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हरियाणा

हरियाणा में कचरे से पैदा होगी 50 मेगावाट बिजली, चार इंटीग्रेटेड वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर

Updated on Saturday, August 29, 2026 19:58 PM IST

गुड़गांव : हरियाणा में शहरी कचरा प्रबंधन की दिशा में एक बड़ी पहल करते हुए राज्य सरकार ने चार इंटीग्रेटेड वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट स्थापित करने के लिए समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। हिसार, अंबाला, फरीदाबाद और गुरुग्राम क्लस्टर में स्थापित होने वाले इन संयंत्रों में संचालन शुरू होने पर प्रतिदिन कुल 5 हजार टन कचरे का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण किया जाएगा और इससे कुल 50 मेगावाट ऊर्जा का उत्पादन होगा। इन संयंत्रों के अक्टूबर 2028 तक शुरू होने की उम्मीद है।


नूंह में एमओयू होने के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि ये समझौते प्रदेश के शहरों को स्वच्छ, स्वस्थ और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं। इन संयंत्रों की स्थापना ऑयल ग्रीन एनर्जी लिमिटेड द्वारा की जाएगी, जो ऑयल इंडिया लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी हरियाणा के शहरी विकास को नई ऊर्जा देने के साथ-साथ प्रदेश में कचरा प्रबंधन के तौर-तरीकों में भी बड़ा बदलाव लाएगी। इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) राव इंद्रजीत सिंह, विकास एवं पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार, उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह, शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा, शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल मंत्री, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा, ऑयल इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. रंजीत रथ,शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आयुक्त एवं सचिव अशोक मीणा सहित कई गणमान्य मौजूद थे।


मुख्यमंत्री ने कहा कि बढ़ते शहरीकरण के साथ कचरे के उचित प्रबंधन की चुनौती भी लगातार बढ़ रही है। कचरा केवल समस्या नहीं है, बल्कि सही तकनीक और वैज्ञानिक व्यवस्था के माध्यम से इसे ऊर्जा और उपयोगी संसाधन में बदला जा सकता है। इसी सोच को धरातल पर उतारते हुए प्रदेश में चार एकीकृत कचरा-से-ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण शुरुआत की गई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को स्वच्छ भारत का संकल्प देने के साथ ही ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की दिशा में नई सोच दी है। हरियाणा भी इसी सोच के साथ आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि शहरों में कचरे के ढेर न लगें, खुले में कचरा डालने और उसके अवैज्ञानिक निपटान की प्रवृत्ति कम हो तथा आधुनिक तकनीक के माध्यम से कचरे का वैज्ञानिक निपटान सुनिश्चित किया जाए। यह पहल इसी संकल्प को और मजबूत करेगी।

हिसार क्लस्टर में प्रतिदिन 500 टन कचरे से बनेगी ऊर्जा
मुख्यमंत्री ने बताया कि पहला इंटीग्रेटेड वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट हिसार क्लस्टर में स्थापित किया जाएगा। इसमें हिसार, हांसी, फतेहाबाद और जींद जिलों के शहरी स्थानीय निकाय शामिल होंगे। इस प्लांट में प्रतिदिन 500 टन कचरे का प्रसंस्करण किया जाएगा और इससे न्यूनतम 5 मेगावाट ऊर्जा उत्पादन अपेक्षित है।


अंबाला क्लस्टर में 900 टन कचरे का होगा प्रतिदिन प्रसंस्करण
दूसरा प्लांट अंबाला क्लस्टर में स्थापित किया जाएगा, जिसमें अंबाला, यमुनानगर और पंचकूला जिलों के शहरी स्थानीय निकाय शामिल होंगे। यहां प्रतिदिन 900 टन कचरे का प्रसंस्करण किया जाएगा और न्यूनतम 9 मेगावाट ऊर्जा उत्पादन अपेक्षित है।


फरीदाबाद में 1,600 टन कचरे से न्यूनतम 16 मेगावाट ऊर्जा का उत्पादन
तीसरा प्लांट फरीदाबाद क्लस्टर में स्थापित होगा, जिसमें फरीदाबाद जिला शामिल होगा। इस संयंत्र में प्रतिदिन 1,600 टन कचरे का प्रसंस्करण किया जाएगा और इससे न्यूनतम 16 मेगावाट ऊर्जा उत्पादन की उम्मीद है।

गुरुग्राम में लगेगा सबसे अधिक क्षमता वाला संयंत्र, प्रतिदिन 2 हजार टन कचरे का होगा प्रसंस्करण
चौथा संयंत्र गुरुग्राम क्लस्टर में स्थापित किया जाएगा, जिसमें गुरुग्राम जिला शामिल होगा। यहां प्रतिदिन 2 हजार टन कचरे का प्रसंस्करण किया जाएगा और न्यूनतम 20 मेगावाट ऊर्जा उत्पादन अपेक्षित है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चारों संयंत्रों में संचालन शुरू होने के समय प्रतिदिन कुल 5 हजार टन कचरे का प्रसंस्करण किया जाएगा और कुल 50 मेगावाट ऊर्जा का उत्पादन होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि ये संयंत्र अपनी संभावित समय-सीमा के अनुसार अक्टूबर 2028 तक चालू हो जाएंगे। एक ओर प्रतिदिन हजारों टन कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटारा होगा, वहीं दूसरी ओर उसी कचरे से ऊर्जा का उत्पादन भी किया जाएगा। जिस कचरे को आज समस्या के रूप में देखा जाता है, उसे ऊर्जा और उपयोगी संसाधन में बदलना ही ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की सोच है।

आधुनिक तकनीक से होगा अलग-अलग प्रकार के कचरे का प्रसंस्करण
नायब सिंह सैनी ने कहा कि इन संयंत्रों की विशेषता केवल इनकी क्षमता नहीं, बल्कि इनमें अपनाई जाने वाली एकीकृत और आधुनिक तकनीक भी है। यहां अलग-अलग प्रकार के कचरे के अनुसार उसका उचित प्रसंस्करण किया जाएगा। सबसे पहले कचरे का पूर्व-प्रसंस्करण होगा। गीले कचरे से बायोगैस तैयार करने के लिए कंप्रेस्ड बायोगैस संयंत्र की व्यवस्था होगी। वहीं, ऐसे सूखे कचरे को, जिसका दोबारा उपयोग या रिसाइकल नहीं किया जा सकता, वेस्ट-टू-एनर्जी संयंत्र में प्रसंस्कृत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस पूरी व्यवस्था का उद्देश्य केवल कचरे को जलाना नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और टिकाऊ तरीके से उसका प्रसंस्करण करना तथा कचरे को जलाने की प्रक्रिया को न्यूनतम करना है। राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि पर्यावरण की सुरक्षा के साथ किसी प्रकार का समझौता न हो और इन संयंत्रों में सर्वोच्च पर्यावरणीय मानकों का पालन किया जाए।

‘अर्बन चैलेंज फंड’ के तहत मिलेगी वित्तीय सहायता
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन संयंत्रों की स्थापना के लिए की गई वित्तीय व्यवस्था केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग तथा भागीदारी का एक अच्छा उदाहरण है। परियोजनाओं को भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के ‘अर्बन चैलेंज फंड’ के तहत वित्तीय सहायता मिलेगी। उन्होंने बताया कि परियोजनाओं की कुल पूंजीगत लागत का 25 प्रतिशत केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। 25 प्रतिशत राशि राज्य सरकार और शहरी स्थानीय निकायों द्वारा साझा की जाएगी, जबकि शेष 50 प्रतिशत राशि ऑयल ग्रीन एनर्जी लिमिटेड द्वारा लगाई जाएगी। इस प्रकार केंद्र सरकार, राज्य सरकार, स्थानीय निकाय और सार्वजनिक क्षेत्र की एक मजबूत संस्था मिलकर हरियाणा के शहरों को स्वच्छ और आधुनिक बनाने के इस अभियान को आगे बढ़ाएंगे।

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के अनुरूप स्थापित होंगे संयंत्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन संयंत्रों की स्थापना भारत सरकार द्वारा अधिसूचित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के अनुरूप की जाएगी। इन नियमों का उद्देश्य भी कचरे का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन सुनिश्चित करना और उसका अधिकतम उपयोग करना है। नायब सिंह सैनी ने कहा कि स्वच्छता केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। सरकार व्यवस्था और सुविधाएं उपलब्ध करा सकती है, आधुनिक संयंत्र लगा सकती है और वैज्ञानिक तकनीक ला सकती है, लेकिन घरों और संस्थाओं से निकलने वाले कचरे को अलग-अलग रखना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। सरकार की व्यवस्था, आधुनिक तकनीक और जनता की भागीदारी एक साथ जुड़ती हैं, तभी स्वच्छता का अभियान वास्तविक रूप में जनआंदोलन बनता है।


उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि हरियाणा के शहर केवल बड़े और आधुनिक ही नहीं, बल्कि स्वच्छ, स्वस्थ, सुंदर और पर्यावरण की दृष्टि से सुरक्षित भी हों। सरकार ऐसा हरियाणा बनाना चाहती है, जहां कचरे के ढेर प्रदेश की पहचान न हों, बल्कि कचरे से बनने वाली ऊर्जा उपलब्धि बने; जहां कचरा बोझ नहीं, बल्कि संसाधन बने और स्वच्छता केवल अभियान नहीं, बल्कि जीवनशैली बने। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि केंद्र सरकार, राज्य सरकार, शहरी स्थानीय निकायों और ऑयल ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के सामूहिक प्रयासों से ये परियोजनाएं समयबद्ध और प्रभावी तरीके से आगे बढ़ेंगी। उन्होंने आह्वान किया कि हरियाणा को स्वच्छता, वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने के लिए सभी मिलकर कार्य करें। उन्होंने कहा कि सरकार कचरे को समस्या से समाधान, बोझ से संसाधन और संपदा में बदलने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इससे शहरों को स्वच्छ बनाने के साथ ऊर्जा के नए स्रोत विकसित होंगे और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, स्वस्थ और आत्मनिर्भर हरियाणा के निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा।

 

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