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राष्ट्रीय

अनुच्छेद 370 हटने के 7 साल पूरे: पश्चिम पाकिस्तानी से आए शरणार्थियों ने 5 अगस्त को बताया 'आजादी का पर्व'

Updated on Wednesday, August 05, 2026 11:59 AM IST

सांबा : जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के 7 साल पूरे होने पर सांबा में पश्चिमी पाकिस्तान से आकर बसे शरणार्थियों ने इसे 'आजादी के त्योहार' के रूप में मनाया। उन्होंने कहा कि संवैधानिक बदलावों की वजह से उन्हें समान अधिकार और लंबे इंतजार के बाद पहचान मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने 5 अगस्त-2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाया। इसके साथ ही, राष्ट्रपति के आदेश के जरिए जम्मू-कश्मीर राज्य का विशेष दर्जा खत्म कर दिया गया। पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थी कार्य समिति के अध्यक्ष लांबा राम गांधी ने कहा कि 5 अगस्त 2019 उनके जीवन में एक ऐतिहासिक तारीख बन गई, क्योंकि इसने उन्हें वे अधिकार और पहचान हासिल करने में मदद की, जिनकी वे दशकों से मांग कर रहे थे।


लांबा राम गांधी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "5 अगस्त 2019 पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थी परिवारों के लिए 'सोने पर सुहागा' जैसा था। पिछले 75 सालों से यह समुदाय जम्मू-कश्मीर में नागरिकता और समान अधिकारों का इंतजार कर रहा था, जो अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाने के बाद संभव हो पाया। पूरे देश के लिए 5 अगस्त का महत्व उतना ही है जितना 15 अगस्त का। इसीलिए हमारा समुदाय हर साल इस दिन को त्योहार के रूप में मनाता है और भविष्य में भी इस परंपरा को जारी रखेगा।"


5 अगस्त को 'काला दिवस' बताने वाले राजनीतिक दलों और नेताओं पर लांबा राम गांधी ने कहा, "ऐसी बातें शरणार्थी समुदाय की भावनाओं को नहीं दर्शाती हैं और ये बातें राजनीतिक कारणों से कही जा रही हैं।"
गांधी ने कहा, "यह व्यक्तिगत राय हो सकती है, लेकिन मेरा समुदाय इससे सहमत नहीं है। वोट बैंक की राजनीति से प्रेरित कुछ राजनीतिक दल लोगों को यह कहकर गुमराह कर रहे हैं कि अनुच्छेद 370 और 35ए को बहाल किया जाएगा, जबकि वे जानते हैं कि यह असंभव है। इन दलों के पास कोई और मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वे लोगों को गुमराह करने के लिए यह मुद्दा उठा रहे हैं।"


उन्होंने आगे कहा कि इस साल के जश्न की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और समुदाय इस मौके को पिछले सालों की तरह ही उत्साह, भव्यता और त्योहार के जोश के साथ मनाएगा।
पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थी कार्य समिति के एक और सदस्य रमेश सिंह ने कहा कि 5 अगस्त 2019 को हुए संवैधानिक बदलावों से पहले उनके समुदाय के लोग कई अधिकारों और मौकों से वंचित थे। रमेश सिंह ने कहा, "आर्टिकल 370 हटने के बाद समुदाय में नया उत्साह आया और रोजगार के मौके मिलने लगे। उनके लिए 5 अगस्त किसी राष्ट्रीय त्योहार से कम नहीं है और वे हर साल इसे बहुत उत्साह के साथ मनाते हैं।"


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आभार जताते हुए उन्होंने दोनों नेताओं को पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थी समुदाय के अधिकार बहाल करने के लिए धन्यवाद दिया।
5 अगस्त को 'काला दिवस' मानने वाली राजनीतिक पार्टियों पर प्रतिक्रिया देते हुए रमेश सिंह ने कहा कि ऐसे बयानों का शरणार्थी समुदाय की भावनाओं पर कोई असर नहीं पड़ता। उन्होंने कहा, "ऐसे बयानों का उनके समुदाय पर कोई असर नहीं पड़ता। कोई इसे काला दिवस कहे या कुछ और, 5 अगस्त उनके लिए सम्मान और खुशी का दिन है। समुदाय के सदस्य ढोल-नगाड़ों और जश्न के साथ इस मौके को मनाएंगे और इसे खुशी के त्योहार के तौर पर मनाते रहेंगे।"


बता दें कि 1950 में लागू होने पर आर्टिकल 370 भारत के संविधान का हिस्सा बना। 5 अगस्त 2019 को इस प्रावधान को बेअसर किया गया और साथ ही, जम्मू-कश्मीर को दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेशों - जम्मू-कश्मीर और लद्दाख - में पुनर्गठित किया गया, जिससे इसका पुराना संवैधानिक दर्जा खत्म हो गया।

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