हरियाणा में 39.89 लाख बीपीएल परिवारों की आय के ग्राम सभाओं के जरिए सत्यापन की सरकारी कवायद शुरू होते ही सरकार के सामने नया पेच खड़ा हो गया है। ग्राम सचिवों की आपत्ति ने उस पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसे सरकार पारदर्शिता और पात्र परिवारों को उनका हक दिलाने के नाम पर चला रही है। हरियाणा कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बिना जमीनी सर्वे के केवल ग्राम सभा में नाम और आय पढ़कर सत्यापन कराना गरीबों के साथ मजाक है राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार ने 39.89 लाख बीपीएल परिवारों की सूची तैयार तो कर दी, लेकिन जब वास्तविक स्थिति जांचने की बारी आई तो जिम्मेदारी ग्राम सभाओं पर डाल दी गई। ग्राम सचिवों का यह कहना कि उनके पास केवल नाम और फैमिली आईडी है और परिवार की वास्तविक आय, मकान, जमीन तथा संसाधनों की जानकारी नहीं है, सरकारी व्यवस्था की तैयारियों की पोल खोलता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस परिवार की आर्थिक स्थिति का मौके पर सर्वे ही नहीं हुआ, उसकी आय का फैसला ग्राम सभा में बैठे लोग आखिर किस आधार पर करेंगे? गांवों में एक ही नाम के कई व्यक्ति होने और कई परिवारों को ग्रामीणों द्वारा व्यक्तिगत रूप से न पहचानने की स्थिति में गलत सत्यापन की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि सरकार को पहले पांच सदस्यीय कमेटी बनाकर घर-घर सर्वे और दस्तावेजों की जांच करानी चाहिए। इसके बाद रिपोर्ट ग्राम सभा में रखी जाए। तभी यह प्रक्रिया वास्तविक सत्यापन कहलाएगी। केवल कागज पर प्रक्रिया पूरी करके सरकार अपनी पीठ थपथपाती है तो इसका खामियाजा गरीब परिवारों को भुगतना पड़ सकता है।
13.50 लाख परिवार छह महीने में सूची से बाहर, अब फिर जांच का सवाल राव नरेंद्र सिंह ने बीपीएल सूची में हुए बड़े बदलाव को भी सरकार के सामने सवाल की तरह रखा। अक्टूबर 2024 में विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश में करीब 52.50 लाख बीपीएल परिवार थे, जबकि अगले छह महीनों में करीब 13.50 लाख परिवार सूची से बाहर हो गए। सरकार का तर्क रहा कि परिवारों ने स्वयं अपनी आय घोषित की थी। उन्होंने कहा कि यदि पहले से उपलब्ध परिवार पहचान पत्र के आंकड़ों के आधार पर इतनी बड़ी संख्या में परिवारों की पात्रता बदली गई, तो अब ग्राम सभा में सत्यापन कराने से पहले यह भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए कि कितने परिवारों की आय किस आधार पर बदली गई और कितने परिवारों को किस आधार पर बीपीएल सूची से बाहर किया गया। 1.60 लाख शिकायतें, 39.89 लाख परिवार—जवाबदेही किसकी? सरकार के अनुसार करीब 1.60 लाख परिवारों की कम आय संबंधी शिकायतों का निपटारा ग्राम सभाओं में किया जाना है। पहले चरण की ग्राम सभाएं अक्टूबर तक पूरी होनी हैं। इसके लिए 6,258 पंचायतों में 4,299 फील्ड ऑफिसर्स की तैनाती की गई है।