Saturday, 17 October 2026
BREAKING
• सरकार के दो सालः सड़क, पेयजल, उद्योग और निवेश से हरियाणा के विकास को गति देने पर जोर- नायब सिंह सैनी • त्योहारों पर महंगाई की मार, आम आदमी की थाली से लेकर रसोई तक बिगड़ा बजट : सैलजा • बोनस देकर किसान-आढ़तियों को हुए नुकसान की भरपाई करे सरकार : भूपेंद्र सिंह हुड्डा • पंजाब भाजपा ने 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू की, नशा, भ्रष्टाचार और अपराध को बनाएगी बड़ा मुद्दा • सुनील जाखड़ ने अमित शाह को लिखा पत्र, पंजाब की जेलों से चल रहे ड्रग्स कारोबार की एनआईए-ईडी जांच की मांग • झोटा हत्याकांड में सचिन पायलट और गुरजीत औजला ने 'मान सरकार' को घेरा, कानून व्यवस्था पर उठाए सवाल • परिवार से मिलने पहुंचे SGPC प्रधान, परविंदर झोटा को लेकर किया बड़ा ऐलान • पंजाब में CBI की जांच तेज! OSD राजबीर घुम्मन के बाद अब इन 6 लोगों से होगी पूछताछ, समन जारी • पंजाब में चुनाव आयोग की हलचल तेज! कब होंगे विधानसभा चुनाव, पढ़ें पूरी खबर • Ludhiana: सतलुज नदी में गैर-कानूनी माइनिंग पर सख्त Action, मामला दर्ज

मनोरंजन

जसरंगी जुगलबंदी से हवेली संगीत तक, पंडित जसराज ने संगीत की दुनिया में किए 3 बड़े नवाचार

Updated on Sunday, August 16, 2026 17:47 PM IST

पंडित जसराज का जन्म 28 जनवरी, 1930 को हरियाणा के पीली मंदोरी गांव में एक ऐसे परिवार में हुआ, जिसकी चार पीढ़ियां संगीत को समर्पित थीं लेकिन बचपन में ही त्रासदी ने उनके दरवाजे पर दस्तक दे दी। 24 अप्रैल 1934 को, जब जसराज मात्र चार वर्ष के थे, तो उनके पिता पंडित मोतीराम का निधन हो गया।

पिता के साये के बिना उन्होंने अपने बड़े भाइयों (पंडित मणिराम और पंडित प्रताप नारायण) की छत्रछाया में मेवाती घराने की गायकी की साधना शुरू की। अपनी कला को निखारने के लिए वे प्रतिदिन 14 घंटे तक रियाज करते थे। यह वह समय था जब उन्होंने अपनी गायकी में 'भाव' और 'भक्ति' का ऐसा अद्भुत संगम किया, जो आगे चलकर उनकी पहचान बना।

अपने युवाकाल में वे गुजरात के साणंद गए, जहां उनकी मुलाकात महाराज जयवंत सिंह वाघेला से हुई, जहां महाराज वाघेला ने उनके सांगीतिक ज्ञान को निखारा। पंडित जसराज के पेशेवर सफर का सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया जब 1952 में, केवल 22 वर्ष की आयु में उन्होंने काठमांडू में नेपाल के राजा त्रिभुवन बीर बिक्रम शाह के दरबार में अपना पहला गायन प्रस्तुत किया। उस ऐतिहासिक दिन जब उन्होंने 'राग मुल्तानी' में अपनी प्रस्तुति दी, तो राजा इतने प्रसन्न हुए कि उन्होंने इस युवा गायक को 5,000 स्वर्ण मुद्राएं इनाम में देने की घोषणा कर दी। पंडित जसराज ने एक साक्षात्कार में बताया था कि इतनी बड़ी घोषणा सुनकर वह पसीने से तर-ब-तर हो गए थे।

उनकी आवाज की पहुंच साढ़े तीन सप्तकों तक थी, जिसके कारण उनके गायन में एक ऐसा जादुई खिंचाव था जो प्रकृति और वन्यजीवों को भी मोह लेता था।

संगीत में 'साढ़े तीन सप्तकों' का अर्थ गायक या वादक की कुल स्वर सीमा से है, जिसमें तीन पूरे सप्तक (मंद्र, मध्य और तार) और चौथे (अति तार या अति मंद्र) सप्तक के आधे स्वर शामिल होते हैं। यह कुल 42 सुरों (स्वर-स्थानों) की सीमा को दर्शाता है, जो एक असाधारण और व्यापक स्वर विस्तार माना जाता है।

ऐसा कहा जाता है कि 1996 में वाराणसी के संकट मोचन मंदिर में एक सुबह लगभग 6 बजे जब वे 5,000 से अधिक श्रोताओं के सामने 'राग तोड़ी' गा रहे थे, तो एक हिरण दौड़ता हुआ आया और मंच के पास आकर उनके गायन से मंत्रमुग्ध होकर खड़ा हो गया था।

पंडित जसराज की गायकी केवल संगीत के व्याकरण तक सीमित नहीं थी। मेवाती घराने से ताल्लुक रखने के बावजूद उन्होंने अपनी गायकी में 'कण-गायकी' और मींड का ऐसा उपयोग किया, जिसने शास्त्रीय संगीत की परिभाषा को अधिक सुरीला और भावपूर्ण बना दिया।

उन्होंने संगीत में कई नवाचार किए। जसरंगी जुगलबंदी प्राचीन मूर्च्छना पर आधारित है, जिसमें पुरुष-महिला एक साथ अलग-अलग राग जैसे नट भैरव और मधुवंती गाते हैं। यह आवाज की प्राकृतिक पिच बचाती है और शिव-शक्ति का अहसास देती है। 'हवेली संगीत' को मंदिरों से निकालकर वैश्विक मंचों तक पहुंचाया, जिससे यह लोकप्रिय अर्ध-शास्त्रीय विधा बनी। 'कण-गायकी' और 'मींड-प्रधान', अलंकृत शैली है जिसमें सूफी-भक्ति रस है और ख्याल गायकी को श्रोताओं के लिए अधिक भावनात्मक, सुलभ और आध्यात्मिक बना दिया।

शास्त्रों और रागों की इसी गहरी समझ के साथ, उन्होंने भारतीय सिनेमा में भी अपनी आवाज का जादू बिखेरा। उन्होंने वी. शांताराम (जिनकी बेटी मधुरा शांताराम से उन्होंने विवाह किया) की फिल्म 'लड़की सह्याद्रि की' (1966) में 'राग अहीर भैरव' पर आधारित 'वंदना करो अर्चना करो राग' गाया। इसके अलावा उन्होंने 'बीरबल माय ब्रदर' (1973) में पंडित भीमसेन जोशी के साथ जुगलबंदी की, और आधुनिक सिनेमा में फिल्म '1920' (2008) के गीत 'वादा तुमसे है वादा' और 'लाइफ ऑफ पाई' (2012) में भी अपनी आवाज दी।

शास्त्रीय संगीत को आम जनमानस तक पहुंचाने वाले पंडित जसराज को भारत सरकार ने पद्म श्री, पद्म भूषण और वर्ष 2000 में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से अलंकृत किया। अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ (आईएयू) ने 11 नवंबर, 2006 को मंगल और बृहस्पति ग्रहों के बीच खोजे गए एक क्षुद्रग्रह का नाम उनके सम्मान में 'पंडित जसराज' रखा। इस आकाशीय पिंड का आधिकारिक नंबर 300128 है, जो पंडित जसराज की जन्म तिथि 28/01/1930 का ठीक उल्टा क्रम (28/01/30) है। इस खगोलीय सम्मान के साथ वे मोजार्ट और बीथोवेन जैसे विश्व-प्रसिद्ध संगीत दिग्गजों के विशेष क्लब में शामिल होने वाले पहले भारतीय संगीतकार बन गए।

अपने पिता और भाई की स्मृति में उन्होंने पंडित मोतीराम पंडित मणिराम संगीत समारोह की शुरुआत की, जो हर साल 30 नवंबर को हैदराबाद के चौमहल्ला पैलेस में आयोजित किया जाता है। अपने जीवन के अंतिम क्षणों तक, यहां तक कि कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान भी ऑनलाइन माध्यम से अमेरिका से अपने शिष्यों को संगीत की शिक्षा देते रहे।

उन्होंने 17 अगस्त 2020 को न्यू जर्सी, अमेरिका में अपनी अंतिम सांस ली। उनके शरीर का मुंबई में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उनकी महान विरासत को सहेजने और भारतीय संगीत को वैश्विक पटल पर ले जाने के उद्देश्य से, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी 92वीं जयंती के अवसर पर 28 जनवरी, 2022 को 'पंडित जसराज कल्चरल फाउंडेशन' का शुभारंभ किया।

 

Have something to say? Post your comment
'अक्का' का टीजर रिलीज, गैंगस्टर वर्ल्ड में दिखेगी दो महिलाओं की जंग

: 'अक्का' का टीजर रिलीज, गैंगस्टर वर्ल्ड में दिखेगी दो महिलाओं की जंग

27वीं सालगिरह पर श्रीराम नेने ने किया माधुरी को विश, बोले- तुम आज भी मेरी फेवरेट हो

: 27वीं सालगिरह पर श्रीराम नेने ने किया माधुरी को विश, बोले- तुम आज भी मेरी फेवरेट हो

एकता कपूर के 'हिंदूफोबिया' बयान का पूनम पांडे ने किया समर्थन, बोलीं- मेरे धर्म को मेरे काम से मत जोड़ो

: एकता कपूर के 'हिंदूफोबिया' बयान का पूनम पांडे ने किया समर्थन, बोलीं- मेरे धर्म को मेरे काम से मत जोड़ो

रजनीकांत की 'जेलर 2' देखकर रितेश देशमुख हुए मंत्रमुग्ध, बोले-

: रजनीकांत की 'जेलर 2' देखकर रितेश देशमुख हुए मंत्रमुग्ध, बोले- "सुपरस्टारडम का दूसरा नाम ही रजनी सर है"

‘रामायण’ के ट्रेलर लॉन्च पर रॉकिंग स्टार यश ने दिखाई रावण की दमदार झलक, बेंगलुरु में सजा सितारों का मेला!

: ‘रामायण’ के ट्रेलर लॉन्च पर रॉकिंग स्टार यश ने दिखाई रावण की दमदार झलक, बेंगलुरु में सजा सितारों का मेला!

एकता कपूर के 'हिंदूफोबिया' वाले बयान पर संतों का समर्थन, बोले- 'फिल्मों में हिंदू धर्म को गलत तरीके से दिखाया गया'

: एकता कपूर के 'हिंदूफोबिया' वाले बयान पर संतों का समर्थन, बोले- 'फिल्मों में हिंदू धर्म को गलत तरीके से दिखाया गया'

हनी सिंह को महाराष्ट्र साइबर ने पूछताछ के लिए बुलाया, 22 अक्टूबर तक समय देने से किया इनकार

: हनी सिंह को महाराष्ट्र साइबर ने पूछताछ के लिए बुलाया, 22 अक्टूबर तक समय देने से किया इनकार

'जिंदादिल, हंसमुख और सबको खुश कर देने वालीं हेमा मालिनी', सायरा बानो ने एक्ट्रेस के जन्मदिन पर सुनाया मजेदार किस्सा

: 'जिंदादिल, हंसमुख और सबको खुश कर देने वालीं हेमा मालिनी', सायरा बानो ने एक्ट्रेस के जन्मदिन पर सुनाया मजेदार किस्सा

जब मीका सिंह ने अमिताभ बच्चन के घर भिजवा दिया बड़ा सा पियानो, बिग बी बोले- 'मुझे बजाना भी नहीं आता'

: जब मीका सिंह ने अमिताभ बच्चन के घर भिजवा दिया बड़ा सा पियानो, बिग बी बोले- 'मुझे बजाना भी नहीं आता'

फिल्म रिव्यू: यामी गौतम की 'नई नवेली' में कॉमेडी, मिस्ट्री और एक्शन का तड़का, क्लाइमैक्स कर देगा हैरान

: फिल्म रिव्यू: यामी गौतम की 'नई नवेली' में कॉमेडी, मिस्ट्री और एक्शन का तड़का, क्लाइमैक्स कर देगा हैरान

X