रोहड़ू : राजा वीरभद्र सिंह राजकीय महाविद्यालय सीमा (रोहड़ू) में प्री-ग्रामीण इन्क्यूबेशन केंद्र की ओर से RAMP योजना के तहत प्रथम जिला स्तरीय सेंसिटाइजेशन कार्यशाला का आयोजन किया गया। हिमाचल प्रदेश उद्यमिता विकास केंद्र (HPCED), उद्योग विभाग के सहयोग तथा द प्लैनेट एजुकेशन सोसाइटी, पांवटा साहिब के समन्वय से आयोजित कार्यशाला में 130 से अधिक विद्यार्थियों समेत 150 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
कार्यशाला का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं और विद्यार्थियों को उद्यमिता, स्वरोजगार, स्टार्टअप, नवाचार तथा सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों में उपलब्ध अवसरों से अवगत करवाना रहा। प्रतिभागियों को स्थानीय संसाधनों और अपने कौशल के आधार पर व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रेरित किया गया। प्री-ग्रामीण इन्क्यूबेशन केंद्र के माध्यम से युवाओं को व्यवसायिक विचार विकसित करने, आवश्यक कौशल हासिल करने और उद्यम स्थापित करने के लिए मार्गदर्शन एवं प्रशिक्षण उपलब्ध करवाने की जानकारी भी दी गई।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. अनिल चौहान रहे। इस अवसर पर प्रोफेसर एवं नोडल अधिकारी डॉ. उमेश नारटा, महाविद्यालय के 20 से अधिक स्टाफ सदस्य, तकनीकी रिसोर्स पर्सन पुनीत झामटा, सहायक प्रबंधक हर्ष कुमार तथा द प्लैनेट एजुकेशन सोसाइटी के सचिव माम राज सहित अन्य गणमान्य मौजूद रहे।
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को व्यवसाय शुरू करने की प्रक्रिया, उद्यमी मानसिकता, स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कारोबारी अवसरों, सरकारी योजनाओं और संस्थागत सहयोग की जानकारी दी। स्थानीय संसाधनों, पारंपरिक कौशल और आधुनिक तकनीक के समन्वय से ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ व्यवसाय स्थापित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई।
स्टार्टअप संस्थापक ने साझा की अपनी उद्यमिता यात्रा
कार्यशाला का विशेष आकर्षण स्थानीय स्टार्टअप MAVCLO की संस्थापक मनीषा सांगटा का सत्र रहा। उन्होंने अपने फैशन स्टूडियो और स्टार्टअप की शुरुआत से लेकर उसे आगे बढ़ाने तक के अनुभव विद्यार्थियों के साथ साझा किए। उन्होंने बताया कि छोटे से विचार को निरंतर प्रयास, कौशल, नवाचार और सही मार्गदर्शन के माध्यम से सफल व्यवसाय में बदला जा सकता है।
संवादात्मक सत्र में विद्यार्थियों ने व्यवसाय शुरू करने, बाजार की समझ, वित्तीय प्रबंधन और सरकारी सहायता से जुड़े सवाल पूछे। कार्यशाला के समापन पर युवाओं को केवल नौकरी तलाशने के बजाय रोजगार सृजक बनने, स्थानीय अवसरों की पहचान करने और नवाचार को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। आयोजकों के अनुसार, यह पहल ग्रामीण युवाओं में उद्यमिता की सोच विकसित करने और स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार व रोजगार सृजन के अवसर बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।