उत्तर प्रदेश में अगले साल होने जा रहे विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा अपनी संगठनात्मक गतिविधियां तेज करने जा रही है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी और महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह कार्यकर्ताओं की नब्ज टटोलेंगे। पंकज चौधरी रविवार से जिलों के दौरे शुरू करने जा रहे हैं। वे इसकी शुरुआत कानपुर से करेंगे। कानपुर देहात, जालौन सहित बुंदेलखंड के अन्य जिलों में भी जाएंगे। उत्तर प्रदेश में चुनाव ज्यों-ज्यों करीब आ रहे हैं त्यों-त्यों सपा पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले पर संगठनात्मक समीकरण बिठा रही है। वहीं भाजपा ने इसकी काट के तौर गैर-यादव ओबीसी और दूसरे समुदायों पर फोकस करना शुरू कर दिया है। ऐसे में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के यूपी दौरे को काफी अहम माना जा रहा है।
पंकज चौधरी, 7 से 9 जून तक कानपुर नगर, देहात, जालौन, झांसी ललितपुर और औरैया जिलों में संगठनात्मक बैठकें करेंगे। क्षेत्र और प्रदेश कमेटी के गठन से पहले वरिष्ठों और अपनों संग बैठक कर कमेटी में समायोजित होने के प्रस्तावित नामों पर उनके कद की टोह लेंगे। यूपी मिशन-2027 को फतह करने में संगठन की अहम भूमिका होगी। इसी के मद्देनजर एक-एक नाम को शामिल किए जाने से पहले कई स्तरों पर परख की जा रही है। हाल में हुए योगी मंत्रिमंडल विस्तार को भी कई समीकरणों के दुरुस्तीकरण के साथ ही सपा के पीडीए अभियान के मुकाबले के तौर पर भी देखा गया था। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी, कैलाश सिंह राजपूत, हंसराज विश्वकर्मा और कृष्णा पासवान को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने को ओबीसी और एससी प्रतिनिधित्व पर बीजेपी के लगातार जोर के रूप में देखा गया।
लोकसभा चुनाव में सपा के लिए फायदेमंद साबित हुआ था पीडीए फॉर्मूला
बता दें कि साल 2024 के लोकसभा चुनाव में पीडीए फॉर्मूला समाजवादी पार्टी के लिए काफी फायदेमंद साबित हुआ था। उस चुनाव में सपा ने उत्तर प्रदेश की 80 में से 37 लोकसभा सीटें जीत ली थीं। इनमें से 25 सांसद ओबीसी समुदायों से आते हैं। उस चुनाव में सपा ने सिर्फ 5 यादव प्रत्याशी मैदान में उतारे थे। सपा के नेतृत्व वाले I.N.D.I.A गठबंधन ने प्रदेश में कुल 43 सीटें जीत ली थीं। सपा ने अयोध्या (फैजाबाद) की सीट भी जीत ली थी जिसे भाजपा के लिए बड़ा झटका माना जाता है। लोकसभा चुनाव के बाद समाजवादी पार्टी लगातार दावे कर रही है कि वह 2027 के विधानसभा चुनाव में भी पीडीए फॉर्मूले के बूते भाजपा से मुकाबला करेगी। सपा के इन दावों में कितना दम है इसका पता तो चुनाव परिणामों से ही चल सकेगा लेकिन यह जरूर है कि 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों ने यूपी की राजनीति में जातिगत समीकरणों और गठबंधनों के महत्व को एक बार फिर रेखांकित किया है।
बीजेपी की क्या है रणनीति
एक तरफ जब समाजवादी पार्टी लगातार पीडीए के फॉर्मूले को आजमाने की तैयारी कर रही है वहीं भाजपा और उसके सहयोगी दल गैर यादव ओबीसी और गैर जाटव दलितों की ओर देख रहे हैं। जानकारों का कहना है कि समाजवादी पार्टी जहां अलग-अलग हितों वाले कई सामाजिक समूहों के एकजुट करने की कोशिश कर रही है तो वहीं भाजपा की रणनीति जाति समूहों की बजाए हिंदू वोटरों को एकजुट करने की है। हालांकि ऐसा करते रहने के साथ ही भाजपा भी अलग-अलग जाति समूहों का प्रतिनिधित्व करने वाले चेहरों को संगठन से सरकार तक तरजीह देते हुए अपने समीकरणों को दुरुस्त करने में जुटी है।
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आज कानपुर में रहेंगे पंकज चौधरी
भााजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी आज से यूपी दौरे की शुरुआत कर रहे हैं। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार रविवार को वह बर्रा कानपुर नगर में कानपुर बुंदेलखंड के क्षेत्रीय अध्यक्ष प्रकाश पाल के यहां बड़े भाई के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त करने जाएंगे। गांधी नगर अकबरपुर, कानपुर देहात में प्रबुद्धजनों से भेंट करेंगे।