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राष्ट्रीय

आयुष दवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए सरकार के बड़े कदम, डिजिटल और जागरूकता पर जोर

Updated on Wednesday, March 18, 2026 13:43 PM IST

देश में नि:शुल्क आयुष दवाओं की उपलब्धता और उनके प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं। आयुष मंत्रालय ने डिजिटल प्लेटफॉर्म, जागरूकता अभियानों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के विस्तार के जरिए इस दिशा में काम तेज किया है, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक आयुष सेवाएं पहुंच सकें।

डिजिटल प्लेटफॉर्म से दवाओं की निगरानी

आयुष मंत्रालय ने आयुष ग्रिड के तहत आयुष अस्पताल प्रबंधन सूचना प्रणाली (एएचएमआईएस) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं। इन प्लेटफॉर्म के जरिए आयुष केंद्रों में दवाओं की उपलब्धता का डिजिटलीकरण और निगरानी की जा रही है, जिससे चिकित्सकों और फार्मासिस्टों को बेहतर प्रबंधन में मदद मिल रही है।

राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत जागरूकता अभियान

राष्ट्रीय आयुष मिशन (एनएएम) के तहत राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों को व्यवहार परिवर्तन संप्रेषण (बीसीसी) और सूचना, शिक्षा एवं संचार (आईईसी) गतिविधियों के लिए सहायता दी जा रही है। इन अभियानों के जरिए आयुष आधारित निवारक स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा दिया जा रहा है और लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। जनसंचार माध्यमों और शिविरों के माध्यम से समाज में आयुष पद्धतियों की उपयोगिता को व्यापक रूप से बताया जा रहा है।

आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का विस्तार

एनएएम के तहत देशभर में 12,500 आयुष्मान आरोग्य मंदिर (आयुष) को कार्यशील किया गया है। इन केंद्रों के जरिए लोगों को निवारक, प्रोत्साहक, उपचारात्मक और पुनर्वास स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। साथ ही, अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ रेफरल लिंकेज भी मजबूत किया गया है।

स्वास्थ्य कर्मियों को दिया जा रहा प्रशिक्षण

आयुष मंत्रालय ने आशा और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित करने के लिए प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण (टीओटी) कार्यक्रम भी शुरू किया है। इन कर्मियों को आयुष के लाभ, रोगों की रोकथाम और सामान्य बीमारियों के इलाज के बारे में प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि वे जमीनी स्तर पर लोगों को बेहतर मार्गदर्शन दे सकें।

विशेष प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रम

केंद्रीय स्वास्थ्य शिक्षा ब्यूरो, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सहयोग से 2024 और 2025 में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें मस्कुलोस्केलेटल और चयापचय संबंधी बीमारियों के प्रबंधन पर आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी और सिद्ध चिकित्सा अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया।

राज्यों को मिल रही वित्तीय सहायता

एनएएम के तहत राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों को प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए वित्तीय सहायता भी दी जा रही है। राज्य सरकारें अपनी वार्षिक कार्य योजनाओं के माध्यम से प्रस्ताव भेजकर इस सहायता का लाभ उठा सकती हैं।

‘आयुर्ज्ञान’ योजना से भी मिल रहा सहयोग

आयुष मंत्रालय आयुर्ज्ञान योजना के तहत भी काम कर रहा है। इस योजना के जरिए आयुष कर्मियों के लिए सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है।

लोकसभा में दी गई जानकारी

यह जानकारी प्रताप राव जाधव ने 13 मार्च 2026 को लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी। सरकार का उद्देश्य आयुष पद्धतियों के समग्र विकास और उनके व्यापक उपयोग को बढ़ावा देना है, ताकि आम लोगों को सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। 

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