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स्वास्थ्य

स्तन कैंसर के लक्षित उपचार में मददगार हो सकते हैं प्रकाश-सक्रिय नैनोरोबोट

Updated on Thursday, August 06, 2026 11:37 AM IST

शोधकर्ताओं ने एक उन्नत, प्रकाश-सक्रिय बहुक्रियाशील नैनोरोबोट विकसित किया है, जो स्तन कैंसर के लक्षित उपचार में मददगार हो सकता है। यह नैनोरोबोट निकट-अवरक्त (NIR) प्रकाश की मदद से सक्रिय होकर कैंसर कोशिकाओं तक लक्षित तरीके से पहुंचने और फोटोथर्मल तथा फोटोडायनामिक थेरेपी के जरिए उन्हें नष्ट करने में सक्षम है। शोधकर्ताओं ने इसका प्रभाव कोशिकीय मॉडल और स्तन ट्यूमर वाले चूहों में प्रदर्शित किया है।

पारंपरिक उपचार में गैर-विशिष्ट दवा वितरण बड़ी चुनौती
स्तन कैंसर दुनियाभर में महिलाओं में कैंसर से होने वाली मौत के प्रमुख कारणों में शामिल है। पारंपरिक कीमोथेरेपी में गंभीर दुष्प्रभाव, दवा प्रतिरोध और स्वस्थ ऊतकों को नुकसान जैसी चुनौतियां सामने आती हैं। गैर-विशिष्ट दवा वितरण, ट्यूमर के भीतर दवा की सीमित पहुंच और उपचार के बाद सक्रिय नियंत्रण का अभाव इसकी प्रमुख सीमाओं में शामिल हैं।

नैनोमेडिसिन में सक्रिय नियंत्रण की जरूरत
वर्तमान नैनोमेडिसिन तकनीकें काफी हद तक निष्क्रिय ट्यूमर-लक्ष्यीकरण पर निर्भर करती हैं, जिसके कारण ऊतकों में दवाओं की पैठ और उनके स्थानिक नियंत्रण की क्षमता सीमित हो सकती है। वहीं, कई प्रकाश-संचालित माइक्रो और नैनोरोबोटों को पराबैंगनी या दृश्य प्रकाश की जरूरत होती है, जिसकी ऊतकों में पैठ सीमित होती है और स्वस्थ ऊतकों को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है।

NIR प्रकाश से नियंत्रित नैनोरोबोट विकसित
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के स्वायत्त संस्थान, मोहाली स्थित नैनो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (INST) के वैज्ञानिकों ने नैनोरोबोटिक्स को फोटोथेरेपी के साथ जोड़कर ऐसा चिकित्सीय प्लेटफॉर्म विकसित करने की दिशा में काम किया, जिसे बाहरी प्रकाश की मदद से सक्रिय रूप से नियंत्रित किया जा सके।

UCNP आधारित नैनोबोट में फोटोटैक्सिस क्षमता
डॉ. जिबन ज्योति पांडा के नेतृत्व में और डॉ. संतोष के. गुप्ता (BARC, मुंबई) के सहयोग से टीम ने अपकनवर्जन नैनोपार्टिकल (UCNP) आधारित नैनोबोट विकसित किए। टीम में प्रथम लेखक स्वप्निल श्रीवास्तव के साथ अनु बलहारा, पंकज खर्रा और ज्योति यादव शामिल रहे। ये नैनोबोट निकट-अवरक्त प्रकाश को प्रभावी ढंग से ऊष्मा में परिवर्तित कर सकते हैं और NIR प्रकाश की मौजूदगी में दिशात्मक गति प्रदर्शित करते हैं।

फोटोसेंसिटाइजर से कैंसर कोशिकाओं पर हमला
शोधकर्ताओं ने नैनोबोट को फोटोसेंसिटाइजर से सक्रिय किया, जिससे NIR विकिरण के संपर्क में आने पर प्रतिक्रियाशील ऑक्सीजन प्रजातियां (ROS) उत्पन्न हो सकें। नैनोबोट ने NIR प्रकाश की दिशा में सक्रिय गति यानी फोटोटैक्सिस भी प्रदर्शित की। इससे उपचार को लक्षित स्थान तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।

फोलिक एसिड से स्तन कैंसर कोशिकाओं की पहचान
नैनोबोट की सतह को फोलिक एसिड से क्रियाशील किया गया। इससे फोलेट रिसेप्टर्स की अधिकता वाली स्तन कैंसर कोशिकाओं की चयनात्मक पहचान और लक्ष्यीकरण संभव हुआ। शोधकर्ताओं के अनुसार, इससे ट्यूमर-विशिष्ट फोटोथेरेप्यूटिक प्रभाव बढ़ाने में मदद मिली।

980 एनएम NIR लेजर से पैदा होती है तापमान प्रवणता

980 एनएम NIR लेजर के संपर्क में आने पर नैनोबोट में मौजूद पॉलीडोपामीन स्थानीय ताप उत्पन्न करता है, जिससे तापमान प्रवणता बनती है। यह तापीय गति को प्रेरित करती है और नैनोबोट फोटोटैक्सिस के माध्यम से लेजर स्रोत की दिशा में सक्रिय रूप से बढ़ते हैं।

फोटोथर्मल और फोटोडायनामिक प्रभाव एक साथ
NIR विकिरण से उत्पन्न फोटोथर्मल प्रभाव और फोटोसेंसिटाइजर के जरिए बनने वाली प्रतिक्रियाशील ऑक्सीजन प्रजातियां मिलकर कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने में मदद करती हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, इन संयुक्त प्रभावों ने अकेले उपचार विधियों की तुलना में ट्यूमर नियंत्रण में बेहतर परिणाम दिखाए।

कोशिकीय मॉडल और चूहों में प्रदर्शित हुआ प्रभाव
शोध टीम ने विकसित नैनोबोट की चिकित्सीय क्षमता का परीक्षण कोशिकीय मॉडल के साथ-साथ स्तन ट्यूमर वाले चूहों में भी किया। परिणामों ने इस तकनीक को लक्षित और स्थानीयकृत कैंसर फोटोथेरेपी के संभावित मंच के रूप में सामने रखा है।

ACS Applied Materials & Interfaces में प्रकाशित शोध
जर्नल ACS Applied Materials & Interfaces में प्रकाशित इस अध्ययन में ईंधन-मुक्त, NIR-प्रतिक्रियाशील नैनोबोट का वर्णन किया गया है। यह जैविक रूप से अनुकूल NIR विकिरण के तहत सक्रिय प्रकाश-निर्देशित गति (फोटोटैक्सिस) को फोलिक एसिड-मध्यस्थ कैंसर कोशिका पहचान के साथ जोड़ता है। इसकी गतिविधि लेजर तीव्रता, pH और ग्लूटाथियोन की सांद्रता जैसे कारकों से प्रभावित होती है।

सटीक और कम आक्रामक उपचार की संभावना
शोधकर्ताओं के अनुसार, नैनोरोबोट की लक्षित गति, कैंसर कोशिकाओं की चयनात्मक पहचान तथा फोटोथर्मल और फोटोडायनामिक प्रभावों का संयोजन स्तन ट्यूमर के स्थानीयकृत उपचार के लिए एक संभावित नई रणनीति प्रस्तुत करता है। हालांकि, इस तकनीक को मानवों में नियमित कैंसर उपचार के रूप में इस्तेमाल करने से पहले आगे के शोध और नैदानिक परीक्षण आवश्यक होंगे।

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