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स्वास्थ्य

आधुनिक युग की नई वॉकिंग यानि लिम्फैटिक वॉकिंग

Updated on Wednesday, September 16, 2026 15:11 PM IST

आजकल सोशल मीडिया पर 10 मिनट की लिम्फैटिक वॉकिंग काफी ट्रेंड में है। दावा किया जा रहा है कि खास तरीके से की गई यह छोटी-सी वॉक शरीर में जमा अतिरिक्त फ्लूइड को बाहर निकालने और सूजन-ब्लोटिंग कम करने में मदद कर सकती है। इस वॉक में सिर्फ चलने पर ही नहीं, बल्कि बॉडी पॉश्चर, सांस लेने के तरीके और चलने की स्पीड पर भी ध्यान दिया जाता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह वाकई सामान्य वॉक से ज्यादा असरदार है या फिर यह सिर्फ एक नया फिटनेस ट्रेंड है? इसे समझने के लिए पहले यह जानना जरूरी है कि शरीर का लिंफैटिक सिस्टम कैसे काम करता है।


क्या होता है लिंफैटिक सिस्टम
हमारे शरीर में खून की तरह ही लिंफ (Lymph) नाम का एक तरल पदार्थ भी घूमता रहता है। इसका काम शरीर से अतिरिक्त फ्लूइड और कुछ वेस्ट मटीरियल को हटाने में मदद करना है। हालांकि, खून को पूरे शरीर में पहुंचाने के लिए दिल एक पंप की तरह काम करता है, लेकिन लिंफैटिक सिस्टम का अपना कोई पंप नहीं होता।
लिंफ फ्लूइड का मूवमेंट मुख्य रूप से शरीर की मांसपेशियों के सिकुड़ने-फैलने और सांस लेने की प्रक्रिया से होता है। यही वजह है कि जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक एक ही जगह बैठा रहता है या बहुत कम शारीरिक गतिविधि करता है, तो शरीर के कुछ हिस्सों में फ्लूइड जमा हो सकता है। इससे खासकर पैरों में सूजन, भारीपन या असहजता महसूस हो सकती है।

चलने से लिंफ फ्लो कैसे बढ़ता है
जब हम चलते हैं तो पैरों और शरीर की दूसरी मांसपेशियां लगातार काम करती हैं। मांसपेशियों के इस मूवमेंट से लिंफ फ्लूइड को आगे बढ़ने में मदद मिलती है। रिसर्च में भी यह देखा गया है कि हल्की शारीरिक गतिविधि के दौरान लिंफ का फ्लो आराम की स्थिति की तुलना में काफी बढ़ सकता है। इसलिए जो लोग दिनभर लंबे समय तक बैठे रहते हैं, उनके लिए बीच-बीच में उठकर कुछ देर चलना फायदेमंद हो सकता है। इससे पैरों में जमा फ्लूइड के मूवमेंट में मदद मिल सकती है और भारीपन या हल्की सूजन में राहत मिल सकती है।

10 मिनट की लिम्फैटिक वॉक में क्या खास है
लिम्फैटिक वॉकिंग में सामान्य वॉक की तरह ही चलना होता है, लेकिन इसमें कुछ बातों पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। इसमें शरीर को सीधा रखने, गहरी और नियमित सांस लेने और हाथों को स्वाभाविक तरीके से हिलाते हुए चलने की सलाह दी जाती है। इसका मकसद शरीर की मांसपेशियों को एक्टिव रखना है, जिससे लिंफ फ्लूइड के मूवमेंट में मदद मिल सके। हालांकि, अभी ऐसे मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं कि सिर्फ पॉश्चर या सांस लेने का तरीका बदलने से सामान्य वॉक की तुलना में लिंफ फ्लो बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। असल में मांसपेशियों का सिकुड़ना और सांस लेना सामान्य वॉक के दौरान भी होता है। इसलिए इस वॉक को कोई बिल्कुल अलग या चमत्कारी एक्सरसाइज मानना सही नहीं होगा।

वॉक के बाद हल्का महसूस होना फैट लॉस नहीं
लिम्फैटिक वॉक करने के बाद अगर शरीर हल्का महसूस होता है या पेट की ब्लोटिंग कुछ कम लगती है, तो इसका मतलब यह जरूरी नहीं कि शरीर की चर्बी कम हो गई है। कई बार यह बदलाव शरीर में मौजूद अतिरिक्त फ्लूइड के मूवमेंट या कम होने की वजह से महसूस हो सकता है। यह फैट लॉस नहीं बल्कि अस्थायी फ्लूइड शिफ्ट हो सकता है। खासकर लंबे समय तक बैठे रहने, ज्यादा नमक खाने या कुछ हार्मोनल बदलावों के कारण होने वाली हल्की सूजन और ब्लोटिंग में थोड़ी देर चलना राहत दे सकता है।

तो क्या 10 मिनट की वॉक करना फायदेमंद है
हां, 10 मिनट की हल्की वॉक एक अच्छी आदत हो सकती है, खासकर अगर आपका ज्यादातर समय बैठकर गुजरता है। इसके लिए किसी खास उपकरण की जरूरत नहीं होती। बस आरामदायक गति से चलें, शरीर को सीधा रखें और सामान्य तरीके से सांस लेते रहें। लेकिन सोशल मीडिया पर किए जाने वाले उन दावों पर पूरी तरह भरोसा नहीं करना चाहिए, जिनमें इसे कुछ मिनटों में सूजन, ब्लोटिंग या शरीर की चर्बी खत्म करने वाला तरीका बताया जाता है। वॉक शरीर को एक्टिव रखने और फ्लूइड के सामान्य मूवमेंट में मदद कर सकती है, लेकिन यह कोई जादुई वजन घटाने का तरीका नहीं है।
अगर शरीर में बार-बार या बिना किसी स्पष्ट कारण के सूजन रहती है, सूजन अचानक बढ़ जाती है या इसके साथ दर्द, सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इसे सिर्फ ब्लोटिंग समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

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