पंचकूला : इंडियन नेशनल लोकदल के पंचकूला जिलाध्यक्ष शहरी मनोज अग्रवाल ने कहा कि देश में 28 राज्यों में से 22 राज्यों तथा सभी 8 केन्द्र शासित प्रदेशों में भारतीय जनता पार्टी तथा सहयोगी दलों की सरकारें हैं, इसके बावजूद पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने का जीएसटी काउंसिल में नहीं लाया जा रहा है। इससे आम जनता को महंगे ईंधन का बोझ उठाना पड़ रहा है। उल्लेखनीय हैकि पिछले एक महीने में पैट्रोल डीजल के दाम लगभग साढे सात रूपए लीटर बढ चुके हैं।
मनोज अग्रवाल ने कहा कि भाजपा वर्षों से पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की बात करती रही है, लेकिन बाइस राज्यों तथा आठों केन्द्र शासित प्रदेशों में शासन होने के बावजूद इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा। वर्तमान में पेट्रोल और डीजल पर केंद्र सरकार के उत्पाद शुल्क के साथ राज्यों द्वारा वैट तथा विभिन्न प्रकार के सैस भी लगाए जा रहे हैं।जिसके कारण इनके दाम लगातार ऊंचे बने हुए हैं।
उन्होंने कहा कि यदि पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाए तो देशभर में कर व्यवस्था अधिक पारदर्शी होगी और आम उपभोक्ताओं, किसानों, व्यापारियों तथा परिवहन क्षेत्र को बड़ी राहत मिल सकती है। ईंधन की कीमतों में कमी आने से महंगाई पर भी नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी।
मनोज अग्रवाल ने केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों से मांग की कि राजनीतिक हितों से ऊपर उठकर जनता के हित में निर्णय लिया जाए तथा पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने के लिए जीएसटी परिषद में आवश्यक प्रस्ताव लाकर सर्वसम्मति से लागू किया जाए।
उन्होंने कहा कि जनता लगातार महंगाई की मार झेल रही है और सरकारों का दायित्व है कि करों का बोझ कम करके लोगों को राहत प्रदान करें। अब समय आ गया है कि पेट्रोल और डीजल पर वैट आधारित व्यवस्था की समीक्षा कर देशहित में एक समान और पारदर्शी कर प्रणाली लागू की जाए।