शिमला: किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर प्रदेश में जारी सियासी बयानबाजी के बीच कृषि मंत्री प्रो. चंद्र कुमार और लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने सांसद अनुराग सिंह ठाकुर और भाजपा नेताओं के दावों पर पलटवार किया है। दोनों मंत्रियों ने संयुक्त प्रेस वक्तव्य में कहा कि पिछली व्यवस्था के तहत हिमाचल प्रदेश पर करीब 800 करोड़ रुपये के वित्तीय योगदान की जिम्मेदारी तय थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने प्रदेश के सीमित वित्तीय संसाधनों और परियोजना के सामाजिक एवं पर्यावरणीय प्रभावों को देखते हुए इस व्यवस्था पर आपत्ति जताई।
मंत्रियों ने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में राज्य सरकार ने केंद्र के समक्ष लगातार हिमाचल के वित्तीय हितों का पक्ष रखा। उनके अनुसार, सरकार के प्रयासों के बाद करीब 2,000 करोड़ रुपये की अनुमानित देनदारी अब दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा द्वारा वहन की जाएगी।
भाजपा से पिछली वित्तीय व्यवस्था पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा
प्रो. चंद्र कुमार और विक्रमादित्य सिंह ने भाजपा नेताओं से सवाल किया कि पिछली भाजपा सरकार ने करीब 800 करोड़ रुपये के योगदान वाली व्यवस्था को क्यों स्वीकार किया था। उन्होंने कहा कि किशाऊ समझौते को लेकर केंद्र की भूमिका महत्वपूर्ण रही है, लेकिन प्रदेश सरकार द्वारा हिमाचल के वित्तीय हितों की रक्षा के लिए की गई बातचीत और प्रयासों को भी रिकॉर्ड में रखा जाना चाहिए।
मंत्रियों ने कहा कि छह राज्यों से जुड़े इस जटिल अंतरराज्यीय समझौते को अंतिम रूप देने में केंद्र की भूमिका रही, जबकि हिमाचल सरकार ने राज्य की वित्तीय देनदारी के मुद्दे पर अपना स्पष्ट पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि परियोजना को किसी एक सरकार या राजनीतिक दल की उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
हर साल 1,000 मिलियन यूनिट बिजली मिलने की संभावना
मंत्रियों ने कहा कि किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना से हिमाचल प्रदेश को हर वर्ष करीब 1,000 मिलियन यूनिट बिजली मिलने की संभावना है। उनके अनुसार, बिना अतिरिक्त वित्तीय बोझ के राज्य को सालाना अनुमानित 1,200 से 1,500 करोड़ रुपये का लाभ मिल सकता है।
उन्होंने कहा कि परियोजना केवल बिजली और पानी से संबंधित नहीं है, बल्कि इसके साथ हिमाचल के दीर्घकालिक आर्थिक हित और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े अधिकार भी जुड़े हैं। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के जल एवं विद्युत संसाधनों का उचित लाभ हिमाचल को मिले और राज्य पर अनावश्यक वित्तीय देनदारी न पड़े।
दस्तावेजी रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की चुनौती
अनुराग सिंह ठाकुर द्वारा किशाऊ परियोजना का श्रेय केंद्र सरकार को दिए जाने पर मंत्रियों ने कहा कि ऐसा दावा पूरे घटनाक्रम को प्रतिबिंबित नहीं करता। उन्होंने भाजपा नेताओं से परियोजना से जुड़े दस्तावेजी रिकॉर्ड सार्वजनिक करने को कहा। साथ ही यह स्पष्ट करने की मांग की कि पहले हिमाचल के लिए क्या वित्तीय व्यवस्था प्रस्तावित थी और वर्तमान सरकार ने उस पर आपत्ति क्यों जताई।
मंत्रियों ने कहा कि राजनीतिक बयानबाजी से दस्तावेजी रिकॉर्ड नहीं बदला जा सकता और प्रदेश की जनता को यह जानने का अधिकार है कि बातचीत से पहले और बाद में परियोजना की वित्तीय व्यवस्था में क्या बदलाव हुए।
प्रदेश की वित्तीय स्थिति का भी किया उल्लेख
संयुक्त बयान में मंत्रियों ने कहा कि वर्तमान सरकार को करीब 76,000 करोड़ रुपये के कर्ज और छठे वेतन आयोग से संबंधित लगभग 10,000 करोड़ रुपये की देनदारियां विरासत में मिली थीं। उन्होंने दावा किया कि इसके बावजूद सरकार ने वित्तीय अनुशासन और अतिरिक्त राजस्व जुटाने के लिए कदम उठाए हैं।
मंत्रियों के अनुसार, सरकार के प्रयासों से 2,200 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त राजस्व जुटाया गया है, जबकि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई से करीब 3,000 करोड़ रुपये के संभावित नुकसान को रोकने में मदद मिली है।
BBMB और शानन परियोजना के मुद्दे भी उठाए
प्रो. चंद्र कुमार और विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के जल एवं विद्युत संसाधनों में राज्य के अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार आगे भी प्रयास जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) और शानन पावर प्रोजेक्ट से जुड़े मामले भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हैं।
मंत्रियों ने भाजपा नेताओं से जल, बिजली और राज्य के वित्तीय हितों से जुड़े मुद्दों का राजनीतिकरण नहीं करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार बातचीत, आपत्ति दर्ज कराने और आवश्यक स्तर पर पैरवी के माध्यम से हिमाचल के हितों की रक्षा के प्रयास जारी रखेगी।