Wednesday, 21 October 2026
BREAKING
• हसनपुर में 23 अक्टूबर को लगेगा कृषि मेला,पूर्व कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने लिया तैयारियों का जायजा • सामानांतर बिजली लाइसेंस के विरोध में एपीटीईएल में अपील करने की तैयारी में विभाग : अनिल विज • महान योद्धा, कुशल प्रशासक और न्यायप्रिय शासक रहे महाराजा शूरसैनी : नायब सिंह सैनी • हरियाणाः सूरजकुंड में 23 अक्टूबर से सजेगा दिवाली उत्सव, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी करेंगे मेले का शुभारंभ • पंजाब में नशे को लेकर गृह मंत्री शाह का आप सरकार पर हमला, बोले- राजनीतिक संरक्षण के बिना युवाओं तक नहीं पहुंच सकती चिट्टा • पंजाब में नशा-विरोधी कार्यकर्ता की हत्या के मामले की जांच करेगी सीबीआई - अमित शाह • पंजाब के सीएम भगवंत मान का अमित शाह पर तीखा हमला, बोले-घटिया राजनीति बंद करें • परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड को लेकर बिक्रम सिंह मजीठिया ने पंजाब सरकार को घेरा • मृतक की मां के लिए पेंशन और भतीजी को नौकरी की मांग, अमित शाह ने सहायता का दिया आश्वासन: परिजन • पंजाब में ड्रग्स के खिलाफ लड़ने वाले विक्रमजीत के परिवार से मिले अमित शाह, 15 मिनट तक की बात

राष्ट्रीय

वैश्विक ऊर्जा स्वतंत्रता दिवस: स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा ही भावी पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला

Updated on Friday, July 10, 2026 14:55 PM IST

मानव सभ्यता का इतिहास ऊर्जा के नए स्रोतों की खोज, उनके विकास और कुशल उपयोग की सतत यात्रा का इतिहास है। आग की खोज से आरंभ होकर कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, परमाणु ऊर्जा और अब नवीकरणीय (Renewable) ऊर्जा तक, प्रत्येक ऊर्जा स्रोत ने मानव जीवन, वैश्विक अर्थव्यवस्था और भू-राजनीतिक परिदृश्य को नई दिशा दी है। ऊर्जा केवल विकास का आधार नहीं, बल्कि किसी भी राष्ट्र की आर्थिक समृद्धि, सामरिक शक्ति और रणनीतिक स्वायत्तता का महत्वपूर्ण स्तंभ भी है। इसी महत्व को रेखांकित करने के लिए प्रत्येक वर्ष 10 जुलाई को ‘वैश्विक ऊर्जा स्वतंत्रता दिवस’ (Global Energy Independence Day) मनाया जाता है। यह दिवस महज़ एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि विश्व समुदाय के लिए ऊर्जा आत्मनिर्भरता, ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ एवं सतत विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। साथ ही, यह जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने, नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने और भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं हरित भविष्य सुनिश्चित करने का वैश्विक आह्वान भी है।

अतीत में ‘ऊर्जा स्वतंत्रता’ का अर्थ मुख्यतः यह माना जाता था कि कोई देश अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए पर्याप्त मात्रा में तेल, प्राकृतिक गैस और कोयले का घरेलू उत्पादन करे, ताकि उसे आयात पर निर्भर न रहना पड़े। पर 21वीं सदी में जलवायु परिवर्तन की बढ़ती चुनौती, ऊर्जा बाज़ार की अनिश्चितता तथा रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य-पूर्व में जारी तनाव जैसे भू-राजनीतिक संकटों ने इस अवधारणा को एक नया आयाम प्रदान किया है। आज ऊर्जा स्वतंत्रता की परिभाषा केवल जीवाश्म ईंधनों के घरेलू उत्पादन तक सीमित नहीं रह गई है। वास्तविक ऊर्जा स्वतंत्रता का अर्थ है जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता को क्रमिक रूप से समाप्त करते हुए सौर, पवन, जल, बायोमास और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे स्वच्छ, नवीकरणीय एवं टिकाऊ ऊर्जा स्रोतों के माध्यम से आत्मनिर्भर बनना। यह परिवर्तन केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में आवश्यक कदम नहीं है, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता, रणनीतिक स्वायत्तता और सतत विकास सुनिश्चित करने की वैश्विक आवश्यकता भी बन चुका है।

ऐतिहासिक संदर्भ और बदलता परिदृश्य
औद्योगिक क्रांति के बाद से वही देश महाशक्ति बना, जिसके पास ऊर्जा के बड़े स्रोत थे। 19वीं सदी में ब्रिटेन का दबदबा कोयले के कारण था, तो 20वीं सदी में अमेरिका और खाड़ी देशों का दबदबा तेल के कुओं की वजह से बढ़ा। 1973 का तेल संकट और सबक: जब अरब देशों ने तेल की आपूर्ति पर प्रतिबंध लगाया (OPEC Oil Crisis), तो पश्चिमी देशों की अर्थव्यवस्थाएं हिल गईं। तब अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने ‘प्रोजेक्ट इंडिपेंडेंस’ शुरू किया था। हालांकि, दशकों तक यह निर्भरता सिर्फ एक देश से दूसरे देश पर बदलती रही, लेकिन जीवाश्म ईंधन से पीछा नहीं छूटा।

डीकार्बोनाइजेशन (Decarbonization) का दौर: आज चुनौती सिर्फ सप्लाई की नहीं, बल्कि धरती के तापमान को 1.5∘C से अधिक बढ़ने से रोकने की भी है (पेरिस समझौता, 2015)। चूंकि वैश्विक कार्बन उत्सर्जन का 70% से ज्यादा हिस्सा ऊर्जा क्षेत्र से आता है, इसलिए आज की ऊर्जा स्वतंत्रता तीन स्तंभों पर टिकी है। ऊर्जा सुरक्षा: हर समय और सस्ती बिजली/ऊर्जा मिलना। पर्यावरणीय स्थिरता: नेट-जीरो (Net-Zero) यानी शून्य-कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य। आर्थिक संप्रभुता: बाहर से तेल खरीदने में खर्च होने वाले विदेशी मुद्रा भंडार को बचाना।

भू-राजनीति और ऊर्जा का नया संकट
ऊर्जा स्वतंत्रता का अर्थ केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह किसी भी देश की आर्थिक, सामरिक और राजनीतिक आत्मनिर्भरता का महत्वपूर्ण आधार है। जब तक कोई देश अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहता है, तब तक उसकी विदेश नीति, आर्थिक स्थिरता और राष्ट्रीय सुरक्षा बाहरी दबावों से प्रभावित होने का जोखिम बना रहता है। पारंपरिक ऊर्जा व्यवस्था मुख्य रूप से जीवाश्म ईंधनों जैसे कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और कोयले के आयात पर आधारित रही है। इस प्रकार की निर्भरता से ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव, आपूर्ति बाधित होने का खतरा, विदेशी मुद्रा पर दबाव तथा भू-राजनीतिक संकट जैसी चुनौतियां उत्पन्न होती हैं।

इसके विपरीत, आधुनिक ऊर्जा स्वतंत्रता का आधार नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत जैसे सौर, पवन, जल और जैव ऊर्जा हैं। इन संसाधनों के व्यापक उपयोग से देश अपनी स्थानीय ऊर्जा क्षमता विकसित कर सकते हैं, आयात पर निर्भरता कम कर सकते हैं, ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बना सकते हैं और जलवायु परिवर्तन से निपटने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। इस प्रकार ऊर्जा स्वतंत्रता न केवल राष्ट्रीय संप्रभुता को सुदृढ़ करती है, बल्कि सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

हथियार के रूप में ऊर्जा: रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद जब यूरोप को गैस की किल्लत झेलनी पड़ी, तो साफ हो गया कि ऊर्जा को एक राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके जवाब में यूरोप ने ‘REPowerEU’ योजना शुरू की ताकि वे रूस की गैस पर निर्भर न रहें। खनिजों की नई निर्भरता (स्वच्छ ऊर्जा एकाधिकार): जैसे-जैसे दुनिया सोलर पैनल, पवन टर्बाइन और इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की तरफ बढ़ रही है, निर्भरता का रूप बदल गया है। अब तेल के कुओं की जगह लिथियम, कोबाल्ट, निकेल और रेयर अर्थ एलिमेंट्स (दुर्लभ खनिज) ने ले ली है। आज इन खनिजों की प्रोसेसिंग और सोलर पैनल बनाने में चीन का लगभग 70% से 80% नियंत्रण है। अगर दुनिया ने इसके विकल्प नहीं खोजे, तो यह ‘हरित उपनिवेशवाद’ या एक नया एकाधिकार बन जाएगा।

आत्मनिर्भरता के प्रमुख साधन : नवीकरणीय ऊर्जा के स्तंभ
वास्तविक ऊर्जा स्वतंत्रता नीचे दिए गए प्रमुख स्रोतों के जरिए ही आ सकती है। सौर ऊर्जा (Solar Energy): सूर्य ऊर्जा का सबसे बड़ा और लोकतांत्रिक स्रोत है, जो किसी सीमा में नहीं बंधा। पिछले दशक में सोलर तकनीक की लागत 85% तक गिरी है। ‘रूफटॉप सोलर’ (छतों पर सोलर पैनल) के आने से आम नागरिक सिर्फ उपभोक्ता नहीं, बल्कि खुद बिजली बनाने वाला (Prosumer) बन गया है।

पवन ऊर्जा (Wind Energy): समंदर के किनारों और ऊंचे इलाकों में विशाल पवन टर्बाइन कम हवा में भी भारी बिजली बना रहे हैं। डेनमार्क, जर्मनी और ब्रिटेन इसके बेहतरीन उदाहरण हैं। हरित हाइड्रोजन (Green Hydrogen): भारी उद्योग (जैसे स्टील, सीमेंट, केमिकल) और हवाई जहाज या बड़े जहाजों को सिर्फ बैटरी से नहीं चलाया जा सकता। ऐसे कठिन क्षेत्रों (Hard-to-Abate sectors) के लिए हरित हाइड्रोजन सबसे बड़ा गेम-चेंजर है, जिसे नवीकरणीय बिजली की मदद से पानी से बनाया जाता है। परमाणु ऊर्जा (Nuclear Energy): यह बिना कार्बन फैलाए लगातार बिजली (Base-load power) देने का भरोसेमंद जरिया है। अब छोटे और सुरक्षित ‘लघु मॉड्यूलर रिएक्टर’ (SMRs) इस दिशा में क्रांति ला रहे हैं। जैव ऊर्जा (Bioenergy) और अपशिष्ट से ऊर्जा: कृषि अवशेषों, गोबर और कचरे से बायो-सीएनजी या पेट्रोल में इथेनॉल मिलाकर (Ethanol Blending) देश अपना आयात बिल कम कर रहे हैं और इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत हो रही है। अन्य उभरते स्रोत: समंदर की लहरों से बनने वाली ‘महासागरीय ऊर्जा’ (Tidal Energy) और पृथ्वी के भीतर की गर्मी से बनने वाली ‘भू-तापीय ऊर्जा’ (Geothermal Energy – जैसे आइसलैंड में) पर भी तेजी से काम चल रहा है।

आर्थिक लाभ और हरित रोजगार
यह बदलाव सिर्फ पर्यावरण के लिए नहीं, बल्कि देश की तिजोरी के लिए भी फायदेमंद है। राजकोषीय घाटे से मुक्ति: भारत जैसे विकासशील देश हर साल 100 बिलियन डॉलर से ज्यादा का कच्चा तेल आयात करते हैं। यह पैसा अगर देश में बचे, तो इसे शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे पर खर्च किया जा सकता है। रोजगार के नए मौके: जीवाश्म ईंधन उद्योगों में मशीनों का काम ज्यादा होता है, जबकि सोलर और विंड प्लांट लगाने, उनका रखरखाव करने और मैन्युफैक्चरिंग में बड़े पैमाने पर स्थानीय लोगों की जरूरत होती है। अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (IRENA) के अनुसार, इस क्षेत्र में वैश्विक रोजगार 2026 तक 1 मिलियन (1.5 करोड़) से पार हो चुका है।

तकनीकी चुनौतियां और उनके समाधान
नवीकरणीय ऊर्जा की राह में कुछ व्यावहारिक दिक्कतें भी हैं, जिन्हें तकनीक से सुधारा जा रहा है। सूरज-हवा की अनिरंतरता (Intermittency): सूरज हमेशा नहीं चमकता और हवा हमेशा नहीं चलती। इसके लिए बड़े पैमाने पर बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) और पंपयुक्त जल भंडारण का इस्तेमाल हो रहा है। अब लिथियम के अलावा सस्ती सोडियम-आयन और आयरन-एयर बैटरियों पर रिसर्च चल रही है। स्मार्ट ग्रिड की जरूरत: पुराने ग्रिड एकतरफा बिजली भेजने के लिए बने थे। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग से लैस ‘स्मार्ट ग्रिड’ की जरूरत है, जो मौसम और मांग का पहले से अंदाजा लगाकर ग्रिड को फेल होने से बचा सकें।

भारत की ऊर्जा स्वतंत्रता यात्रा: एक केस स्टडी
भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता है और इस बदलाव का नेतृत्व कर रहा है। भारत ने 2047 तक पूर्ण ऊर्जा स्वतंत्रता और 2070 तक नेट-जीरो का लक्ष्य रखा है। पंचामृत संकल्प (COP26) 2030 तक गैर-जीवाश्म (Non-fossil) ऊर्जा क्षमता को 500 GW तक पहुंचाना। 2030 तक अपनी आधी बिजली जरूरतें नवीकरणीय ऊर्जा से पूरी करना। 2030 तक कार्बन उत्सर्जन में 1 अरब टन की कमी करना और कार्बन तीव्रता को 45% घटाना। प्रमुख सरकारी पहलें- राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन: भारत को इस नए ईंधन का ग्लोबल हब बनाना। पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना व पीएम-कुसुम: करोड़ों घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाना और किसानों के पंपों को सौर ऊर्जा से जोड़ना। अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA): भारत और फ्रांस की पहल पर बना यह संगठन दुनिया भर में सौर ऊर्जा को बढ़ावा दे रहा है। भारत ने ‘वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड’ (OSOWOG) का सपना देखा है, ताकि पूरी दुनिया को एक ही ग्रिड से जोड़कर चौबीसों घंटे सौर बिजली साझा की जा सके।

वैश्विक सहयोग बनाम ऊर्जा राष्ट्रवाद
ऊर्जा स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं होना चाहिए कि देश आत्मकेंद्रित हो जाएं या तकनीकों को छुपाने लगें (ऊर्जा राष्ट्रवाद)। जलवायु परिवर्तन एक वैश्विक समस्या है, जिससे कोई भी देश अकेले नहीं लड़ सकता। सच्ची ऊर्जा स्वतंत्रता अलग-थलग रहने में नहीं, बल्कि आपसी सहयोग में है। विकसित देशों को अपनी ऐतिहासिक जिम्मेदारी मानते हुए विकासशील देशों को हर साल 100 बिलियन डॉलर का जलवायु वित्त (Climate Finance) और सस्ती दरों पर तकनीक देनी होगी। उदाहरण के लिए, अफ्रीका के पास दुनिया की सबसे अच्छी सौर क्षमता है, लेकिन वहां निवेश की कमी है। बिना ग्लोबल सहयोग के यह मिशन अधूरा रहेगा।

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का तेल बाजार पर दूरगामी प्रभाव
मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का सबसे अधिक असर वैश्विक कच्चे तेल बाजार पर पड़ा है, क्योंकि विश्व के तेल उत्पादन और निर्यात का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है। किसी भी सैन्य संघर्ष, समुद्री मार्गों पर खतरे या आपूर्ति बाधित होने की आशंका से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने लगती हैं। इससे परिवहन, उद्योग और ऊर्जा क्षेत्र की लागत बढ़ती है तथा वैश्विक महंगाई पर दबाव बनता है।

भारत अपनी कच्चे तेल की आवश्यकता का लगभग 85 प्रतिशत आयात करता है, इसलिए तेल कीमतों में वृद्धि का सीधा प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। आयात बिल बढ़ने से चालू खाते का घाटा और राजकोषीय दबाव बढ़ सकता है। इसके साथ ही पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और अन्य ईंधनों की लागत बढ़ने की आशंका रहती है, जिससे परिवहन और आवश्यक वस्तुओं के दाम प्रभावित हो सकते हैं।

हालांकि भारत ने रूस, अमेरिका, पश्चिम एशिया और अन्य देशों से तेल आयात के स्रोतों में विविधता लाकर जोखिम कम करने का प्रयास किया है, फिर भी लंबे समय तक तनाव बने रहने पर आर्थिक चुनौतियां बढ़ सकती हैं। ऐसे समय में रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार, ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

“नवीकरणीय ऊर्जा: विकल्प नहीं, आवश्यकता”
‘वैश्विक ऊर्जा स्वतंत्रता दिवस’ हमें यह याद दिलाता है कि तेल, गैस और कोयले जैसे जीवाश्म ईंधनों पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता ने सिर्फ पर्यावरण को ही नुकसान नहीं पहुंचाया, बल्कि दुनिया में कई भू-राजनीतिक तनाव, युद्ध और आर्थिक असमानताएं भी बढ़ाईं। वर्ष 2026 में दुनिया एक ऐसे दौर में पहुंच चुकी है, जहां नवीकरणीय ऊर्जा अब कोई विकल्प भर नहीं रही, बल्कि विकास की मुख्य धारा बनती जा रही है।

फिर भी, ऊर्जा परिवर्तन का यह सफर आसान नहीं है। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ते हुए उन लाखों लोगों की आजीविका भी सुरक्षित रहे, जो आज भी कोयला खदानों, ताप विद्युत संयंत्रों और जीवाश्म ईंधन से जुड़े उद्योगों में काम करते हैं। इसलिए दुनिया को ऐसे ‘न्यायसंगत ऊर्जा संक्रमण (Just Transition)’ की जरूरत है, जिसमें पर्यावरण संरक्षण और रोजगार दोनों के बीच संतुलन बना रहे।

आखिरकार, ऊर्जा स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ केवल बिजली पैदा करना नहीं, बल्कि हर घर, हर गांव और समाज के अंतिम व्यक्ति तक चौबीसों घंटे सस्ती, स्वच्छ और भरोसेमंद बिजली पहुंचाना है। जब हर नागरिक और हर देश ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर होगा, तभी एक सुरक्षित, समावेशी, टिकाऊ और समृद्ध भविष्य का निर्माण संभव होगा। यही वैश्विक ऊर्जा स्वतंत्रता दिवस का सबसे बड़ा संदेश भी है।

 

Have something to say? Post your comment
गृह मंत्री अमित शाह आज पंजाब में नशे के खिलाफ लड़ाई में जान गंवाने वालों के परिजनों से करेंगे मुलाकात

: गृह मंत्री अमित शाह आज पंजाब में नशे के खिलाफ लड़ाई में जान गंवाने वालों के परिजनों से करेंगे मुलाकात

प्रधानमंत्री मोदी ने RSS प्रमुख मोहन भागवत के संबोधन की प्रशंसा की, कहा- अत्यंत प्रेरणादायी

: प्रधानमंत्री मोदी ने RSS प्रमुख मोहन भागवत के संबोधन की प्रशंसा की, कहा- अत्यंत प्रेरणादायी

आतंकवाद के पूरे तंत्र को सामूहिक रूप से समाप्त करना जरूरी : एससीओ बैठक में राजनाथ सिंह

: आतंकवाद के पूरे तंत्र को सामूहिक रूप से समाप्त करना जरूरी : एससीओ बैठक में राजनाथ सिंह

राष्ट्रपति मुर्मु और उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने सभी भारतीयों को दी विजयादशमी की शुभकामनाएं

: राष्ट्रपति मुर्मु और उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने सभी भारतीयों को दी विजयादशमी की शुभकामनाएं

आरएसएस के स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्रियों ने दी शुभकामनाएं, हेडगेवार को किया याद

: आरएसएस के स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्रियों ने दी शुभकामनाएं, हेडगेवार को किया याद

पीएम मोदी ने विजयादशमी की बधाई दी, कहा- यह विजय पर्व हर किसी के संकल्प को नई शक्ति प्रदान करे

: पीएम मोदी ने विजयादशमी की बधाई दी, कहा- यह विजय पर्व हर किसी के संकल्प को नई शक्ति प्रदान करे

शिवराज सिंह चौहान ने लॉन्च किया एग्री वेलफेयर पोर्टल, डिजिटल सेवाओं तक आसान होगी पहुंच

: शिवराज सिंह चौहान ने लॉन्च किया एग्री वेलफेयर पोर्टल, डिजिटल सेवाओं तक आसान होगी पहुंच

एशियाई पैरा खेल 2026: सौम्या ने जीता स्वर्ण, राधा वेंकटेश को रजत; पीएम मोदी ने दी बधाई

: एशियाई पैरा खेल 2026: सौम्या ने जीता स्वर्ण, राधा वेंकटेश को रजत; पीएम मोदी ने दी बधाई

पुलिस स्मृति दिवस पर शहीदों को श्रद्धांजलि देंगे अमित शाह, ‘ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई’ के संदेश के साथ निकलेगी देशव्यापी मोटरसाइकिल रैली

: पुलिस स्मृति दिवस पर शहीदों को श्रद्धांजलि देंगे अमित शाह, ‘ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई’ के संदेश के साथ निकलेगी देशव्यापी मोटरसाइकिल रैली

एशियाई पैरा खेल 2026 में रिंकू हुड्डा को स्वर्ण, अजीत सिंह ने जीता रजत; पीएम मोदी ने दी बधाई

: एशियाई पैरा खेल 2026 में रिंकू हुड्डा को स्वर्ण, अजीत सिंह ने जीता रजत; पीएम मोदी ने दी बधाई

X