Sunday, 18 October 2026
BREAKING
• सरकार के दो सालः सड़क, पेयजल, उद्योग और निवेश से हरियाणा के विकास को गति देने पर जोर- नायब सिंह सैनी • त्योहारों पर महंगाई की मार, आम आदमी की थाली से लेकर रसोई तक बिगड़ा बजट : सैलजा • बोनस देकर किसान-आढ़तियों को हुए नुकसान की भरपाई करे सरकार : भूपेंद्र सिंह हुड्डा • पंजाब भाजपा ने 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू की, नशा, भ्रष्टाचार और अपराध को बनाएगी बड़ा मुद्दा • सुनील जाखड़ ने अमित शाह को लिखा पत्र, पंजाब की जेलों से चल रहे ड्रग्स कारोबार की एनआईए-ईडी जांच की मांग • झोटा हत्याकांड में सचिन पायलट और गुरजीत औजला ने 'मान सरकार' को घेरा, कानून व्यवस्था पर उठाए सवाल • परिवार से मिलने पहुंचे SGPC प्रधान, परविंदर झोटा को लेकर किया बड़ा ऐलान • पंजाब में CBI की जांच तेज! OSD राजबीर घुम्मन के बाद अब इन 6 लोगों से होगी पूछताछ, समन जारी • पंजाब में चुनाव आयोग की हलचल तेज! कब होंगे विधानसभा चुनाव, पढ़ें पूरी खबर • Ludhiana: सतलुज नदी में गैर-कानूनी माइनिंग पर सख्त Action, मामला दर्ज

राष्ट्रीय

अमेरिकी मीडिया की नजर में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में बदलता समीकरण

Updated on Saturday, September 12, 2026 16:25 PM IST

वॉशिंगटन: अमेरिका के प्रमुख अखबारों ने नई दिल्ली में हो रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को बदलते वैश्विक हालात की झलक के तौर पर देखा है। ये हालात तनावपूर्ण गठबंधनों, क्षेत्रीय युद्धों और वॉशिंगटन व बीजिंग के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा से तय हो रहे हैं। 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' ने एक खबर में कहा कि इस शिखर सम्मेलन में सबसे अहम सवाल यह है कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग में से कौन विकासशील दुनिया की अधिक प्रभावशाली आवाज बनकर उभरेगा। चीन ब्रिक्स को अमेरिकी ताकत को चुनौती देने के एक प्लेटफॉर्म के तौर पर देखता है। वहीं, भारत चाहता है कि यह ग्रुप इतना बड़ा और खुला रहे कि देशों को अलग-अलग गुटों में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर न होना पड़े।

अखबार ने कहा कि युद्ध, ऊर्जा की बढ़ती कीमतें, अमेरिकी टैरिफ और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर चिंताएं देशों को वॉशिंगटन और बीजिंग के साथ अपने रिश्तों पर फिर से सोचने के लिए मजबूर कर रही हैं। वॉशिंगटन में स्टिमसन सेंटर के चीन प्रोग्राम की डायरेक्टर युन सन ने 'टाइम्स' को बताया, "भारत को लेकर चीन की मुख्य चिंता हमेशा से भारत का अमेरिका के साथ झुकाव रही है। इसलिए बीजिंग निश्चित रूप से दिल्ली के साथ अपने रिश्तों को बेहतर बनाने का मौका नहीं गंवाना चाहेगा।"

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का यह दौरा सात साल में भारत का उनका पहला दौरा है। यह दौरा 2020 में सीमा पर हुई जानलेवा झड़प के बाद रिश्तों में आई लंबी खटास और 2024 में शुरू हुई सावधानी भरी कूटनीतिक सुधार की प्रक्रिया के बाद हो रहा है। शी 24 सितंबर को व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिलने वाले हैं। यह मुलाकात नई दिल्ली समिट को और भी अहम बनाती है, क्योंकि चीनी नेता अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ बेहद अहम बातचीत की तैयारी कर रहे हैं।

वॉल स्ट्रीट जर्नल ने कहा कि अमेरिका के साथ भारत और चीन के रिश्तों में अनिश्चितता ने इन दोनों परमाणु-हथियार वाले पड़ोसी देशों के लिए तनाव कम करने का मौका दिया है। तृप्ति लाहिड़ी और ऑस्टिन रैमजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान भारत-अमेरिका संबंधों में गिरावट आई थी, जिसकी वजह नई दिल्ली द्वारा रूसी तेल की खरीद जैसे मुद्दे थे।

नई दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में चीनी अध्ययन के प्रोफेसर श्रीकांत कोंडापल्ली ने जर्नल को बताया, "भारत स्थिति को फिर से संतुलित करने की कोशिश कर रहा है।"

अखबार ने कहा कि भारत-चीन संबंधों में कोई भी सुधार सीमा विवाद के अनसुलझे रहने, पाकिस्तान के साथ चीन के करीबी रिश्तों और हिंद महासागर में सुरक्षा प्रतिस्पर्धा की वजह से सीमित है।

सुन ने जर्नल को बताया, "चीनी पक्ष भी देख रहा है कि भारत सही समय का इंतजार कर रहा है और बेहतर विकल्पों पर काम कर रहा है, जो भविष्य में सामने आ सकते हैं। इसलिए मुझे लगता है कि इससे चीन-भारत संबंधों में मौजूदा सुधार की सतही प्रकृति और बढ़ जाती है।"

वाशिंगटन पोस्ट ने एसोसिएटेड प्रेस के पत्रकारों एजाज हुसैन और शेख सालिक की रिपोर्टें प्रकाशित कीं, जिनमें इस शिखर सम्मेलन को भारत के लिए एक मुश्किल संतुलन बनाने वाली कवायद बताया गया। रिपोर्टों में कहा गया कि बैठक में शामिल होने वाले नेताओं में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और शी शामिल थे। पीएम मोदी ने शिखर सम्मेलन से पहले पुतिन और पेजेश्कियान के साथ अलग-अलग बातचीत की।

वाशिंगटन 'पोस्ट' में छपी एपी की रिपोर्ट के अनुसार, इस बढ़े हुए ग्रुप के 11 सदस्य ग्लोबल ऑर्डर में अधिक प्रभाव चाहते हैं, लेकिन उनके राजनीतिक, आर्थिक और विदेश नीति से जुड़े हित अलग-अलग हैं। इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के सीनियर एनालिस्ट प्रवीण डोंथी ने एपी को बताया, "ग्लोबल साउथ कोई एक जैसा ग्रुप नहीं है। इसलिए, इस ग्रुप के लिए इन झगड़ों को संभालना और उनमें मध्यस्थता करना मुश्किल होगा।"

रिपोर्ट में कहा गया है कि यूक्रेन और मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध इन मतभेदों को सामने ला सकते हैं। भारत के रूस और ईरान के साथ पुराने संबंध हैं, जबकि वह अमेरिका, यूरोप, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ भी अपनी साझेदारी बढ़ा रहा है।

 

Have something to say? Post your comment
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने अपोलो अस्पताल पहुंचकर लालकृष्ण आडवाणी का हाल जाना

: केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने अपोलो अस्पताल पहुंचकर लालकृष्ण आडवाणी का हाल जाना

प्रधानमंत्री मोदी ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं

: प्रधानमंत्री मोदी ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं

गुजरात के भरूच की फार्मा कंपनी में रिएक्टर ब्लास्ट होने से 5 कर्मचारियों की मौ*त, 6 घायल

: गुजरात के भरूच की फार्मा कंपनी में रिएक्टर ब्लास्ट होने से 5 कर्मचारियों की मौ*त, 6 घायल

लालकृष्ण आडवाणी अपोलो अस्पताल के आईसीयू में भर्ती, डॉ. विनीत सूरी की निगरानी में चल रहा इलाज; हालत स्थिर

: लालकृष्ण आडवाणी अपोलो अस्पताल के आईसीयू में भर्ती, डॉ. विनीत सूरी की निगरानी में चल रहा इलाज; हालत स्थिर

विकसित भारत 2047 का लक्ष्य पाने में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, बुनियादी ढांचा और उद्यमिता चार प्रमुख स्तंभ: नीति आयोग उपाध्यक्ष

: विकसित भारत 2047 का लक्ष्य पाने में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, बुनियादी ढांचा और उद्यमिता चार प्रमुख स्तंभ: नीति आयोग उपाध्यक्ष

CJI पर टिप्पणी को लेकर संजय राउत और निखिल वागले को सुप्रीम कोर्ट का अवमानना नोटिस

: CJI पर टिप्पणी को लेकर संजय राउत और निखिल वागले को सुप्रीम कोर्ट का अवमानना नोटिस

बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर सख्त नियमों की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

: बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर सख्त नियमों की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

पंजाब ड्रग्स, गैंगस्टरवाद और संगठित अपराध से जूझ रहा है: गृह मंत्री अमित शाह

: पंजाब ड्रग्स, गैंगस्टरवाद और संगठित अपराध से जूझ रहा है: गृह मंत्री अमित शाह

‘सपा के बिना रायबरेली भी जीत पाओगे?’ राजनाथ सिंह का राहुल गांधी पर कटाक्ष

: ‘सपा के बिना रायबरेली भी जीत पाओगे?’ राजनाथ सिंह का राहुल गांधी पर कटाक्ष

‘सर्वत्र सर्वोत्तम सुरक्षा’ के ध्येय के साथ राष्ट्र की रक्षा में जुटे NSG के जवान, स्थापना दिवस पर नेताओं ने दी शुभकामनाएं

: ‘सर्वत्र सर्वोत्तम सुरक्षा’ के ध्येय के साथ राष्ट्र की रक्षा में जुटे NSG के जवान, स्थापना दिवस पर नेताओं ने दी शुभकामनाएं

X