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राष्ट्रीय

योगी सरकार अगले तीन साल में तैयार करेगी 57 हजार बीमा सखी

Updated on Monday, March 23, 2026 20:17 PM IST

लखनऊ : योगी सरकार ने पिछले नौ वर्षों में प्रदेश की महिलाओं को सशक्त करने की दिशा में अनेक बड़े कदम उठाए हैं। उन्हें आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाने के लिए विभिन्न योजनाओं को लागू किया गया है। इसी क्रम में एलआईसी बीमा सखी योजना के जरिये अधिक से अधिक ग्रामीण महिलाओं को जोड़ने के लिए बड़ा निर्णय लिया है। योगी सरकार ने अगले तीन वर्षों में प्रदेश की सभी 57 हजार ग्राम पंचायतों में एलआईसी बीमा सखी को नियुक्त करने का निर्णय लिया है। इसके लिए उन्हें ट्रेनिंग के साथ स्टाइपेंड और पॉलिसी कराने पर कमीशन दिया जाएगा। इससे जहां प्रदेश की आधी आबादी आत्मनिर्भर होगी, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी संबल मिलेगा। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की डायरेक्टर दीपा रंजन ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करने के लिए एलआईसी बीमा सखी योजना चलाई जा रही है। इसके लिए भारतीय जीवन बीमा निगम और दीनदयाल अंत्योदय योजना राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के बीच त्रिपक्षीय समझौता किया गया। इसके तहत स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को प्रशिक्षित कर “बीमा सखी” के रूप में नियुक्त किया जा रहा है, जो ग्राम पंचायत स्तर पर बीमा उत्पादों का प्रचार-प्रसार, बिक्री और सेवा प्रदान कर रही हैं।
उन्होंने बताया कि योगी सरकार ने अगले तीन वर्षों में 57 हजार ग्राम पंचायतों में एक-एक एलआईसी बीमा सखी तैयार करने का निर्णय लिया है, जिसे चरणबद्ध तरीके से धरातल पर उतारा जाएगा। योजना का उद्देश्य न केवल ग्रामीण महिलाओं को रोजगार से जोड़ना है, बल्कि गांव-गांव तक बीमा सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना भी है।

डायरेक्टर दीपा रंजन ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए यूपीएसआरएलएम ने 5,000 बीमा सखियों की नियुक्ति का लक्ष्य तय किया है। ऐसे में अब तक प्रदेश के 75 में से 65 जिलों से 3,397 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। इनमें से 672 महिलाओं ने 25 घंटे का भर्ती-पूर्व प्रशिक्षण (आईसी-38) सफलतापूर्वक पूरा किया है। इसके अलावा 469 अभ्यर्थियों ने एनएसईटी के माध्यम से आयोजित आईआरडीएआई लाइसेंसिंग परीक्षा पास कर ली है और उन्हें आधिकारिक रूप से बीमा सखी नियुक्त किया जा चुका है। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली महिलाओं में लगभग 70 प्रतिशत की सफलता दर इस योजना की प्रभावशीलता को दर्शाती है।
भर्ती, प्रशिक्षण और परीक्षा की प्रक्रिया लगातार जारी है, और मार्च 2026 तक अधिकतम नियुक्तियां सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। शेष 10 जिलों में भी भर्ती अभियान शुरू कर 75 जिलों में 100 प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित किया जाएगा। ब्लॉक स्तर पर मासिक भर्ती लक्ष्य तय किए जाएंगे, जिससे प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और तेज हो सके। वहीं योजना की निगरानी के लिए मिशन डायरेक्टर की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समिति गठित की गई है, जो नियमित रूप से प्रगति की समीक्षा कर रही है। साथ ही एलआईसी के राज्य और जिला कार्यालयों तथा एसआरएलएम टीमों के बीच निरंतर समन्वय के माध्यम से प्रक्रिया को गति दी जा रही है।

योगी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026–27 में 20,000 नई बीमा सखियों की नियुक्ति का लक्ष्य रखा है। अगले तीन वर्षों में प्रदेश की 57 हजार ग्राम पंचायतों में एक-एक बीमा सखी तैनात करने की योजना है। लक्ष्य को हासिल करने के लिए कई रणनीतिक कदम उठाए जा रहे हैं। योजना में बीसी सखी, बैंक सखी और एफएल-सीआरपी जैसे कैडर को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे प्रशिक्षित और अनुभवी महिलाओं को तुरंत बीमा सखी के रूप में जोड़ा जा सकेगा। यह रणनीति ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाती है।

प्रशिक्षण के लिए एलआईसी के एजेंट ट्रेनिंग सेंटर (एटीसी) और डिविजनल ट्रेनिंग सेंटर (डीटीसी) के साथ मिलकर जिला स्तर पर प्रशिक्षण कैलेंडर तैयार किए जा रहे हैं, जो अभ्यर्थी परीक्षा में असफल हो जाते हैं, उनके लिए रिफ्रेशर ट्रेनिंग की भी व्यवस्था की जा रही है। साथ ही ब्लॉक और जिला स्तर पर अस्थायी एनएसईआईटी परीक्षा केंद्र स्थापित करने की योजना है, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं परीक्षा दे सकें।
बीमा सखी बनने वाली महिलाओं को पहले साल हर महीने 7 हजार स्टाइपेंड दिया जाएगा, साथ ही बीमा पॉलिसी कराने पर उन्हें कमीशन भी मिलेगा। इसके अलावा दूसरे साल 6 हजार और तीसरे साल हर माह 5 हजार स्टाइपेंड दिया जाएगा। इससे उनकी आय में स्थायी वृद्धि होगी। इसके अलावा डिजिटल उपकरण, नियमित मेंटरिंग और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।

उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली बीमा सखियों को जिला और राज्य स्तर पर सम्मानित करने की भी योजना है, जिससे अन्य महिलाओं को प्रेरणा मिलेगी और प्रतिस्पर्धात्मक माहौल बनेगा। योजना की पारदर्शिता और प्रभावशीलता बनाए रखने के लिए इसे यूपीएसआरएलएम के मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (एमआईएस) से जोड़ा जा रहा है। इससे राज्य स्तर पर सभी बीमा सखियों की नियुक्ति, कार्य और प्रदर्शन की निगरानी आसान होगी।

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