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हरियाणा

मिड-डे-मील फर्जीवाड़े पर शिक्षा विभाग की बड़ी कार्रवाई, रजिस्टर, ऐप और पोर्टल पर हाजिरी में मिला अंतर तो नपेंगे स्कूल प्रमुख

Updated on Sunday, August 30, 2026 18:55 PM IST

राजकीय स्कूलों में मिड-डे-मील के लाभार्थी विद्यार्थियों की हाजिरी में होने वाली गड़बड़ी और फर्जीवाड़े पर शिक्षा निदेशालय ने सख्ती बढ़ा दी है। अब कक्षा पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों की दैनिक उपस्थिति की डिजिटल और मैनुअल स्तर पर निगरानी होगी। स्कूल में रखे जाने वाले हाजिरी रजिस्टर के साथ-साथ पीएम पोषण एप और एमआईएस पोर्टल पर दर्ज रिकॉर्ड का मिलान किया जाएगा। तीनों जगह दर्ज संख्या में अंतर मिलने पर संबंधित विद्यालय मुखिया की जवाबदेही तय होगी।

शिक्षा निदेशालय ने मिड-डे-मील यानी पीएम पोषण योजना को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए विस्तृत निगरानी व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत कक्षा अध्यापक, मिड-डे-मील इंचार्ज और स्कूल मुखिया की जिम्मेदारियां निर्धारित की गई हैं। वहीं, खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) और डिप्टी डीईओ को भी नियमित जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

कक्षा अध्यापक से लेकर स्कूल मुखिया तक तय होगी जिम्मेदारी
नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक कक्षा के अध्यापक को प्रतिदिन विद्यार्थियों की उपस्थिति दर्ज करनी होगी। इसके बाद उपस्थित विद्यार्थियों की कुल संख्या मिड-डे-मील इंचार्ज को बताई जाएगी। संबंधित कक्षा अध्यापक के हस्ताक्षर के बाद मिड-डे-मील इंचार्ज रजिस्टर में विद्यार्थियों की उपस्थिति का कुल योग दर्ज करेगा।

इसके बाद विद्यालय मुखिया के हस्ताक्षर लिए जाएंगे। यही रिकॉर्ड पीएम पोषण एप पर विद्यार्थियों की उपस्थिति अपडेट करने का आधार बनेगा। साथ ही एमआईएस पोर्टल पर लॉगिन करके प्रत्येक विद्यार्थी की व्यक्तिगत उपस्थिति भी दर्ज करनी होगी। निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि स्कूल मुखिया को यह सुनिश्चित करना होगा कि रजिस्टर, पीएम पोषण एप और एमआईएस पोर्टल पर दर्ज विद्यार्थियों की संख्या में किसी प्रकार का अंतर न हो।

हर ब्लॉक में रोजाना कम से कम पांच स्कूलों की जांच
सिर्फ स्कूल स्तर पर रिकॉर्ड तैयार करने के बजाय विभागीय अधिकारियों के स्तर पर भी इसकी क्रॉस चेकिंग की जाएगी। निदेशालय के निर्देशों के अनुसार प्रत्येक बीईओ अपने ब्लॉक में प्रतिदिन रैंडम आधार पर कम से कम पांच स्कूलों का चयन करेंगे।इन स्कूलों से मिड-डे-मील हाजिरी रजिस्टर की प्रति मंगवाकर उसकी जांच की जाएगी। रजिस्टर की प्रति पर संबंधित विद्यालय मुखिया के हस्ताक्षर होना अनिवार्य होगा। इस प्रक्रिया का उद्देश्य स्कूलों में दर्ज वास्तविक उपस्थिति और मिड-डे-मील के लिए दर्शाई गई संख्या के बीच किसी भी संभावित अंतर को पकड़ना है।

डिप्टी डीईओ भी करेंगे अलग से निगरानी
निगरानी को और मजबूत करने के लिए सभी डिप्टी डीईओ को भी प्रतिदिन रैंडम आधार पर पांच स्कूलों का चयन करने के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित स्कूलों के मिड-डे-मील हाजिरी रजिस्टर की प्रति मंगवाकर उसकी जांच की जाएगी। इस तरह एक ही दिन में ब्लॉक और जिला स्तर के अधिकारियों द्वारा अलग-अलग स्कूलों के रिकॉर्ड की जांच की जा सकेगी। विभाग का मानना है कि नियमित और रैंडम जांच से हाजिरी में मनमानी अथवा फर्जी आंकड़े दर्ज करने की संभावना को कम किया जा सकेगा।

डिजिटल रिकॉर्ड पर भी रहेगी विभाग की नजर
निदेशालय ने केवल रजिस्टर की जांच तक निगरानी व्यवस्था को सीमित नहीं रखा है। पीएम पोषण एप पर प्रतिदिन अपडेट होने वाली विद्यार्थियों की उपस्थिति की भी नियमित समीक्षा की जाएगी। डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर स्कूलों में विद्यार्थियों की उपस्थिति और मिड-डे-मील व्यवस्था की निगरानी की जाएगी।

एमआईएस पोर्टल पर दर्ज व्यक्तिगत उपस्थिति और पीएम पोषण एप पर दर्ज संख्या के बीच भी मिलान किया जाएगा। यदि दोनों डिजिटल रिकॉर्ड अथवा डिजिटल रिकॉर्ड और मैनुअल रजिस्टर में अंतर मिलता है तो इसकी जांच की जाएगी।

लापरवाही मिली तो स्कूल मुखिया होंगे जवाबदेह
शिक्षा निदेशालय ने स्कूल मुखियाओं को स्पष्ट हिदायत दी है कि विद्यार्थियों की उपस्थिति तीनों माध्यमों—एमआईएस पोर्टल, पीएम पोषण एप और हाजिरी रजिस्टर—में प्रतिदिन सही और समान रूप से दर्ज होनी चाहिए।
नई व्यवस्था में स्कूल मुखिया की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रखी गई है। रिकॉर्ड में त्रुटि, लापरवाही या किसी तरह की अनियमितता सामने आने पर विद्यालय मुखिया की जिम्मेदारी निर्धारित की जाएगी। इसके साथ ही कक्षा अध्यापक और मिड-डे-मील इंचार्ज की भूमिका भी रिकॉर्ड के आधार पर जांच के दायरे में रहेगी।
निदेशालय की यह व्यवस्था मिड-डे-मील योजना में लाभार्थी विद्यार्थियों की वास्तविक संख्या सुनिश्चित करने के साथ सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

 

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