पंचकूला : पंचकूला के मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) श्री पी.एस. बाजवा और श्री एस.एन. वशिष्ठ ने इंटरनेशनल टेनिस फेडरेशन (आईटीएफ) के तत्वावधान में आयोजित टेनिस प्रतियोगिता में 60 वर्ष आयु वर्ग के डबल्स मुकाबले में दूसरा स्थान हासिल कर पंचकूला का नाम रोशन किया।
इसके अलावा मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) श्री पी.एस. बाजवा ने 60 वर्ष आयु वर्ग की सिंगल्स प्रतियोगिता जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
पंचकूला सेक्टर-4 निवासी श्री एस.एन. वशिष्ठ इससे पहले भी कई बार 60 वर्ष आयु वर्ग की प्रतियोगिताओं में जीत हासिल कर चुके हैं। 62 वर्ष की आयु में इंटरनेशनल सीनियर टेनिस टूर्नामेंट में गोल्ड मेडल जीतकर उन्होंने यह साबित कर दिया कि यदि जुनून जीवित हो तो उम्र केवल एक संख्या बनकर रह जाती है।
श्री वशिष्ठ भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) में डेवलपमेंट ऑफिसर के पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। लंबे समय तक नौकरी और परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के बाद उन्होंने अपने जीवन को नई दिशा देने का निर्णय लिया। 50 वर्ष की आयु में उन्होंने टेनिस खेलना शुरू किया और यह फैसला उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।
जहां अधिकांश लोग 50 वर्ष की आयु में रिटायरमेंट की योजना बनाते हैं, वहीं वशिष्ठ ने इसी उम्र में नई शुरुआत की। उन्होंने टेनिस रैकेट उठाया और नियमित अभ्यास शुरू किया। शुरुआत आसान नहीं थी। उम्र के साथ शरीर की सीमाएं भी थीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। धीरे-धीरे उन्होंने अपनी फिटनेस सुधारी, तकनीक पर काम किया और प्रतियोगिताओं में भाग लेना शुरू किया। उनकी मेहनत रंग लाई और वे राज्य स्तर से राष्ट्रीय तथा फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गए।
62 वर्ष की आयु में भी श्री वशिष्ठ की दिनचर्या किसी युवा खिलाड़ी से कम नहीं है। वे रोजाना साइक्लिंग करते हैं, नियमित योगाभ्यास और टेनिस की प्रैक्टिस करते हैं तथा संतुलित आहार लेते हैं। इसके अलावा उन्हें संगीत से भी गहरा लगाव है।
श्री वशिष्ठ की यह कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो उम्र या परिस्थितियों का हवाला देकर अपने सपनों को छोड़ देते हैं। उनकी उपलब्धियां यह संदेश देती हैं कि यदि इरादे मजबूत हों तो जीवन के किसी भी मोड़ पर नई शुरुआत की जा सकती है। पंचकूला का यह खिलाड़ी आज न केवल मेडल जीत रहा है, बल्कि हजारों लोगों को यह भी सिखा रहा है कि सपनों की कोई उम्र नहीं होती।