आज के व्यस्त और तनावपूर्ण जीवन में स्वास्थ्य की देखभाल पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गई है। बदलती जीवनशैली, अनियमित खान-पान और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा और हृदय रोग जैसी समस्याएँ तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे समय में योग एक सरल, प्राकृतिक और प्रभावी उपाय के रूप में सामने आया है, जो शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, प्रत्येक सप्ताह कम से कम 150 मिनट का मध्यम शारीरिक व्यायाम करना आवश्यक है। नियमित योगाभ्यास इस आवश्यकता को पूरा करने के साथ-साथ शरीर की लचीलापन, संतुलन और रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह मानसिक शांति, एकाग्रता और सकारात्मक सोच का भी माध्यम है।
भारत योग की जन्मभूमि है और आज विश्व के अनेक देशों में योग को स्वस्थ जीवनशैली का अभिन्न अंग माना जा रहा है। प्रत्येक वर्ष 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है, जिसमें करोड़ों लोग भाग लेकर योग के महत्व को स्वीकार करते हैं। वैज्ञानिक शोधों से भी यह सिद्ध हुआ है कि नियमित योग करने से तनाव कम होता है, नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है तथा अवसाद और चिंता जैसी मानसिक समस्याओं में राहत मिलती है।
योग के साथ संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और नियमित दिनचर्या अपनाने से जीवन अधिक स्वस्थ और ऊर्जावान बनता है। यदि प्रत्येक व्यक्ति प्रतिदिन केवल 30 मिनट योग करने का संकल्प ले, तो अनेक जीवनशैली संबंधी बीमारियों से बचा जा सकता है।
स्वस्थ समाज और सशक्त राष्ट्र के निर्माण के लिए योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना समय की आवश्यकता है। आइए, हम सभी योग को अपनाएँ, स्वस्थ रहें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें।
अन्नुप्रिया
सहायक प्राध्यापक
चंडीगढ़ विश्वविद्यालय