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बड़ी खबर : Haryana में एनालॉग पनीर पर एक साल की रोक, जानिए सैनी सरकार ने क्यों लिया बड़ा फैसला

Updated on Friday, August 28, 2026 21:04 PM IST

चंडीगढ़ : हरियाणा में पनीर के नाम पर बिक रहे ऐसे उत्पादों के खिलाफ सरकार ने बड़ा कदम उठाया है, जिनमें दूध की वसा की जगह वनस्पति या अन्य गैर-दुग्ध वसा का इस्तेमाल किया जा रहा है। राज्य सरकार ने एनालॉग और गैर-डेयरी पनीर के निर्माण से लेकर बिक्री तक पर एक साल के लिए रोक लगा दी है। यह प्रतिबंध निर्धारित खाद्य मानकों के अनुरूप तैयार किए गए असली पनीर पर लागू नहीं होगा।

खाद्य सुरक्षा आयुक्त डॉ. मनोज कुमार ने खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 की धारा 30(2)(क) के तहत यह आदेश जारी किया है। 17 अगस्त को जारी आदेश को 21 अगस्त को हरियाणा सरकार के राजपत्र में प्रकाशित किया गया। सरकार ने यह फैसला व्यापक नमूनाकरण और जांच में सामने आए चिंताजनक परिणामों के बाद लिया है।

285 नमूनों में 200 गैर-अनुरूप
सरकारी जांच में सामने आया कि प्रदेश में पनीर और डेयरी एनालॉग की गुणवत्ता को लेकर स्थिति गंभीर है। एक अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच 285 नमूने लिए गए। प्राथमिक प्रयोगशाला जांच में इनमें से 200 नमूने, यानी करीब 70 प्रतिशत, निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए।

इनमें 171 नमूने निम्नस्तरीय, जबकि 29 नमूने असुरक्षित पाए गए। जांच के दौरान कई नमूनों में वसा की संरचना भी निर्धारित मानकों से अलग मिली। रिपोर्टों में ऐसे संकेत मिले कि दूध में स्वाभाविक रूप से मौजूद नहीं होने वाली वनस्पति अथवा अन्य बाहरी वसा का इस्तेमाल किया गया या दुग्ध वसा को उसके स्थान पर बदला गया। सरकारी और अधिसूचित प्रयोगशालाओं की रिपोर्ट में भी कई नमूनों में गैर-दुग्ध वसा पाए जाने की पुष्टि हुई।

किसी भी नाम से बिक्री पर प्रतिबंध
सरकार के आदेश की खास बात यह है कि एनालॉग या गैर-डेयरी पनीर को किसी भी नाम से बाजार में बेचने पर रोक रहेगी। प्रतिबंध केवल तैयार उत्पाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी पूरी सप्लाई चेन को इसके दायरे में रखा गया है।
इसके तहत निर्माण, प्रसंस्करण, तैयारी, पैकिंग, भंडारण, परिवहन, वितरण, थोक और खुदरा बिक्री तथा बिक्री के लिए पेश करने पर एक वर्ष तक रोक रहेगी। यानी निर्माता से लेकर कारोबारी और विक्रेता तक इस व्यवस्था के तहत जवाबदेह होंगे।
सरकार के अनुसार एनालॉग या गैर-डेयरी पनीर ऐसा उत्पाद है जो दिखने में पनीर जैसा हो सकता है, लेकिन उसमें दूध की वसा या दुग्ध ठोस को पूरी तरह अथवा आंशिक रूप से वनस्पति तेल, वनस्पति वसा या अन्य गैर-दुग्ध पदार्थों से बदल दिया गया हो।

असली पनीर में वनस्पति वसा की अनुमति नहीं
राजपत्र में स्पष्ट किया गया है कि पनीर एक मानकीकृत खाद्य पदार्थ है और इसमें दुग्ध वसा आवश्यक घटक है। पनीर में वनस्पति तेल, वनस्पति वसा अथवा किसी अन्य गैर-दुग्ध वसा को मिलाकर दूध की वसा को बदलने की अनुमति नहीं है।

इसलिए सरकार का आदेश असली और निर्धारित मानकों पर खरे उतरने वाले पनीर के कारोबार पर रोक नहीं लगाता। इसका लक्ष्य मुख्य रूप से उन गैर-मानकीकृत डेयरी एनालॉग उत्पादों पर कार्रवाई करना है, जिन्हें पनीर के विकल्प के रूप में इस्तेमाल या बेचा जा रहा है।

होटल-रेस्तरां भी आए कार्रवाई के दायरे में
सरकार ने इस मामले में केवल पनीर निर्माता और दुकानदारों को ही नहीं, बल्कि होटल, रेस्तरां, कैटरर, भोजनालय और क्लाउड किचन को भी दायरे में लिया है। ये प्रतिष्ठान एनालॉग या गैर-डेयरी पनीर का इस्तेमाल किसी व्यंजन में नहीं कर सकेंगे। न ही इसे तैयार, परोस, स्टोर या बेच सकेंगे। सरकार की चिंता यह भी है कि कई खाद्य प्रतिष्ठानों में असली पनीर की जगह एनालॉग पनीर का इस्तेमाल किया जा रहा था, लेकिन इसकी जानकारी ग्राहक को नहीं दी जाती थी।

ऐसे मामलों में मेन्यू कार्ड, बिल अथवा सूचना-पट्ट पर यह स्पष्ट नहीं किया जाता था कि व्यंजन में वास्तविक डेयरी पनीर के बजाय कोई अन्य उत्पाद इस्तेमाल किया गया है। इससे उपभोक्ता को यह भ्रम हो सकता था कि उसे असली पनीर से तैयार भोजन दिया जा रहा है।
बिना लेबल और बिल के कारोबार पर भी सवाल
सरकार ने खुले एनालॉग पनीर की आपूर्ति को लेकर भी गंभीर चिंता जताई है। कई मामलों में ऐसे उत्पाद मूल पैकिंग, आवश्यक लेबल, बिल, बैच पहचान और स्रोत से जुड़े पर्याप्त दस्तावेजों के बिना परिवहन, भंडारण और बिक्री के लिए पहुंच रहे थे।
प्रशासन के सामने सबसे बड़ी समस्या ऐसे उत्पाद के स्रोत की पहचान को लेकर थी। दस्तावेजों के अभाव में यह पता लगाना कठिन हो जाता है कि उत्पाद कहां तैयार हुआ, किसने सप्लाई किया और इसकी गुणवत्ता के लिए कौन जिम्मेदार है।

लगातार निगरानी के बावजूद सुधार नहीं
सरकार ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि लगभग एक वर्ष तक लगातार नमूनाकरण, निगरानी, प्रवर्तन कार्रवाई और जागरूकता अभियान चलाए गए। इसके बावजूद गैर-अनुरूप पनीर के मामलों में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
लगातार निगरानी के बाद भी गैर-अनुरूप नमूनों का अनुपात करीब 70 प्रतिशत बने रहने को सरकार ने गंभीर स्थिति माना। इसके बाद यह निष्कर्ष निकाला गया कि मौजूदा नमूनाकरण और लेबलिंग व्यवस्था इस प्रथा पर प्रभावी नियंत्रण के लिए पर्याप्त नहीं है।

मानकों के अनुरूप असली पनीर की बिक्री जारी रहेगी
आदेश के बाद उपभोक्ताओं के बीच यह सवाल उठ सकता है कि क्या हर तरह के पनीर की बिक्री बंद हो जाएगी। ऐसा नहीं है। निर्धारित मानकों के अनुरूप असली पनीर की बिक्री पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।सामान्य अथवा पूर्ण वसा वाले पनीर में अधिकतम 60 प्रतिशत नमी और शुष्क पदार्थ के आधार पर कम से कम 50 प्रतिशत दुग्ध वसा निर्धारित है। इसे खुला या पैक दोनों रूपों में बेचा जा सकता है।

वहीं मध्यम वसा वाले पनीर में शुष्क पदार्थ के आधार पर दुग्ध वसा 20 प्रतिशत से अधिक लेकिन 50 प्रतिशत से कम होनी चाहिए। कम वसा वाले पनीर में यह मात्रा 20 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। मध्यम और कम वसा वाला पनीर निर्धारित घोषणा के साथ केवल सीलबंद पैकेट में बेचा जा सकता है।

कुछ मानकीकृत उत्पाद प्रतिबंध से बाहर
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि आदेश सभी डेयरी उत्पादों पर लागू नहीं होगा। फ्रोजन डेजर्ट, प्रोसेस्ड चीज और मिक्स्ड फैट स्प्रेड जैसे मानकीकृत उत्पाद, जिनके लिए अलग-अलग खाद्य मानक अधिसूचित हैं, इस आदेश के दायरे में नहीं आएंगे।

उल्लंघन पर जब्ती और नष्ट करने की कार्रवाई
एक साल की यह रोक केवल प्रशासनिक निर्देश नहीं है, बल्कि खाद्य सुरक्षा कानून के तहत लागू की गई है। आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम की धारा 24, 50, 51, 52, 53, 55 और 59 सहित संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

जरूरत पड़ने पर संबंधित खाद्य पदार्थ को कानून के मुताबिक जब्त कर नष्ट भी किया जा सकेगा। सरकार के इस फैसले से जहां नकली या गैर-मानकीकृत पनीर के कारोबार पर शिकंजा कसने की तैयारी है, वहीं आने वाले समय में खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी और प्रवर्तन कार्रवाई की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाएगी।

 

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