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स्वास्थ्य

शरीर और दिमाग के लिए फायदेमंद रोना, तनाव घटाने से लेकर आंखों की सफाई तक, जानें आंसुओं के फायदे

Updated on Wednesday, August 26, 2026 12:31 PM IST

रोते हुए किसी को देखकर हम अक्सर मान लेते हैं कि वह बहुत कमजोर है या अपनी इमोशन्स को संभाल नहीं पा रहा। खासकर बचपन से हमें कई बार कहा जाता है कि 'रोओ मत, मजबूत बनो', लेकिन सच यह है कि रोने से शरीर और मन पर इसके कुछ अच्छे असर भी हो सकते हैं। जब इंसान बहुत ज्यादा परेशान या तनाव में होता है, तो उसका शरीर भी इसका असर महसूस करता है।

दिल तेजी से धड़कता है, बेचैनी बढ़ती है और दिमाग में एक ही बात बार-बार घूमती रहती है। ऐसे समय में रो लेने के बाद कई लोगों को कुछ राहत महसूस होती है। इसका एक कारण यह है कि रोने के दौरान हम अपने अंदर छिपी भावनाओं को बाहर आने देते हैं। इससे मन पर बना दबाव कुछ कम महसूस हो सकता है।

तनाव के बाद शरीर को शांत करने में मदद करता है रोना- वैज्ञानिकों के मुताबिक, जब हम तनाव में होते हैं, तो शरीर का 'स्ट्रेस सिस्टम' सक्रिय हो जाता है। दिल की धड़कन बढ़ सकती है, मांसपेशियों में खिंचाव आता है और दिमाग लगातार परेशान करने वाली बातों के बारे में सोचता रहता है। भावनात्मक रूप से रोने के बाद कुछ लोगों में शरीर के शांत होने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम शरीर को आराम की स्थिति में वापस लाने में भूमिका निभाता है।

इमोशन्स को बाहर निकालने का तरीका हैं आंसू- कई बार हम किसी बात से बहुत परेशान होते हैं, लेकिन उसे शब्दों में समझा नहीं पाते। ऐसी स्थिति में रोना इमोशन्स को जाहिर करने का एक स्वाभाविक तरीका बन जाता है। किसी भरोसेमंद व्यक्ति के सामने रोने से बातचीत शुरू हो सकती है और सामने वाला यह समझ सकता है कि हम अंदर से परेशान हैं। इस तरह आंसू कभी-कभी लोगों के बीच भावनात्मक जुड़ाव बढ़ाने का काम भी करते हैं।

अब सवाल आता है कि रोने के बाद मन हल्का क्यों लगता है?, दरअसल, भावनात्मक रोने के दौरान शरीर में कई तरह की प्रक्रियाएं चलती हैं। कुछ शोधों में पाया गया है कि रोने के बाद लोगों को शांत और भावनात्मक रूप से बेहतर महसूस होता है। इसका एक कारण यह भी हो सकता है कि व्यक्ति कुछ देर के लिए अपनी भावनाओं को दबाने के बजाय उन्हें स्वीकार करता है। आंसुओं में तनाव के हार्मोन निकलते हैं और इसी वजह से तनाव खत्म हो जाता है, जिससे नींद आसानी से आ जाती है।

आंखों के लिए आंसू बेहद जरूरी हैं। वे आंखों की सतह को नम रखते हैं और पलक झपकने के साथ आंखों पर एक पतली परत बनाए रखते हैं। यही परत आंखों को सूखने से बचाने और बाहरी कणों को हटाने में मदद करती है। धूल या किसी जलन पैदा करने वाली चीज के आंख में जाने पर अचानक आंसू आना भी शरीर की सुरक्षा प्रक्रिया का हिस्सा है। हालांकि लगातार आंखों से पानी आना किसी दूसरी समस्या का संकेत भी हो सकता है।

कभी-कभार रोना बिल्कुल सामान्य है। लेकिन अगर किसी व्यक्ति को रोज या बहुत बार रोने का मन करता है, वह खुद को रोक नहीं पाता और इसका असर उसके काम, रिश्तों या रोज की जिंदगी पर पड़ने लगा है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करना मददगार हो सकता है।

 

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