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राष्ट्रीय

‘राष्ट्रपति का पद राजनीति से परे’, पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति मुर्मु के अनादर पर बोले किरेन रिजिजू

Updated on Sunday, March 08, 2026 17:39 PM IST

केंद्रीय संसदीय और अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के पश्चिम बंगाल दौरे के बीच विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का पद राजनीति से परे है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सामने आई चुनौतियां न सिर्फ पश्चिम बंगाल, बल्कि पूरे देश के लिए ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ हैं।

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “देश की पहली जनजातीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु की ओर से इस प्रकार की पीड़ा व्यक्त किया जाना न सिर्फ पश्चिम बंगाल बल्कि पूरे देश के लिए अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। राष्ट्रपति का पद राजनीति से परे, राष्ट्र की सर्वोच्च संवैधानिक गरिमा का प्रतीक है।”

इससे पहले, किरेन रिजिजू ने राष्ट्रपति मुर्मु के संबोधन का वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “मुझे आदिवासी और भारतीय होने पर हमेशा गर्व रहा है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के इस शर्मनाक कृत्य ने मेरे गौरव को ठेस पहुंचाई है। भारत की राष्ट्रपति पद पर बैठी आदिवासी महिला द्रौपदी मुर्मु का अपमान करना आदिवासी गौरव का अपमान और भारत के संविधान पर आक्रमण है।”

दरअसल, यह टिप्पणी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले में संथाल कॉन्फ्रेंस समारोह स्थल को आखिरी समय में बदलने पर नाराजगी जताने के बाद आई। राष्ट्रपति मुर्मु सिलीगुड़ी महकमा परिषद के फांसीदेवा क्षेत्र पहुंची थीं, लेकिन प्रोटोकॉल के अनुसार, मुख्यमंत्री या कोई मंत्री उनके स्वागत के लिए नहीं पहुंचा था।

यहीं नहीं, राष्ट्रपति को सिलीगुड़ी के बिधाननगर में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेना था, लेकिन पश्चिम बंगाल प्रशासन ने कथित तौर पर सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए कार्यक्रम की अनुमति से इनकार कर दिया। ऐसे में आयोजकों को कार्यक्रम गोशाईपुर में एक छोटी जगह पर शिफ्ट करना पड़ा।

राष्ट्रपति मुर्मु ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि आज अंतर्राष्ट्रीय संथाल सम्मेलन था। कार्यक्रम में शामिल होने के बाद जब मैं यहां आई तो मुझे एहसास हुआ कि अगर यह सम्मेलन यहीं आयोजित होता तो बेहतर होता, क्योंकि यह इलाका बहुत विशाल है। मुझे नहीं पता प्रशासन के मन में क्या चल रहा था। उन्होंने कहा कि नहीं, यह जगह भीड़भाड़ वाली है, लेकिन मुझे लगता है कि यहां आसानी से पांच लाख लोग इकट्ठा हो सकते थे। मुझे नहीं पता कि उन्होंने हमें वहां, इस स्थान से दूर क्यों ले गए।

उन्होंने आगे कहा कि मुझे नहीं पता प्रशासन के मन में क्या चल रहा था कि उन्होंने सम्मेलन के लिए ऐसी जगह चुनी, जहां संथाल लोग नहीं जा सकते। मुझे बहुत दुख है कि यहां के लोग सम्मेलन में नहीं पहुंच पाए, क्योंकि यह इतनी दूर आयोजित किया गया था। शायद प्रशासन को उम्मीद थी कि कोई भी उपस्थित नहीं होगा और राष्ट्रपति चली जाएंगी।

राष्ट्रपति मुर्मु ने यह भी कहा कि अगर राष्ट्रपति किसी जगह जाती हैं तो मुख्यमंत्री और मंत्रियों को भी आना चाहिए, लेकिन वह नहीं आईं। मैं भी बंगाल की बेटी हूं। ममता दीदी भी मेरी बहन हैं, मेरी छोटी बहन। मुझे नहीं पता कि वह मुझसे नाराज थीं, इसलिए ऐसा हुआ। 

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