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स्वास्थ्य

सिर्फ मीठी चीजों में ही नहीं, इन पैक्ड फूड्स में भी छिपी होती है चीनी

Updated on Monday, July 20, 2026 16:43 PM IST

जब भी चीनी (शुगर) की बात होती है, तो सबसे पहले मिठाई, केक, चॉकलेट, आइसक्रीम या कोल्ड ड्रिंक का ख्याल आता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि चीनी सिर्फ मीठी चीजों में ही नहीं होती? कई ऐसे पैक्ड और रोजमर्रा के खाद्य पदार्थ हैं, जिनका स्वाद मीठा भी नहीं लगता, फिर भी उनमें अच्छी-खासी मात्रा में ऐडेड शुगर होता है।

दरअसल, हर चीनी एक जैसी नहीं होती। फलों, दूध और दही जैसी प्राकृतिक चीजों में जो चीनी होती है, उसे नेचुरल शुगर कहा जाता है। यह शरीर के लिए नुकसानदायक नहीं मानी जाती, क्योंकि इन खाद्य पदार्थों में फाइबर, विटामिन, मिनरल और दूसरे जरूरी पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं। दूसरी ओर, प्रोसेस्ड या पैक्ड फूड में जो चीनी अलग से मिलाई जाती है, उसे ऐडेड शुगर कहा जाता है। यही चीनी जरूरत से ज्यादा खाने पर मोटापा, डायबिटीज, हृदय रोग और कई दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ा सकती है।

चीनी का इस्तेमाल सिर्फ स्वाद बढ़ाने के लिए ही नहीं, बल्कि कई और कारणों से भी किया जाता है। इससे खाने की बनावट बेहतर होती है, रंग और स्वाद अच्छा बनते हैं और कई बार यह प्रिजर्वेटिव की तरह काम करके खाद्य पदार्थ की शेल्फ लाइफ भी बढ़ा देती है। यही वजह है कि पास्ता सॉस, केचप या सलाद ड्रेसिंग जैसी नमकीन चीजों में भी चीनी मिलाई जाती है।

खाने में ऐडेड शुगर की मात्रा जानने के लिए सबसे आसान तरीका है न्यूट्रिशन लेबल पढ़ना। आजकल ज्यादातर पैक्ड फूड पर 'टोटल शुगर' और 'ऐडेड शुगर' दोनों की जानकारी दी जाती है।

मान लीजिए किसी पैकेट पर लिखा है कि उसमें 20 ग्राम टोटल शुगर है और 15 ग्राम ऐडेड शुगर। इसका मतलब है कि सिर्फ 5 ग्राम चीनी प्राकृतिक रूप से मौजूद है, जबकि बाकी 15 ग्राम अलग से मिलाई गई है।

सिर्फ इतना ही नहीं, पैकेट पर दिए गए इंग्रीडिएंट्स भी ध्यान से पढ़ें। अगर सूची की शुरुआत में ही चीनी या उससे जुड़े नाम लिखे हों, तो समझिए उस उत्पाद में चीनी की मात्रा ज्यादा हो सकती है।

चीनी हमेशा 'शुगर' नाम से नहीं लिखी होती। कई लोग यही सोचकर धोखा खा जाते हैं कि अगर पैकेट पर 'शुगर' नहीं लिखा है तो उसमें चीनी नहीं होगी। जबकि कंपनियां चीनी के लिए कई अलग-अलग नाम इस्तेमाल करती हैं। जैसे- केन शुगर, कॉर्न सिरप, हाई फ्रक्टोज कॉर्न सिरप, राइस सिरप, मोलासेस, कैरेमल, हनी, अगावे आदि। इसके अलावा जिन शब्दों के अंत में '-ओज' आता है, जैसे ग्लूकोज, फ्रक्टोज, सुक्रोज, डेक्सट्रोज, माल्टोज और लैक्टोज, वे भी किसी न किसी रूप में शुगर ही हैं। अगर किसी उत्पाद पर ग्लेज्ड, कैंडीड, कैरेमलाइज्ड या फ्रॉस्टेड जैसे शब्द लिखे हों, तो इसका मतलब भी अक्सर उसमें अतिरिक्त चीनी मिलाई गई है।

आजकल बाजार में 'शुगर फ्री' या 'जीरो शुगर' लिखे कई उत्पाद मिलते हैं। इनमें अक्सर सुक्रालोज, एस्पार्टेम, सैकरीन या स्टीविया जैसे जीरो-कैलोरी स्वीटनर का इस्तेमाल किया जाता है। ये ब्लड शुगर को बहुत कम प्रभावित करते हैं और सीमित मात्रा में इनका इस्तेमाल सुरक्षित माना जाता है।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि ऐसे सभी उत्पाद पूरी तरह से हेल्दी हैं। कई शुगर-फ्री पैक्ड फूड में स्वाद और बनावट बनाए रखने के लिए दूसरी प्रोसेस्ड चीजें मिलाई जाती हैं। कुछ लोगों में इन स्वीटनर के ज्यादा सेवन से पेट फूलना या दस्त जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे हैं, जिनमें लोग चीनी होने की उम्मीद ही नहीं करते, लेकिन उनमें ऐडेड शुगर काफी हो सकती है। केचप, बारबेक्यू सॉस, पास्ता सॉस और सलाद ड्रेसिंग में अक्सर अतिरिक्त चीनी मिलाई जाती है। इसी तरह कई प्रोटीन बार और फ्लेवर्ड योगर्ट में भी जरूरत से ज्यादा शुगर होती है। इन्हें खरीदते समय कोशिश करें कि उनमें प्रोटीन की मात्रा, शुगर से ज्यादा हो।

चॉकलेट, वनीला या स्ट्रॉबेरी फ्लेवर वाले दूध और कॉफी क्रीमर में भी अतिरिक्त चीनी हो सकती है। वहीं ग्रेनोला, इंस्टेंट ओटमील और कई ब्रेकफास्ट सीरियल्स को भी मीठा बनाने के लिए चीनी या शहद मिलाया जाता है। डिब्बाबंद फल, जैम, फ्रूट प्रिजर्व और यहां तक कि पीनट बटर, बादाम बटर या काजू बटर में भी कई बार अतिरिक्त चीनी डाली जाती है।

पेय पदार्थों की बात करें तो सॉफ्ट ड्रिंक ही नहीं, बल्कि स्पोर्ट्स ड्रिंक, एनर्जी ड्रिंक, बोतलबंद कॉफी, आइस्ड टी और कई पैक्ड जूस भी चीनी से भरपूर हो सकते हैं। इनकी जगह सादा पानी, बिना चीनी वाली चाय या कॉफी और बिना चीनी वाला स्पार्कलिंग वॉटर बेहतर विकल्प हैं।

अगर आपकी पसंदीदा चीजों में थोड़ी-बहुत ऐडेड शुगर है, तो इसका मतलब यह नहीं कि आपको उन्हें पूरी तरह छोड़ देना चाहिए। आप उसकी मात्रा का ध्यान रखें।

 

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