शिमला : केंद्र सरकार ने वर्ष 2029 तक नशा मुक्त भारत बनाने के लिए तीन वर्षीय रोडमैप तैयार किया है। ‘विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029’ के तहत नशे के खिलाफ कार्रवाई को समयबद्ध बनाने के साथ नियमित निगरानी, मापनीय परिणाम और परिणाम आधारित जवाबदेही पर जोर दिया गया है। इसी रोडमैप को लेकर पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी), शिमला ने नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) और गृह मंत्रालय के सहयोग से शुक्रवार को शिमला में ‘वार्तालाप’ कार्यक्रम आयोजित किया।
कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्रालय के अपर महानिदेशक (मीडिया) राज कुमार ने बताया कि रोडमैप तैयार करने के लिए 35 से अधिक मंत्रालयों, विभागों और एजेंसियों के साथ विचार-विमर्श किया गया। राज्य एनसीओआरडी बैठकों और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स सम्मेलनों से सुझाव लिए गए तथा हितधारकों के साथ 20 से अधिक उच्चस्तरीय बैठकें हुईं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तीन व्यापक समीक्षा बैठकें भी कीं। गृह मंत्री ने 26 जून 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 10वीं शीर्ष स्तरीय एनसीओआरडी बैठक में ‘विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029’ लॉन्च किया था।
एनसीबी के चंडीगढ़ एवं अमृतसर के जोनल डायरेक्टर अमनजीत सिंह ने रोडमैप की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यह चार प्रमुख स्तंभों, 25 घटकों और 200 से अधिक कार्य बिंदुओं पर आधारित है। चार स्तंभों में खुफिया जानकारी एवं अभियान आधारित प्रवर्तन, प्रीकर्सर एवं सिंथेटिक ड्रग्स नियंत्रण, मांग एवं नुकसान में कमी तथा क्षमता निर्माण एवं समन्वय शामिल हैं। इसके लिए ‘पता लगाना, बाधित करना और नष्ट करना’ को परिचालन मंत्र बनाया गया है।
334 से बढ़कर 1751 होंगे नशा मुक्ति केंद्र
रोडमैप में युवाओं के बीच नशीली दवाओं के दुरुपयोग की रोकथाम तथा उपचार और पुनर्वास व्यवस्था के विस्तार पर विशेष जोर दिया गया है। मार्च 2029 तक नशा मुक्ति केंद्रों की संख्या 334 से बढ़ाकर 1751 करने का लक्ष्य रखा गया है। बच्चों और महिलाओं के लिए विशेष सुविधाएं विकसित करने तथा प्रत्येक राज्य के एक मेडिकल कॉलेज में समर्पित विभाग स्थापित करने की भी योजना है।
अभियान को जन आंदोलन का स्वरूप देने के लिए वर्तमान में करीब 20 करोड़ लोगों तक पहुंच को बढ़ाकर 50 करोड़ लोगों तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। एनसीसी, एनएसएस और ‘माई भारत’ के माध्यम से एक लाख ‘नशा मुक्त भारत मित्र’ तैयार किए जाएंगे। स्कूल और कॉलेजों को नशीली दवाओं के दुरुपयोग के खिलाफ जागरूकता और रोकथाम की पहली पंक्ति के रूप में विकसित करने पर भी जोर दिया गया है।
93.33 लाख किलो मादक पदार्थ जब्त करने का दावा
एनसीबी के प्रस्तुतीकरण के अनुसार वर्ष 2019 से जुलाई 2026 तक 93,33,987 किलोग्राम मादक एवं मन:प्रभावी पदार्थ जब्त किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत 1,53,212 करोड़ रुपये बताई गई। इसी अवधि में 44,88,576 किलोग्राम एनडीपीएस पदार्थ नष्ट किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत 88,010 करोड़ रुपये बताई गई है। इसके अलावा 3,992 करोड़ रुपये की अवैध संपत्तियों एवं परिसंपत्तियों को फ्रीज या जब्त करने और 128 अवैध गुप्त प्रयोगशालाओं को ध्वस्त करने की जानकारी दी गई।
प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि 2019 से अब तक चारों स्तरों पर 16,966 से अधिक एनसीओआरडी बैठकें आयोजित की गईं। संयुक्त समन्वय समिति में 539 प्रमुख मामलों पर चर्चा हुई। भारतपोल के माध्यम से 195 देशों के साथ इंटरपोल संपर्क स्थापित करने तथा ‘मानस’ हेल्पलाइन 1933 के जरिए 3.33 लाख से अधिक नागरिकों को जोड़ने की जानकारी भी दी गई।
रोडमैप में डार्कनेट, सिंथेटिक ड्रग्स, अवैध वित्तपोषण, हवाला नेटवर्क, ड्रग कार्टेल और तस्करी नेटवर्क पर कार्रवाई के साथ नीति से अभियोजन तक विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय मजबूत करने पर जोर दिया गया है।
हर राज्य में मार्च 2027 तक सुसज्जित एएनटीएफ
योजना के तहत मार्च 2027 तक प्रत्येक राज्य में पूरी तरह सुसज्जित एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) स्थापित करने, मादक पदार्थों के नमूनों की रिपोर्टिंग 30 दिन के भीतर सुनिश्चित करने और गृह मंत्रालय की ओर से त्रैमासिक समीक्षा के माध्यम से परिणाम आधारित निगरानी करने का लक्ष्य रखा गया है। मादक पदार्थ विरोधी बुनियादी ढांचे के लिए 100 प्रतिशत केंद्रीय क्षेत्र वित्त पोषण का भी प्रावधान बताया गया।
कार्यक्रम में पीआईबी शिमला के सहायक निदेशक संजीव शर्मा सहित पीआईबी, दूरदर्शन, आकाशवाणी और हिमाचल प्रदेश लोक संपर्क विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। मीडिया एवं संचार अधिकारी अहमद खान ने नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने और जनभागीदारी को मजबूत करने में मीडिया की भूमिका पर जोर दिया।
हिमाचल के लिए अहम: केंद्रीय गृह मंत्री की मंजूरी के बाद शिमला में एनसीबी का जोनल कार्यालय स्थापित किया जाएगा, जिसे जल्द शुरू किए जाने की जानकारी कार्यक्रम में दी गई।