पष्ट कर दिया है।

वैश्विक परिस्थितियों और ऊर्जा सुरक्षा पर चिंता

रक्षा मंत्री ने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और पुरानी वैश्विक व्यवस्थाएं तथा धारणाएं टूट रही हैं। मध्य-पूर्व की स्थिति इसका प्रमुख उदाहरण है, जहां अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और यहां होने वाली अशांति पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।

रक्षा क्षेत्र में तकनीक और आत्मनिर्भरता पर जोर

राजनाथ सिंह ने कहा कि तकनीकी विकास आज की दुनिया का महत्वपूर्ण तत्व है और रक्षा क्षेत्र में इसका प्रभाव सबसे अधिक दिखाई देता है। सरकार रक्षा प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए कई नीतिगत सुधार कर रही है, जिनमें अनुसंधान-विकास को बढ़ावा देना, पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन को मजबूत करना शामिल है।

जहाज निर्माण को प्रौद्योगिकी केंद्र बनाने की योजना

रक्षा मंत्री ने कहा कि जहाज निर्माण को केवल उत्पादन गतिविधि तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे प्रौद्योगिकी केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा। इंफ्रास्ट्रक्चर के आधुनिकीकरण, डिजिटल डिजाइन टूल, मॉड्यूलर निर्माण तकनीक और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला के माध्यम से भारतीय शिपयार्ड को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाया जा रहा है।

रक्षा उत्पादन और निर्यात में रिकॉर्ड वृद्धि

राजनाथ सिंह ने बताया कि सरकार के प्रयासों से रक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। वित्त वर्ष 2024-25 में घरेलू रक्षा उत्पादन 1.5 लाख करोड़ रुपए के रिकॉर्ड स्तर को पार कर गया, जबकि रक्षा निर्यात लगभग 24,000 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। उन्होंने उम्मीद जताई कि अप्रैल 2026 तक रक्षा निर्यात करीब 29,000 करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है और 2029-30 तक इसे 50,000 करोड़ रुपए तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।

निजी क्षेत्र और एमएसएमई की बढ़ती भागीदारी

रक्षा मंत्री ने कहा कि वर्तमान में निजी उद्योग देश के रक्षा उत्पादन में लगभग 25% योगदान दे रहा है और आने वाले समय में यह भागीदारी 50% तक पहुंचने की संभावना है। उन्होंने एमएसएमई, स्टार्टअप और स्वदेशी विक्रेताओं के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि युद्धपोत निर्माण सामूहिक प्रयासों का परिणाम है, जो नवाचार और दक्षता को बढ़ावा देता है।

2030 और 2047 के लिए समुद्री क्षेत्र का लक्ष्य

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की नौसेना की तत्परता और आत्मनिर्भरता की दिशा में उठाए गए कदम दर्शाते हैं कि देश का रक्षा क्षेत्र सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य 2030 तक भारत को दुनिया के शीर्ष 10 जहाज निर्माता देशों में शामिल करना और 2047 तक इसे शीर्ष पांच देशों में पहुंचाना है। 

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