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स्वास्थ्य

बच्चों के लिए संजीवनी है जायफल, आयुर्वेद से जाने सेवन से पहले की सावधानियां

Updated on Thursday, April 02, 2026 19:21 PM IST

नई दिल्ली : बदलते मौसम का प्रभाव बच्चों से लेकर बड़ों पर पड़ता है, लेकिन छोटे बच्चे बदलते मौसम की मार सबसे ज्यादा झेलते हैं। पेट खराब होना या सिर्फ जुकाम होना, ये समस्याएं बच्चों को सबसे अधिक परेशान करती हैं, लेकिन आयुर्वेद में कुछ ऐसे आराम उपाय बताए गए हैं, जिससे बिना किसी नकारात्मक प्रभाव के बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। आयुर्वेद में जायफल को इसका एक मात्र उपाय बताया है। आयुर्वेद में जायफल को वात-शामक, पाचक और मेध्य माना गया है। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता से लेकर मस्तिष्क को पोषण देने में मदद करता है। इससे पेट से जुड़ी परेशानी जैसे गैस में भी आराम मिलता है, लेकिन उसके सेवन का तरीका बहुत कम लोग ही जानते हैं। आयुर्वेद में माना गया है कि किसी औषधि को उचित संस्कार देने से उसके गुण अधिक संतुलित और शरीर के लिए कोमल हो जाते हैं, क्योंकि जायफल स्वभाव से तीक्ष्ण माना जाता है। इसलिए बच्चों के लिए उसे इस प्रकार तैयार किया जाता था।

पुराने समय से ही खासकर बच्चों के लिए जायफल को सीधे नहीं दिया जाता था। पहले उसे दूध में उबाला जाता, फिर दही में रखा जाता और अंत में घी में पकाया जाता था। इसके बाद ही उसे दूध में घिसकर बच्चों को बहुत थोड़ी मात्रा में दिया जाता था। सबसे पहले जायफल को थोड़ी देर दूध में उबाला जाता है और फिर कुछ घंटों के लिए दही में थोड़ा दिया जाता है और आखिर में घी में पकाया जाता है। इससे जायफल की गर्म और तीखी तासीर कम होती है, और इसके औषधीय गुण भी बढ़ जाते हैं।

इसके चुटकीभर सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, बैचेनी कम होती है। पेट से जुड़ी समस्याएं कम होती है और सर्दी और खांसी-जुकाम में आराम मिलता है। अगर बच्चा ठीक से सो नहीं पाता है, तब भी कम मात्रा में इसे बच्चों को दिया जाता है। यह तंत्रिक तंत्र को शांत करके बच्चों को गहरी नींद लाने में मदद करता है। ध्यान रखने वाली बात 6 महीने से कम उम्र के बच्चे को बिना चिकित्सक की सलाह के न दें और अगर बच्चे का पेट खराब है, तब भी इसे देने से बचें।

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