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स्वास्थ्य

लघु वज्रासन रोज करें, सांस गहरी होगी और शरीर बनेगा लचीला

Updated on Friday, August 14, 2026 11:18 AM IST

योग हमारी प्राचीन संस्कृति का अभिन्न अंग है, जो साधक को मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत करता है। योग के इन्हीं आसनों में से एक महत्वपूर्ण आसन है 'लघु वज्रासन'। यह आसन पाचन तंत्र, रीढ़ की हड्डी और मानसिक एकाग्रता के लिए बहुत लाभकारी माना जाता है। लघु वज्रासन संस्कृत के तीन शब्दों से बना है: लघु (छोटा, हल्का, कोमल), वज्र (बिजली, हीरा, इंद्र का वज्र) और आसन (मुद्रा)। अंग्रेजी में इस आसन को लिटिल थंडरबोल्ट पोज कहते हैं।


इस आसन को करने के दौरान शरीर पीछे की तरफ मुड़ता है। इसमें छाती को बहुत ज्यादा खोलना पड़ता है, जांघों की मांसपेशियों में गहरा खिंचाव आता है और सिर को शरीर के पीछे जमीन के पास लाने के लिए कंधे और गर्दन की ताकत चाहिए होती है। नाम में भले ही "लघु" यानी छोटा लगा हो, लेकिन शारीरिक रूप से यह बिल्कुल भी आसान नहीं है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, लघु वज्रासन एक उन्नत पीठ झुकाने वाली योग मुद्रा है, जो रीढ़ की हड्डी और पीठ के लचीलेपन के लाभदायक है। यह जांघों, कूल्हों, छाती, हाथों, गर्दन और कंधों की मांसपेशियों को असरदार तरीके से स्ट्रेच और मजबूत करता है, जिससे रीढ़ की हड्डी में लचीलापन और मूवमेंट की रेंज बढ़ती है। यह आसन छाती और डायाफ्राम को खोलता है, जिससे गहरी सांस लेने में आसानी होती है।


इस आसन को करने के लिए सबसे पहले सामान्य वज्रासन की स्थिति में बैठ जाएं। इसके बाद घुटनों के बल खड़े हो जाएं। धीरे-धीरे पीछे की ओर झुकें और सिर के ऊपरी हिस्से को जमीन या तलवों की तरफ रखने का प्रयास करें। अपने हाथों से पैरों के घुटनों या टखनों को पकड़कर संतुलन बनाए रखें। इस अवस्था में सामान्य गति से सांस लेते रहें।
घुटनों, टखनों या कमर में गंभीर दर्द होने पर इस आसन से बचें। यह एक कठिन और उन्नत आसन है, इसलिए इसे शुरुआती दौर में किसी विशेषज्ञ योग गुरु की देखरेख में ही करें।

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