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अमेरिका ने यूएन के माइग्रेशन डिक्लेरेशन को किया खारिज, रुबियो ने बड़े पैमाने पर प्रवासन को बताया बड़ी गलती

Updated on Tuesday, May 12, 2026 13:58 PM IST

वाशिंगटन : अमेरिका में माइग्रेशन एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। इसे लेकर विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि बड़े पैमाने पर अमेरिका में प्रवासियों को आने देना एक बड़ी गलती थी। यह हमारे समाज की एकता और हमारे लोगों के भविष्य के लिए खतरा है। अमेरिका की ट्रंप सरकार ने यूएन माइग्रेशन डिक्लेरेशन (जीसीएम) को खारिज कर दिया।

अमेरिकी राज्य विभाग ने सोमवार को इस मामले में एक तीखा बयान जारी किया है। अमेरिकी राज्य विभाग ने कहा कि अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय माइग्रेशन रिव्यू फोरम में हिस्सा नहीं लिया और 8 मई के प्रोग्रेस डिक्लेरेशन का समर्थन नहीं करेगा।”

अमेरिकी सरकार ने कहा कि उसने ग्लोबल माइग्रेशन फ्रेमवर्क से जुड़े संयुक्त राष्ट्र के प्रयासों का लगातार विरोध किया है। बयान में कहा गया, “अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र के उन प्रयासों पर लगातार एतराज जताया है, जिनमें यूएस और पूरे पश्चिम में रिप्लेसमेंट इमिग्रेशन का समर्थन करने और आसान बनाने की कोशिशें शामिल हैं।”

इसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 2017 के उस फैसले का भी जिक्र किया गया, जिसमें उन्होंने माइग्रेशन को लेकर ग्लोबल कॉम्पैक्ट को खारिज कर दिया था। बयान में आगे कहा गया, “बीते सालों ने ग्लोबल माइग्रेशन फ्रेमवर्क के विरोध की समझदारी को साबित कर दिया है।”

सरकार ने यूएन एजेंसियों और उनके साझेदारों पर अमेरिका में बड़े पैमाने पर माइग्रेशन में मदद करने का आरोप लगाया। बयान के मुताबिक, अमेरिकियों ने सीमा पर अपराध और अफरा-तफरी, बड़े शहरों में इमरजेंसी की हालत और टैक्सपेयर्स के अरबों डॉलर माइग्रेंट्स के लिए होटल, प्लेन टिकट, सेल फोन और कैश कार्ड पर खर्च होते देखे हैं।

अमेरिकी राज्य विभाग ने आरोप लगाया गया कि यूएन से जुड़ी कोशिशों ने न सिर्फ हमारे देश पर हमले को आसान बनाया, बल्कि हमारे अपने लोगों की दौलत और रिसोर्स को दुनिया के सबसे बुरे कोनों से आए लाखों विदेशियों में बांट दिया।”

अमेरिका ने माइग्रेशन मैनेजमेंट के लिए संयुक्त राष्ट्र के नजरिए को खारिज करते हुए कहा, “इसमें कुछ भी सुरक्षित, व्यवस्थित या नियमित नहीं था।”

इसमें आगे कहा गया, “इसका खर्च मुख्य रूप से उन कामकाजी अमेरिकियों को उठाना पड़ा जिन्हें कम नौकरियों, घरों और सोशल सर्विस के लिए मुकाबला करने के लिए मजबूर होना पड़ा। यूएन के पास उनके बारे में कहने के लिए बहुत कम है।”

यूएस की सरकार ने कहा कि वह ऐसे किसी भी अंतरराष्ट्रीय प्रक्रिया का समर्थन नहीं करेगी जो इमिग्रेशन नीति पर अमेरिका की संप्रभुता को सीमित कर सकता है।

बयान में कहा गया, “राष्ट्रपति ट्रंप अमेरिकियों के हितों पर फोकस कर रहे हैं, न कि विदेशियों या ग्लोबलिस्ट ब्यूरोक्रेट्स पर। अमेरिका ऐसे किसी प्रक्रिया का समर्थन नहीं करेगा जो खुले तौर पर या चुपके से ऐसी गाइडलाइंस, स्टैंडर्ड्स या कमिटमेंट्स थोपता हो जो अमेरिकी लोगों के हमारे देश के सबसे अच्छे हित में फैसले लेने की संप्रभुता, लोकतांत्रिक अधिकार को रोकते हों।”

सरकार ने इमिग्रेशन नीति के लिए और सख्त अप्रोच का भी संकेत देते हुए कहा, “हमारा मकसद माइग्रेशन को मैनेज करना नहीं है, बल्कि रीमाइग्रेशन को बढ़ावा देना है।”

अंतरराष्ट्रीय माइग्रेशन रिव्यू फोरम, माइग्रेशन के मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने के लिए 2018 में अपनाए गए यूएन ग्लोबल कॉम्पैक्ट फॉर सेफ, ऑर्डरली एंड रेगुलर माइग्रेशन से जुड़ा है। यह कॉम्पैक्ट नॉन-बाइंडिंग है, लेकिन राष्ट्रीय संप्रभुता और बॉर्डर कंट्रोल को लेकर चिंताओं को लेकर कई कंजर्वेटिव सरकारों ने इसकी आलोचना की है।

 

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