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राष्ट्रीय

भारत को कनाडा से यूरेनियम की लंबी सप्लाई का समझौता, परमाणु ऊर्जा लक्ष्य को मिलेगी गति

Updated on Friday, March 06, 2026 19:36 PM IST

पीएम मोदी सरकार द्वारा कनाडा के साथ 2.6 अरब डॉलर के दीर्घकालिक यूरेनियम सप्लाई समझौते को भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। वैश्विक विश्लेषकों का मानना है कि यह समझौता भारत के उस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को मजबूत करेगा, जिसके तहत देश 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करना चाहता है।

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में घरेलू स्तर पर यूरेनियम उत्पादन भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं होगा। ऐसे में लंबे समय के लिए यूरेनियम आयात की व्यवस्था करना जरूरी हो जाता है।रिपोर्ट में विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया है कि भारत में यूरेनियम का घरेलू उत्पादन कुल मांग से काफी कम रहने की संभावना है। इसका मतलब है कि मौजूदा और भविष्य के परमाणु रिएक्टरों को चलाने के लिए भारत को आयात पर निर्भर रहना पड़ेगा। इसी कारण कनाडा के साथ दीर्घकालिक सप्लाई समझौता रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दुनिया के सबसे बड़े यूरेनियम उत्पादक कजाकिस्तान से भारत पिछले कुछ वर्षों से यूरेनियम का प्रमुख आयात करता रहा है। अब कनाडा के साथ हुआ यह समझौता भारत के लिए इस अहम ईंधन का एक और बड़ा स्रोत खोल देगा, जिससे देश के परमाणु रिएक्टरों को ऊर्जा मिल सकेगी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि दिसंबर 2025 में भारत की संसद ने नागरिक परमाणु ऊर्जा ढांचे में बदलाव को मंजूरी दी है, जिसके तहत पहली बार घरेलू और विदेशी कंपनियों को परमाणु ऊर्जा संयंत्र बनाने, उनके मालिक बनने और संचालन करने की अनुमति दी गई है। इससे पहले यह क्षेत्र पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में था।

इस सुधार के जरिए लंबे समय से चली आ रही सप्लायर लायबिलिटी से जुड़ी चिंताओं को भी दूर किया गया है और नियामकीय ढांचा अधिक स्पष्ट और स्थिर बनाया गया है। इससे विदेशी तकनीकी साझेदारों और निजी निवेश के लिए रास्ता साफ हुआ है, जो भारत के परमाणु ऊर्जा विस्तार के लिए जरूरी माना जा रहा है।

विश्लेषकों का कहना है कि कनाडा यूरेनियम की आपूर्ति करने के लिए अच्छी स्थिति में है, क्योंकि वहां कई नए खनन प्रोजेक्ट विकसित किए जा रहे हैं। इससे आने वाले वर्षों में देश का यूरेनियम उत्पादन लगातार बढ़ने की उम्मीद है और भारत को लंबे समय तक ईंधन की आपूर्ति को लेकर भरोसा मिलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कनाडा के साथ यूरेनियम समझौते को ‘ऐतिहासिक डील’ बताया है। उन्होंने कहा कि दोनों देश छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर, उन्नत रिएक्टर और पूरे परमाणु मूल्य शृंखला में मिलकर काम करेंगे। वहीं कनाडा के नेता मार्क कार्नी ने कहा कि उनका देश भारत की परमाणु ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में योगदान देने की क्षमता रखता है और दोनों देश एक रणनीतिक ऊर्जा साझेदारी शुरू कर रहे हैं।

शिखर बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि कनाडा की कंपनी कैमेको और भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग के बीच 2.6 अरब कनाडाई डॉलर का व्यावसायिक समझौता हुआ है। यह समझौता भारत की नागरिक परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता बढ़ाने, स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य हासिल करने और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करेगा।

संयुक्त बयान के अनुसार, ऊर्जा क्षेत्र में दोनों देशों की पूरक क्षमताओं को ध्यान में रखते हुए भारत-कनाडा रणनीतिक ऊर्जा साझेदारी को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है। इसके तहत स्वच्छ ऊर्जा, पारंपरिक ऊर्जा, नागरिक परमाणु ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग को मजबूत किया जाएगा, ताकि ऊर्जा सस्ती, टिकाऊ और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने वाली बन सके।

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