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स्वास्थ्य

क्या हाई ब्लड प्रेशर बदल देता है इंसान का व्यक्तित्व? नई स्टडी में सामने आए चौंकाने वाले संकेत

Updated on Saturday, July 04, 2026 17:41 PM IST

हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) को लंबे समय से दिल की बीमारियों, स्ट्रोक और किडनी से जुड़ी समस्याओं का बड़ा कारण माना जाता रहा है। डॉक्टर हमेशा इस बात पर जोर देते हैं कि ब्लड प्रेशर को नियंत्रण में रखना जरूरी है, क्योंकि यह अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बढ़ता रहता है। यही वजह है कि इसे “साइलेंट किलर” भी कहा जाता है। लेकिन अब एक नई स्टडी में हाई ब्लड प्रेशर को लेकर एक बड़ी चौंकाने वाली बात सामने आई है।

हाल ही में जर्नल ‘जनरल साइकियाट्री’ में प्रकाशित एक शोध के मुताबिक, हाई ब्लड प्रेशर का असर सिर्फ दिल और रक्त वाहिकाओं तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि यह इंसान के व्यक्तित्व यानी पर्सनैलिटी को भी प्रभावित कर सकता है। खास तौर पर ब्लड प्रेशर की निचली रीडिंग, जिसे डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर कहा जाता है, का संबंध नकारात्मक भावनाओं से जुड़ी व्यक्तित्व विशेषताओं से पाया गया है।

ब्लड प्रेशर (रक्तचाप) को दो पैमानों पर मापा जाता है। पहली यानी ऊपर की संख्या को ‘सिस्टोलिक’ ब्लड प्रेशर कहते हैं, जो दिल के धड़कने और शरीर में खून पंप होने के दौरान नसों के दबाव को दर्शाती है। वहीं, दूसरी यानी नीचे की संख्या ‘डायस्टोलिक’ ब्लड प्रेशर कहलाती है। यह उस समय का दबाव मापती है जब दिल दो धड़कनों के बीच आराम की स्थिति में होता है। हाल ही में हुए एक नए शोध में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि हमारे व्यक्तित्व पर सिस्टोलिक के मुकाबले डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर का असर कहीं अधिक हो सकता है।

शोधकर्ताओं ने जिस व्यक्तित्व गुण का अध्ययन किया, उसे “न्यूरोटिसिज्म” कहा जाता है। जिन लोगों में न्यूरोटिसिज्म का स्तर ज्यादा होता है, वे छोटी-छोटी बातों पर ज्यादा चिंता करते हैं, तनाव जल्दी लेते हैं, खुद पर संदेह करते हैं और नकारात्मक भावनाओं से जल्दी घिर जाते हैं। ऐसे लोग आलोचना को भी ज्यादा गंभीरता से लेते हैं और तनावपूर्ण परिस्थितियों से निपटने में उन्हें अधिक कठिनाई होती है। यही नहीं, ऐसे लोगों में आगे चलकर चिंता और अवसाद जैसी मानसिक समस्याओं का खतरा भी अधिक हो सकता है।

इस संबंध को समझने के लिए वैज्ञानिकों ने एक विशेष तकनीक का इस्तेमाल किया, जिसे “मेंडेलियन रैंडमाइजेशन” कहा जाता है। इस पद्धति में इंसानों के जीन का अध्ययन करके यह समझने की कोशिश की जाती है कि कोई संबंध वास्तव में कारण और परिणाम का है या सिर्फ संयोग है। वैज्ञानिकों ने ब्लड प्रेशर से जुड़े एक हजार से अधिक आनुवंशिक संकेतकों का विश्लेषण किया और यूरोपीय मूल के लोगों पर आधारित आठ बड़े अध्ययनों के आंकड़ों का अध्ययन किया।

शोध में यह सामने आया कि जिन लोगों का डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर अधिक था, उनमें न्यूरोटिसिज्म का स्तर भी ज्यादा देखने को मिला। यानी हाई ब्लड प्रेशर और नकारात्मक भावनाओं के बीच एक मजबूत संबंध पाया गया। हालांकि, शोध में यह स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला कि हाई ब्लड प्रेशर सीधे तौर पर चिंता या अवसाद का कारण बनता है। सबसे मजबूत संबंध केवल व्यक्तित्व के इस गुण यानी न्यूरोटिसिज्म के साथ देखा गया।

वैज्ञानिकों का मानना है कि लंबे समय तक हाई ब्लड प्रेशर रहने से दिमाग की छोटी-छोटी रक्त वाहिकाओं पर असर पड़ सकता है। इससे मस्तिष्क के वे हिस्से प्रभावित हो सकते हैं जो हमारी भावनाओं और तनाव को नियंत्रित करते हैं। दूसरी ओर, यह भी संभव है कि जो लोग पहले से ज्यादा तनावग्रस्त या चिंतित रहते हैं, उनमें समय के साथ ब्लड प्रेशर बढ़ने लगे। यानी दोनों स्थितियां एक-दूसरे को बढ़ावा दे सकती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस अध्ययन को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए। अभी अलग-अलग देशों और विभिन्न समुदायों के लोगों पर और अधिक शोध की जरूरत है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि अगर किसी व्यक्ति का ब्लड प्रेशर नियंत्रित कर दिया जाए तो क्या उसके व्यक्तित्व में भी बदलाव आएगा। लेकिन इतना जरूर है कि यह अध्ययन दिल और दिमाग के बीच के गहरे संबंध को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इसलिए अगर आप अपने दिल के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर रखना चाहते हैं, तो ब्लड प्रेशर को नियंत्रण में रखना बेहद जरूरी है। संतुलित आहार लें, नियमित व्यायाम करें, पर्याप्त नींद लें, धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं, तनाव कम करने की कोशिश करें और डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं लेते रहें।

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