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राष्ट्रीय

पीएम मोदी आज तिरुचिरापल्ली से 2 अमृत भारत रेलगाड़ियों, 2 एक्सप्रेस ट्रेनों और एक पैसेंजर ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे

Updated on Wednesday, March 11, 2026 14:53 PM IST

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी आज बुधवार को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली से दो अमृत भारत एक्सप्रेस, दो एक्सप्रेस रेलगाड़ियों और एक पैसेंजर ट्रेन, तथा केरल के एर्णाकुलम से एक और पैसेंजर ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। ये नई ट्रेन सेवाएं सामूहिक रूप से तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा और झारखंड के लाखों यात्रियों को लाभ पहुंचाएंगी।

रेल मंत्रालय के अनुसार, इस अवसर पर केरल में तीन पुनर्विकसित अमृत स्टेशनों का उद्घाटन भी किया जाएगा और शोरनूर-निलांबुर रेलवे लाइन विद्युतीकरण परियोजना राष्ट्र को समर्पित की जाएगी।

दक्षिण भारत का औद्योगिक केंद्र, अब पूरब से जुड़ा

तमिलनाडु में एक ऐसा शहर है जहां दो रेलवे स्टेशन एक-दूसरे से मुश्किल से छह किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं, फिर भी अब तक, उनमें से कोई भी अपने लोगों को झारखंड के खनिज-समृद्ध क्षेत्र के लिए सीधी ट्रेन सेवा प्रदान नहीं कर सका था। वह शहर कोयंबटूर है। लेकिन अब यह स्थिति बदलने वाली है, जब प्रधानमंत्री मोदी तिरुचिरापल्ली से ‘पोदानूर-धनबाद अमृत भारत एक्सप्रेस’ को हरी झंडी दिखाएंगे।

दरअसल, दक्षिण के करघा-नगरों से लेकर पूरब के कोयला-खदानों से घिरे पठारों तक, भारतीय रेल ने उस मांग को पूरा किया है जिसे यह क्षेत्र दशकों से संजोए हुए था। पोदानूर जंक्शन कोयंबटूर का दूसरा सबसे बड़ा रेलवे केंद्र है और शहर के दक्षिणी छोर पर स्थित है, यह इस नई ‘अमृत भारत एक्सप्रेस’ का शुरुआती स्टेशन है। इसके कुछ ही मिनटों बाद कोयंबटूर जंक्शन आता है, जो इसका पहला कमर्शियल हॉल्ट (ठहराव) है। ये दोनों स्टेशन मिलकर कोयंबटूर के लाखों लोगों को ऐसी रेलगाड़ी तक पहुंचने के दो रास्ते उपलब्ध कराते हैं, जो सीधे धनबाद तक जाती है। एक ही ट्रेन, जो आपके घर से लेकर आपकी मंज़िल तक का सफ़र तय करती है।

वहीं पहले, इस यात्रा का मतलब होता था—चेन्नई या विजयवाड़ा के लिए ट्रेन पकड़ना, वहां घंटों इंतज़ार करना, और फिर दूसरी ट्रेन पकड़ना; जिससे पहले से ही लंबे इस सफ़र में एक पूरा दिन और जुड़ जाता था। नई ‘अमृत भारत एक्सप्रेस’ ने इस पूरे समीकरण को ही बदल दिया है। यह साप्ताहिक सेवा है; यह हर शनिवार सुबह पोदानूर से रवाना होगी और सोमवार तड़के धनबाद पहुंच जाएगी, जबकि वापसी की सेवा हर सोमवार को धनबाद से चलेगी। रास्ते में सलेम, रेनिगुंटा, विजयवाड़ा, झारसुगुड़ा और रांची जैसे स्टेशनों से गुज़रते हुए, यह नई साप्ताहिक रेलगाड़ी उस पूरे कॉरिडोर के हर बड़े स्टेशन से गुजरेगी, जो दक्षिण भारत के औद्योगिक केंद्र को पूर्वी भारत की ‘एनर्जी बेल्ट’ से जोड़ता है।

दक्षिण से पूरब तक: औद्योगिक गलियारे का निर्माण

भारत की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा दो तरह के शहरों के बीच के तालमेल पर चलता है—वे शहर जो चीज़ें बनाते हैं, और वे शहर जो निर्माण की प्रक्रिया को ऊर्जा देते हैं। कोयंबटूर और धनबाद के बीच यह तालमेल लंबे समय से बना हुआ है, भले ही रेलवे ने उन्हें औपचारिक तौर पर अभी तक एक-दूसरे से न जोड़ा हो। सेलम स्टील प्लांट—जो रेलवे ट्रैक, रक्षा उपकरणों और बुनियादी ढांचे में इस्तेमाल होने वाला खास मिश्र धातु (alloy) वाला स्टील बनाता है—अपने लिए ‘कोकिंग कोल’ धनबाद के आस-पास की खदानों से ही लेता है। कच्चा माल मालगाड़ियों से दक्षिण की ओर जाता है; और अब, इन दो दुनियाओं के बीच आने-जाने वाले लोग अमृत भारत एक्सप्रेस से सफ़र करेंगे।

नागरकोइल-चारलापल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस: भारत के सबसे दक्षिणी तट को दक्कन से जोड़ना

भारत के बिल्कुल किनारे पर एक और शहर है, जहां ज़मीन खत्म हो जाती है और तीन समुद्र मिलते हैं। कन्याकुमारी, और वह तटीय पट्टी जो नागरकोइल से होते हुए उत्तर की ओर फैली हुई है, लंबे समय से तीर्थयात्रियों, मछुआरों और चुपचाप मेहनत करने वाले लोगों का क्षेत्र रही है; ऐसे लोग जिन्होंने इस उपमहाद्वीप के सबसे दक्षिणी छोर पर अपना जीवन बनाया है। फिर भी, अपने इतने महत्व के बावजूद, यह पट्टी दक्कन के आर्थिक अवसरों से लगातार दूर ही रही है। नागरकोइल से हैदराबाद तक की यात्रा का मतलब था ट्रेन बदलना, इंतज़ार करना, और यात्रा में ही दो दिन का ज़्यादातर समय बिताना। इस नई सेवा के शुरू होने से यह दूरी कम हो जाएगी।

दो एक्सप्रेस और दो पैसेंजर रेलगाड़ियां

वहीं, रामेश्वरम-मंगलुरु एक्सप्रेस और तिरुनेलवेली-मंगलुरु एक्सप्रेस, दोनों ही कर्नाटक तट की ओर जाते हुए कोयंबटूर गलियारे से होकर गुजरेगी। कोयंबटूर ज़िले के निवासियों के पास अब पश्चिम की ओर मंगलुरु जाने के लिए नए और सीधे विकल्प मौजूद हैं, जिसके लिए उन्हें बीच के स्टेशनों पर ट्रेन बदलने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। हिंदू धर्म के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक, रामेश्वरम की यात्रा करने वाले तीर्थयात्रियों के लिए, यह नई एक्सप्रेस रेलगाड़ी रामनाथस्वामी मंदिर तक की यात्रा को और भी सुगम बनाती है। इसका मार्ग तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक से होकर गुज़रेगा, और यह तटीय क्षेत्र के विद्यार्थियों, व्यापारियों और कामकाजी पेशेवरों को सेवाएं प्रदान करेगी।

केरल को आधुनिक बुनियादी ढांचे का उपहार-तीन स्टेशनों का उद्घाटन

केरल में, तीन स्टेशनों का उद्घाटन ‘अमृत भारत स्टेशनों’ के रूप में किया जा रहा है—शोरनूर, कुट्टिप्पुरम और चंगनास्सेरी। इन्हें आधुनिक यात्री सुविधाओं, उन्नत प्लेटफॉर्म, लिफ्ट और एस्केलेटर, मुफ्त वाई-फाई, और स्थानीय कला व संस्कृति से प्रेरित स्टेशन के बाहरी स्वरूप (facades) के साथ फिर से बनाया गया है। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत इन तीनों स्टेशनों का पुनर्विकास लगभग ₹52 करोड़ की कुल लागत से किया गया है। ये केवल नवीनीकृत इमारतें नहीं हैं। ये इस बात का प्रतीक हैं कि हर भारतीय—चाहे वह किसी भी शहर का रहने वाला हो—एक ऐसे स्टेशन का हकदार है जो देश की आकांक्षाओं को दर्शाता हो।

इन उद्घाटनों के साथ-साथ, शोरनूर-निलांबुर रेलवे लाइन का विद्युतीकरण कार्य भी राष्ट्र को समर्पित किया जा रहा है। यह लाइन मलप्पुरम जिले से गुज़रते हुए 65 किलोमीटर तक फैली है और इस परियोजना की लागत 90 करोड़ रुपये है। यह विद्युतीकृत गलियारा डीज़ल इंजन की ज़रूरत को खत्म करता है, यात्रा के समय को कम करता है, उत्सर्जन घटाता है, और केरल के सबसे अधिक आबादी वाले जिलों में से एक जिले में अधिक यात्री और मालगाड़ी सेवाओं की निर्बाध शुरुआत को संभव बनाएगा।

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