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राष्ट्रीय

अंतरिक्ष मिशनों में छात्रों की बढ़ रही भागीदारी, 11 छात्र उपग्रहों का प्रक्षेपण

Updated on Friday, March 13, 2026 21:05 PM IST

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज राज्यसभा को सूचित किया कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (आईएसआरओ) ने छात्रों और युवा शोधकर्ताओं को उपग्रह विकास, पेलोड प्रयोगों और अंतरिक्ष अभियानों में सक्रिय रूप से शामिल करने के लिए कई सुनियोजित पहल शुरू की हैं।

विशेष कार्यक्रम शुरू किए गए
मंत्री ने कहा कि इसरो ने ऐसे विशेष कार्यक्रम शुरू किए हैं जिनसे छात्र शोधकर्ताओं को उपग्रह डिजाइन, पेलोड विकास और मिशन प्रयोगों सहित वास्तविक अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी परियोजनाओं पर काम करने का अवसर मिलता है। यू आर राव उपग्रह केंद्र के नेतृत्व में चलाए जा रहे छात्र उपग्रह कार्यक्रम के तहत, शैक्षणिक संस्थानों और छात्र टीमों को इसरो के वैज्ञानिकों के तकनीकी मार्गदर्शन में उपग्रहों के डिजाइन और विकास के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इन छात्र-निर्मित उपग्रहों को इसरो मिशनों के माध्यम से एकीकरण सहायता और प्रक्षेपण के अवसर भी प्राप्त होते हैं।

इंटर्नशिप और परियोजना प्रशिक्षण योजनाएं
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आगे बताया कि देश भर के मान्यता प्राप्त संस्थानों के स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट छात्रों के लिए इंटर्नशिप और परियोजना प्रशिक्षण योजनाएं उपलब्ध हैं। ये कार्यक्रम इसरो केंद्रों में व्यावहारिक अनुसंधान का अनुभव प्रदान करते हैं, जिससे युवा शोधकर्ताओं को उन्नत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के साथ सीधे काम करने का अवसर मिलता है।
शैक्षणिक भागीदारी को और अधिक बढ़ाने के लिए, देश के विभिन्न क्षेत्रों में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी इनक्यूबेशन केंद्र (एसटीआईसी) स्थापित किए गए हैं। ये केंद्र विश्वविद्यालयों और आईएसआरओ के वैज्ञानिकों के बीच सहयोगात्मक अनुसंधान को बढ़ावा देते हैं और छात्रों को विशेषज्ञ मार्गदर्शन में स्वदेशी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी विकसित करने में सहायता करते हैं।
मंत्री ने अंतरिक्ष क्षेत्र में छात्रों की भागीदारी को बढ़ावा देने में भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (आईएन-स्पेस) की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। आईएन-स्पेस ने सीएएन आकार के उपग्रहों और मॉडल रॉकेटों के डिजाइन और विकास पर केंद्रित छात्र प्रतियोगिताओं का आयोजन किया है, जिसमें लगभग 850 छात्रों की 97 टीमों ने भाग लिया है।

11 छात्र उपग्रहों का प्रक्षेपण

उन्होंने सदन को सूचित किया कि आईएन-स्पेस ने अब तक 17 छात्र उपग्रहों और पेलोड को अधिकृत किया है, जिनमें से 11 को सफलतापूर्वक लॉन्च किया जा चुका है। इन मिशनों में देश भर के संस्थान शामिल रहे हैं, जिनमें भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान, भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान, आरवी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, एमिटी यूनिवर्सिटी महाराष्ट्र, एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी, असम डॉन बोस्को यूनिवर्सिटी, सीवी रमन ग्लोबल यूनिवर्सिटी और कई अन्य शैक्षणिक संस्थान शामिल हैं, जो छात्र-नेतृत्व वाले अंतरिक्ष मिशनों में बढ़ती राष्ट्रीय भागीदारी को दर्शाते हैं।

क्षेत्रीय अंतरिक्ष शैक्षणिक केंद्र (आरएसी-एस) स्थापित
अंतरिक्ष अनुसंधान को अधिक समावेशी बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए मंत्री ने कहा कि इसरो का रिस्पॉन्ड (प्रायोजित अनुसंधान) कार्यक्रम भारत भर के विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों को अंतरिक्ष विज्ञान, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और अनुप्रयोगों के क्षेत्र में अनुसंधान करने के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करता है।
इसके अतिरिक्त, इसरो कार्यक्रमों के लिए क्षेत्रीय पहुंच केंद्रों के रूप में कार्य करने हेतु क्षेत्रीय अंतरिक्ष शैक्षणिक केंद्र (आरएसी-एस) स्थापित किए गए हैं, जिससे छोटे शहरों और कॉलेजों के छात्रों को अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी से परिचित कराया जा सके।

एआईसीटीई ने अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में लघु पाठ्यक्रम को मंजूरी
मंत्री ने आगे बताया कि एआईसीटीई ने अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में लघु पाठ्यक्रम को मंजूरी दे दी है और देश में अंतरिक्ष शिक्षा को मजबूत करने के लिए भारतीय अंतरिक्ष नीति-2023 के अनुरूप भारत में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी शिक्षा को अपनाने हेतु एक राष्ट्रीय समिति का गठन किया गया है।
छात्रों के बीच बढ़ते उत्साह को रेखांकित करते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि मॉडल रॉकेट्री और कैनसैट इंडिया छात्र प्रतियोगिता का आयोजन अक्टूबर 2025 में उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में IN-SPACe, ISRO और एस्ट्रोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (ASI) द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था। इसमें लगभग 500 छात्रों की 67 टीमों ने कैनसैट पेलोड ले जाने वाले मॉडल रॉकेटों को डिजाइन, निर्मित और लगभग 1 किलोमीटर की ऊंचाई तक लॉन्च किया।

प्रतिवर्ष लगभग 10 करोड़ रुपये आवंटित
मंत्री ने यह भी बताया कि सरकार ने अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी से संबंधित छात्र-केंद्रित शैक्षिक गतिविधियों के लिए प्रतिवर्ष लगभग 10 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। उन्होंने आगे कहा कि IN-SPACe विभिन्न पहलों के माध्यम से अंतरिक्ष उद्यमियों की अगली पीढ़ी को पोषित कर रहा है, जिनमें संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन, पूर्व-इनक्यूबेशन उद्यमिता सहायता कार्यक्रम और IN-SPACe तकनीकी केंद्रों में सह-कार्य सुविधाएं शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि ये पहल भारत में एक जीवंत और समावेशी अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए सरकार के व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा हैं, जहां छात्र, स्टार्टअप, शैक्षणिक संस्थान और उद्योग सभी वैश्विक अंतरिक्ष क्षेत्र में देश की बढ़ती भूमिका में योगदान करते हैं।

 
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